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*कायस्थों के चार-धाम*

यू तो भारतवर्ष में भगवान चित्रगुप्त जी के अनेक मंदिर हैं, परन्तु इनमें से पौराणिक एवं एतिहासिक महत्व के प्रथम चार मंदिर, कायस्थों के चार धामों के समतुल्य महत्व रखते हैं। 

ये महत्वपूर्ण और प्रसिद्व तो हैं ही, प्रश्न है हमारी आस्था और विश्वास का। ये मंदिर निम्न हैं :-

1 . *मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के अंकपात में सिथत शिला मंदिर :-* क्षिप्रा नदी के तट पर सिथत, अवनितका अथवा उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) भारतीय पुराणों में एक पवित्र *मोक्षदाता तीर्थ* बताया गया है और अंकपात क्षेत्र, जहा चित्रगुप्त जी ने तपस्या करके सर्वज्ञता की थी, उज्जैन नगर से लगभग 12 किमी. उत्तर दिशा में सिथत है।

 

2 . *श्री धर्महरि चित्रगुप्त मंदिर अयोध्या जिला फैजाबाद* (उत्तर प्रदेश) :- ”श्री धर्महरि चित्रगुप्त मंदिर” वर्तमान में, सरयू नदी के दक्षिण, नयाघाट से फैजाबाद, राजमार्ग पर सिथत तुलसी उधान से लगभग 500 मीटर पूरब दिशा में, डेरा बीबी मोहल्ले में, बेतिया राज्य के मंदिर के निकट है। 

वैसे नयाघाट से मंदिर की सीधी दूरी लगभग एक किमी. होगी।   श्री धर्महरि चित्रगुप्त मंदिर कायस्थों के चारों धामों में दूसरे स्थान का महत्व रखता है।

 

3 . *तमिलनाडू के काचीपुरम (पौराणिक-काचीपुरी) का श्री चित्रगुप्त स्वामी मंदिर* :- दक्षिण भारत के तमिलग्रन्थ करणीगर पुराणम के साथ ही ”विष्णु धर्मोत्तर पुराण” में भी श्री चित्रगुप्त स्वामी के नाम से ज्ञात श्री चित्रगुप्त वशंज माने गये ”करुणीगर कायस्थों” का उल्लेख मिलता है। 

 

इन्हीं श्री चित्रगुप्त स्वामी का एक भव्य मंदिर, मंदिरों की नगरी काचीपुरम में नगर के मध्य में सिथत है।   श्री चित्रगुप्त स्वामी का मंदिर, काचीपुरम नगर के मध्य में, श्री रामकृष्ण आश्रम से लगभग एक फलाग की दूरी पर एक ऊचे चबूतरे पर सिथत है। यह चबूतरा इतना ऊचा है कि कोर्इ भी दर्शनार्थी नीचे खड़े होकर, मंदिर के गर्भगृह में स्थापित मूर्ति के दर्शन नहीं कर सकता, उसे चबूतरे पर ऊपर चढ़ने के बाद ही श्री चित्रगुप्त स्वामी के दर्शन प्राप्त हो सकते हैं। 

मंदिर का स्थापत्य बहुत सुन्दर, भव्य और गरिमामय है। मंदिर के गर्भ गृह में, हाथों में कलम दवात लिये हुये भगवान चित्रगुप्त स्वामी के साथ ही देवी कार्नकी की कास्य प्रतिमा स्थापित है।

 

4  . *बिहार के पटना सिटी के दीवान मोहल्ले में, नौजरघाट* सिथत ”श्री चित्रगुप्त आदि मंदिर पटना” मगघ की प्राचीन राजधानी पाटलिपुत्र तथा बिहार राज्य के आधुनिक मुख्यालय पटना में, पतित पावनी गंगा के तट पर, दीवान मोहल्ला के नौजरघाट पर सिथत इस ऐतिहासिक चित्रगुप्त मंदिर  सोने में सुहागा यह है कि राजा टोडरमल द्वारा स्थापित और बाद में चोरी हो गर्इ कसौटी पत्थर की भगवान चित्रगुप्त जी की मूर्ति मिल गर्इ।

 

अपने परिवार सहित इन स्थानों का दर्शन करें। सभी कायस्थ को जानकारी दें। 

 

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कायस्थों के चार-धाम
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Published on Monday June 1 2020
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