Guest Post | Submit   Job information   Contents   Link   Youtube Video   Photo   Practice Set   Affiliated Link   Register with us Register login Login
Join Our Telegram Group Join Our Telegram Group https://t.me/educratsweb

सिस्टम का अन्यायी चेहरा उजागर करती एक दलित मंत्री

*सिस्टम का अन्यायी चेहरा उजागर करती एक दलित मंत्री*
*मप्र की महिला बाल विकास मंत्री इमरती के बोल अभिजनों के लिये आईना है*
(डॉ अजय खेमरिया)



मप्र की महिला बाल विकास मंत्री है श्रीमती इमरती देवी सुमन।जाति से जाटव दलित है।तीसरी बार ग्वालियर जिले की डबरा विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए हुई है। हर बार उनकी जीत का अंतर बढ़ता गया है ,इस बार लगभग 60 हजार पर पहुँचा है।पिछले 15 अगस्त को वह देश भर की मीडिया में इसलिये चर्चा में आ चुकी है क्योंकि वह मुख्यमंत्री कमलनाथ  के सन्देश को पढ़ नही पाई थीं।सोशल मीडिया पर उनका जमकर मजाक उड़ाया गया था।लोगों ने उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए।उनके समर्थन में कतिपय लोगों ने उनकी दलित पृष्ठभूमि को लेकर बचाव का प्रयास किया आलोचकों को मनुवादी डण्डे से हड़काने की कोशिश की लेकिन इस सबसे इतर इमरती देवी के एक मौलिक पक्ष को दरकिनार कर दिया गया जो पिछले दिनों भोपाल में आयोजित एक समारोह में एक बार फिर मुखरित हुआ-वह यह कि इमरती देवी कैबिनेट मंत्री होने के बाबजूद दिल से बोलती है उनकी गैर शेक्षणिक,और गरीबी की पृष्ठभूमि  पर उन्हें कोई मलाल नही है वह इसे छिपाने की कोशिशें भी नही करती है एक राजनेता की जो बातें आम जनता को उसके नकलीपन,उसकी कथनी करनी में अंतर को रेखांकित करती है उससे इमरती देवी कोसों दूर नजर आती है इसलिये अक्सर उनकी बातों को लोग मनोरंजन का माध्यम बनाकर उपयोग करते रहे है।भोपाल की प्रशासनिक अकादमी में आयोजित बाल सरंक्षण और इसके प्रावधानों पर आयोजित एक कार्यशाला में वह मुख्य अतिथि थी मंच पर मप्र उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी,के अलावा जस्टिस सुजॉय पाल,अंजली पालो,जस्टिस अहुलवालिया,के अलावा मुख्यसचिव  एस आर मोहंती जैसे बड़े लोग मौजूद थे। प्रशासन अकादमी का वातानुकूलित सभागार जुबेनाइल जस्टिस एक्ट पर अंग्रेजी और मानक हिंदी मे मुखर था। बारी आई इमरती देवी की उन्होंने जो कुछ यहाँ बोला उसे सुनकर  यही लगा मानो बाल कल्याण और जेजे एक्ट की जमीनी हकीकत उन लोगों के सामने पूरी प्रमाणिकता से प्रस्तुत कर रही है जिसे इस मुल्क का सिस्टम सब कुछ जानते हुए भी न सुनना चाहता है न मंत्री जैसे ओहदे पर बैठे लोगों से सुनने की अपेक्षा रखता है।इमरती देवी ने साहस और गर्व के साथ कहा कि आज जो फोटो इस सेमिनार के पार्श्व में बैनर पर छपे है कभी वे खुद भी इसी श्रेणी में थी उनके पास न पढ़ने की सुविधाएं थी न खाने पीने और पहनने की लेकिन आज वह यहां मंत्री बनकर खड़ी है।मंत्री  के रूप में उन्होंने साफ कहा कि हमारा विभाग आज भी अमीरी गरीबी में विभाजन की रेखा को मजबूत करता है आंगनबाड़ी में गरीबों के बच्चे आते है उन्हें एकाद रोटी पकड़ाकर विदा कर दिया जाता है।उनकी पढ़ाई लिखाई की तुलना बस से स्कूल आते जाते बच्चों से की जा सकती है ? इमरती देवी ने बताया कि उनके मन मे यह कसक काफी समय से थी इसलिए उन्होंने अपने अधिकारियों से कहा कि गरीब के बच्चे भी प्राइवेट स्कूल जैसी आंगनवाड़ी में जाएं ऐसा कुछ कीजिये।इमरती देवी की स्वयं भोगी गई यह पीड़ा उनकी प्राथमिकता थी इसलिए कुछ समय पहले मप्र के सभी 313 ब्लाकों में एक एक आंगनबाड़ी को प्ले स्कूल में तब्दील कर दिया गया है इमरती देवी ने इसे अपनी उपलब्धि के रुप मे बताया। मप्र के न्यायमूर्तियों की ओर मुखातिब होते हुए उन्होंने कहाकि कोई गरीब माँ बाप अगर बच्चे से काम कराता है तो आप लोग उसे  पकड़वाकर बन्द करा देते है पर उसके बाद   वह खायेगा क्या?ऐसा कुछ कीजिये ताकि गरीब का पेट भर सके। आपका कानून  बच्चों को काम करने से तो रोकता है पर पेट की आग बुझाने पर चुप हो जाता है।
कोट टाई धारण किये हुए न्यायपालिका  और प्रशासन के बीसियों प्रतिनिधियो के पास मंत्री इमरती के लोक बोली में उठाये गए सवालों का कोई जबाब नही था।
सिवाय जेजे एक्ट के उन सैंकड़ा से ज़्यादा प्रावधानों पर चर्चा के जिनके अनुपालन के लिए भारत की सामाजिकी,प्रशासनिक मशीनरी अनुकूल है ही नही।
आप सवाल उठा सकते है कि इसमें नया क्या है जो मंत्री ने उठाया है ?गहराई से सोचेंगे तो आपको समझ आएगा कि  व्यवस्थाजनित जड़ता और अफसरी शिकंजे ने मप्र की इस दलित मंत्री को उसकी जड़ों से कटने नही दिया है वह सियासत में सच बोल रही है।सच बोलने का साहस कौन कर पाता है आजकल?वह दलित महिला और बिना पढ़ी लिखी न होने के बाबजूद अपने विभाग में उस गरीबी और दर्द को सुनाना चाह रही है जिसे पढ़े लिखे दून रिटर्न  काले अंग्रेज और उनके हम कदम नेताजी सुनने के लिये तैयार नही है।
संभव है इमरती अपने प्रयास में आगे जाकर असफल साबित हो जाएं पर उनकी ईमानदार कोशिश को आप खारिज नही कर सकते है।
सियासत में सार्वजनिक रूप से मन की बात बोलना हर किसी के वश की बात नही है।इसलिये इमरती बेशर्म और निर्मम  तंत्र में भले मनोरंजन की पात्र बन जाती हो पर उनके उठाये मुद्दे जमीन पर आम आदमी की पीड़ा को अभिव्यक्ति देते हुए लगते है।
वह जब पटवारियों को रिश्वतखोर कहती है या फिर सबके सामने यह कहती है कि ट्रांसफर कराने में पैसे लगते है तब वह  इस व्यवस्था की हकीकत को बयान नही करती है क्या।आज मप्र में सबसे बदनाम बिरादरी है पटवारी हर आमो खास इनसे परेशान है इसलिये इमरती इन्हें मंत्री होने के बाबजूद रिश्वतखोर कहती है तो क्या वह आम आदमी की भाषा नही बोलती है?सरकार में  ट्रांसफर कैसे होते है?ये किसको नही पता है।इसके बाबजूद इन सभी मामलों में जिम्मेदार चुप रहने के साथ इस व्यवस्थागत अन्याय का बचाव कर आखिर कौन सी काबिलियत का मुजायरा करते है?
आरक्षण के सहारे सत्ता के शिखर तक पहुँचने वाले  जनप्रतिनिधियों को हम हमेशा अफसरों की करतूतों को ढकते हुए ही देखते है।कुछ समय के लिये मंत्री बनने वाले लोग जब तक पद पर रहते है अपने अफसरों की लिखी इबारत पढ़ते है इस लिहाज से हमें इमारती देवी का अभिनंदन करना चाहिये क्योंकि वह अक्सर इस इबारत की जगह गरीब और वंचित की बात तो उठाती ही रहती है भले ही उनकी बातों का परिणाम न निकले। साथ ही वह  काले अंग्रेजो को भी आईना दिखाती रहती है।वह अपने नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी सीमाओं का अहसास कराने से नही हिचकती है उन्होंने  सिंधिया को मप्र कांग्रेस अध्यक्ष न बनाकर महाराष्ट्र का प्रभारी बनाये जाने पर यह भी सार्वजनिक रुप से ही कहा था न कि उन्हें(सिंधिया) वहां (महाराष्ट्र) कौन पूछता है?बनाना है तो राहुल गांधी मप्र का अध्यक्ष बनाएं।
जाहिर है इमरती हकीकत बोल देती है शायद यही उनके जीत के मार्जिन को हर बार बढ़ाने वाला कारक है।
वस्तुतः सच और आम आदमी की बात करने के लिये पढा लिखा होना जरूरी नही।देश की समस्याओं को पढ़े लिखे लोगों ने ही उलझाया है।  पीली बस- वाले स्कूल कॉलेजों और विश्वविद्यालयो की सूरत नही देखने वालों ने नही।
 

Contents shared By educratsweb.com
if you have any information regarding Job, Study Material or any other information related to career. you can Post your article on our website. Click here to Register & Share your contents.
For Advertisment or any query email us at bharatpages.in@gmail.com

RELATED POST
  1. Public Holidays for the year 2019 | Tamil Nadu Government
  2. National Agriculture Market Scheme
  3. Is the job offer fake or real? Tips to spot the difference
  4. Post Office Saving Schemes: Interest Rates, Tax Benefits, Other Details
  5. छलावे और सत्ता की मशीनरी के बीच दुनिया में लोकतंत्र की यात्रा - डॉ अजय खेमरिया
  6. आज भी भारत मे औपनिवेशिक मानसिकता से चलती है आईएएस बिरादरी
  7. 1967 में 36 विधायकों को लेकर राजमाता ने गिराई थी कांग्रेस सरकार, क्या 52 साल बाद उन्ही हालातों में पहुँच गया है मप्र
  8. लोकपथ से कांग्रेस को दूर धकेलता जनपथ ...!
  9. पंचायत राज...और गांधी एक पुनरावलोकन
  10. मप्र में कांग्रेसी कलह के बीज इसके अस्तित्व के साथ ही जुड़े है
  11. सिस्टम का अन्यायी चेहरा उजागर करती एक दलित मंत्री
  12. लोकतंत्र की बुनियादी पाठशाला को कुचलती सत्ता की समवेत सहमति
  13. देश की चिकित्सा शिक्षा को अफसरशाही से बचाने की गंभीर चुनौती....
  14. संघ में छिपे हुए गांधी को समझे बिना मोदी से कैसे लड़ेगा विपक्ष?
Save this page as PDF | Recommend to your Friends

http://educratsweb(dot)com http://educratsweb.com/content.php?id=887 http://educratsweb.com educratsweb.com educratsweb