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मिंत्रा के सीईओ अनंत नारायण ने इस्तीफा दिया, अब फ्लिपकार्ट के अमर लीड करेंगे


मुंबई. ऑनलाइन फैशन रिटेलर मिंत्रा के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) अनंत नारायणन ने पद से इस्तीफा दे दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले से सीधे तौर पर जुड़े सूत्र ने बताया कि फ्लिपकार्ट के एग्जीक्यूटिव अमर नागाराम अब इस यूनिट का नेतृत्व करेंगे। अनंत का इस्तीफा भी इसी बदलाव के चलते किया गया है।

नए सीईओ से अच्छे नहीं थे रिश्ते- रिपोर्ट

मिंत्रा फ्लिपकार्ट की ही ऑनलाइन फैशन रिटेलर यूनिट है। फ्लिपकार्ट की 70 फीसदी हिस्सेदारी अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट ने खरीदी है।नारायणन ने जुलाई 2015 में मिंत्रा के सीईओ का पद संभाला था। इससे पहले वेमैकिंजे एंड कंपनी से जुड़े हुए थे।फ्लिपकार्ट के सीईओ बिन्नी बंसल ने नवंबर में यौन शोषण के आरोपों के चलते इस्तीफा दे दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक,नए ग्रुप सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति के साथ नारायणन के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। बिन्नी बंसल के इस्तीफे के बाद नारायणन की रिपोर्टिंग कल्याण को हो गई। कृष्णमूर्ति के कामकाज का तरीकाअलग है।

  1. रिपोर्ट के मुताबिक, मिंत्रा के चीफ रेवेन्यू अफसर मिथुन सुंदर, एचआर हेड मनप्रीत राटिया ने भी इस्तीफा दे दिया है।

  2. हालांकि, अमर के इस्तीफे को लेकर एजेंसी की तरफ से भेजे गए ई-मेल का मिंत्रा ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।

  3. मिंत्रा और दूसरी ऑनलाइन फैशन रिटेलर जोबोंग से अब तक करीब 150-200 लोगों को निकाला गया है। आने वाले वक्त में और ज्यादा लोगों को निकाले जाने की खबर है।

  4. इस्तीफे की खबर अनंत के उस इंटरव्यू के कुछ दिनों बाद ही आई है, जिसमें उन्होंने कहा था- बिन्नी बंसल के इस्तीफे के बाद उच्च पदों पर होने वाले बदलावों के बावजूद मैं ऑपरेशंस का नेतृत्व जारी रखूंगा।



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      अनंत नारायण

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विदेशी मुद्रा भंडार 93 करोड़ रुपए बढ़कर सात हफ्तों के उच्चतम स्तर पर


मुंबई. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 30 नवंबर को समाप्त सप्ताह में 93.28 करोड़ डॉलर बढ़कर सात सप्ताह के उच्चतम स्तर 393.72 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इससे पहले 23 नवंबर को समाप्त सप्ताह में यह 79.50 करोड़ डॉलर घटकर 392.79 अरब डॉलर रहा था।

रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 नवंबर को खत्म हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 78.79 करोड़ डॉलर की बढ़त के साथ 368.49 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान स्वर्ण भंडार भी 15.18 करोड़ डॉलर बढ़कर 21.15 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास आरक्षित निधि 44 लाख डॉलर घटकर 2.63 अरब डॉलर और विशेष आहरण अधिकार 25 लाख डॉलर घटकर 1.45 अरब डॉलर पर पहुंच गया।



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Indian foreign reserves rises by 930 million dollars

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इंटरनेट से अछूते दुनिया के आखिरी देश क्यूबा में 3G शुरू, डेटा भारत से 175 गुना महंगा


गैजेट डेस्क. अफ्रीकन देश क्यूबा के नागरिकों को अब इंटरनेट सुविधा मिल गई है। गुरुवार से यहां सभी नागरिकों के लिए पहली बार 3G इंटरनेट सेवा शुरू कर दी गई। यह दुनिया का आखिरी देश है, जहां इंटरनेट सर्विस शुरू हुई। क्यूबा की टेलीकॉम कंपनी ETECSA ने यह सर्विस शुरू की है। हालांकि, यहां पहले भी इंटरनेट था, लेकिन इसका इस्तेमाल सभी लोग नहीं कर पाते थे।

  1. क्यूबा में इंटरनेट सर्विस शुरू करने वाली टेलीकॉम कंपनी ने इसके प्लान भी जारी कर दिए। इसके मुताबिक, क्यूबा के नागरिकों को हर महीने का प्लान 30 डॉलर (करीब 2100 रुपए) में मिलेगा, जिसमें सिर्फ 4 जीबी 3G डेटा का ही इस्तेमाल कर सकेंगे।

  2. रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा की आबादी 1.12 करोड़ है। इनमें से भी सिर्फ 50 लाख लोग ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। यहां के ज्यादातर लोग मजदूरी करके ही अपना गुजारा करते हैं।

  3. रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा में महीने की औसतन मजदूरी ही 30 डॉलर है जबकि कई श्रमिकों को तो इससे भी कम मजदूरी मिलती है। लिहाजा, इंटरनेट के लिए ये कीमत यहां के लोगों के लिए ज्यादा हो सकती है।

  4. ऐसा नहीं है कि यहां पहली बार इंटरनेट आया है। इससे पहले भी यहां इंटरनेट था, लेकिन हर कोई इसका इस्तेमाल नहीं कर पाता था। 2013 तक यहां पर इंटरनेट सिर्फ महंगे होटलों में ही था ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक इसका इस्तेमाल कर सकें।

  5. इसके बाद 2017 में यहां पर इंटरनेट के लिए देशभर में वाई-फाई हॉटस्पॉट और इंटरनेट कैफे शुरू किए गए। अभी क्यूबा में देशभर में 1200 वाई-फाई हॉटस्पॉट हैं, जिसका इस्तेमाल सिर्फ 20 लाख लोग ही कर पाते हैं।

  6. यहां पर तकरीबन 670 इंटरनेट कैफे हैं जहां एक घंटे इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए एक डॉलर (करीब 70 रुपए) देना होता है।

  7. भारत में 4G इंटरनेट सर्विस आ चुका है और 5G को लेकर भी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं, लेकिन क्यूबा में फिलहाल 3G कनेक्टिविटी ही आई है।

  8. क्यूबा में हर महीने 4 जीबी डेटा के लिए 2100 रुपए का खर्च करना होगा, यानी एक जीबी डेटा के लिए करीब 525 रुपए।

  9. भारत में जियो की तरफ से 399 रुपए में 126 जीबी 4G डेटा, 84 दिनों के लिए मिलता है। इस हिसाब से एक दिन में 1.5 जीबी डेटा के लिए 4.75 रुपए खर्च करने होते हैं जबकि एक जीबी डेटा की कीमत सिर्फ 3 रुपए के आसपास आती है।

  10. भारत में जियो 4 जीबी 4G डेटा सिर्फ 12 रुपए में देता है जबकि क्यूबा में इतने ही 3G डेटा के लिए 2100 रुपए खर्च करने होते हैं जो भारत की 4G सर्विस की कीमत से भी 175 गुना महंगा है।

  11. साल क्या हुआ?
    2013 सरकार ने इंटरनेट कैफे खोलने की अनुमति दी, साथ ही होटलों में भी इंटरनेट शुरू हुआ
    2014 सरकारी ईमेल सर्विस इस्तेमाल करने की अनुमति मिली, इसके लिए चार्ज लिया गया
    2015 क्यूबा के कल्चर सेंटर में देश का पहला वाई-फाई हॉटस्पॉट शुरू हुआ
    2017 टेलीकॉम कंपनी ETECSA ने होम इंटरनेट सर्विस शुरू की, इसके अभी सिर्फ 60 हजार ग्राहक
    2018 देश के आम नागरिकों के लिए इंटरनेट सर्विस शुरू हुई



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      cuba to allow citizens to access internet on mobile phones

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फेसबुक-इंस्टाग्राम पर राजनीतिक विज्ञापनों के लिए पहचान और लोकेशन बताना जरूरी


गैजेट डेस्क. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में रूसी दखलंदाजी के आरोपों का सामना कर रही फेसबुक ने भारत में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी पॉलिसी में बदलाव किया है। फेसबुक ने गुरुवार को एक ब्लॉग पोस्ट में जानकारी दी कि लोकसभा चुनाव के दौरान फेसबुक-इंस्टाग्राम पर राजनीतिक विज्ञापन चलाने के लिए विज्ञापनदाताओं को अपनी पहचान और लोकेशन बतानी होगी। फेसबुक का दावा है कि इससे चुनावों में विदेशी दखलंदाजी से बचा जा सकेगा।

  1. फेसबुक की प्रोडक्ट मैनेजर सारा क्लार्क स्किफ ने ब्लॉग पोस्ट में बताया, "फेसबुक-इंस्टाग्राम पर दिखाए जाने वाले राजनीतिक विज्ञापन को लेकर हम नए बदलाव करने जा रहे हैं। इससे पहले हमने यही बदलाव अमेरिका, ब्राजील और यूके के चुनावों के दौरान किए थे और अब हमारा अगला कदम भारत में होने वाले चुनावों पर है।"

  2. ब्लॉग पोस्ट में आगे लिखा है, "इस बदलाव का सीधा असर भारत में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के राजनीतिक विज्ञापनों पर होगा। अब अगर कोई भी व्यक्ति राजनीति से जुड़ा विज्ञापन फेसबुक या इंस्टाग्राम पर चलाना चाहता है तो उसके लिए उसे अपनी पहचान और लोकेशन की जानकारी देना होगा।"

  3. सारा ने बताया, "नई पॉलिसी के तहत, फेसबुक-इंस्टाग्राम पर चलने वाले राजनीतिक विज्ञापनों पर राजनीतिक विज्ञापन लिखा होगा ताकि लोगों को पता चल सके। साथ ही इस पर विज्ञापन देने वाले का नाम भी लिखा जाएगा। हालांकि, ये पॉलिसी न्यूज पब्लिशर्स पर लागू नहीं होगी।"

  4. फेसबुक के मुताबिक, राजनीतिक विज्ञापन दिखाने को लेकर नए बदलाव शुक्रवार से ही लागू हो गए हैं। साथ ही विज्ञापन दिखाने के लिए वेरिफिकेशन भी शुक्रवार से कराए जा सकते हैं।

  5. राजनीति से जुड़े विज्ञापन फेसबुक या इंस्टाग्राम पर दिखाने पर नीचे डिस्क्लेमर में विज्ञापनदाता का नाम भी दिखाई देगा। साथ ही इस विज्ञापन को देने वाले व्यक्ति का नाम भी दिखाया जाएगा।

  6. इसके अलावा राजनीतिक विज्ञापन को 'एड लाइब्रेरी' में 7 साल तक के लिए स्टोर किया जाएगा ताकि बाद में भी इस एक्सेस और देखा जा सके।

  7. फेसबुक-इंस्टाग्राम पर राजनीतिक विज्ञापन दिखाने के लिए विज्ञापनदाता भारत सरकार की तरफ से जारी आइडेंटिटी प्रूफ (पैन कार्ड, वोटर कार्ड, पासपोर्ट या लाइसेंस) के जरिए अपनी पहचान और लोकेशन का वेरिफिकेशन करा सकेंगे।

  8. इसके लिए विज्ञापनदाता अपने मोबाइल फोन या कम्प्यूटर पर फेसबुक लॉग-इन कर अपनी पहचान और लोकेशन की जानकारी दे सकते हैं। मोबाइल के जरिए वेरिफिकेशन कराने के लिए अपडेटेड ऐप डाउनलोड करना होगा।



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      facebook tightens political ads policy in india ahead of lok sabha election
      facebook tightens political ads policy in india ahead of lok sabha election

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नौकरी के लिए 'बेस्ट प्लेस' नहीं रहा फेसबुक, पहले से फिसलकर 7वें नंबर पर आया; अमेजन टॉप-100 से भी बाहर


गैजेट डेस्क. लगातार डेटा लीक और गिरते स्टॉक की वजह से अब फेसबुक नौकरी के लिए 'बेस्ट प्लेस' नहीं रहा। ग्लासडोर वेबसाइट ने हाल ही में 'टॉप-100 बेस्ट प्लेस टू वर्क' की लिस्ट में इस साल फेसबुक 7वें नंबर पर रहा जबकि पिछले साल फेसबुक इस लिस्ट में पहले नंबर पर था। इसके अलावा फेसबुक की रेटिंग में भी गिरावट आई है। पिछले साल फेसबुक की रेटिंग 5 में से 4.6 थी जो इस साल कम होकर 4.5 पर पहुंच गई। वहीं ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन टॉप-100 की लिस्ट में भी नहीं है।

2015 के बाद पहली बार फेसबुक की रैंकिंग में गिरावट

  • ग्लासडोर के कम्युनिटी एक्सपर्ट स्कॉट डोब्रोस्की के मुताबिक, फेसबुक में एम्प्लॉय सेटिस्फेक्शन लगातार गिरता जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में फेसबुक में एम्प्लॉय सेटिस्फेक्शन की रेटिंग 4.6 थी जो चौथी तिमाही तक आते 4.3 पर पहुंच गई।
  • उन्होंने बताया कि, 'फेसबुक के कर्मचारी अब अपनी नौकरी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं और नए नौकरी तलाश रहे हैं।' उन्होंने बताया कि, '2015 के बाद ये पहली बार है जब फेसबुक की रेटिंग में इस तरह की गिरावट आई है।'
  • डोब्रोस्की ने बताया कि, 'फेसबुक के कर्मचारी कंपनी की लीडरशिप से ज्यादा मजबूत इंटरनल स्ट्रक्चर और ट्रांसपेरिंसी चाहते हैं।'

पहले नंबर पर बेन एंड कंपनी, चौथी बार हुआ ऐसा

  • ग्लासडोर की 2019 की लिस्ट में बोस्टन की मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म 'बेन एंड कंपनी' पहले नंबर पर है और इसे 5 में से 4.6 रेटिंग मिली है। ये चौथी बार था जब बेन एंड कंपनी इस लिस्ट में पहले नंबर पर रही। इससे पहले यही कंपनी 2012, 2014 और 2017 में भी पहले नंबर पर रह चुकी है।
  • 100 कंपनियों की लिस्ट में इस बार 29 टेक कंपनियों को जगह मिली है जबकि पिछले साल 28 टेक कंपनियां ही इस लिस्ट में शामिल थीं। इसके साथ ही अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी एचपी को पहली बार इस लिस्ट में शामिल किया है।

एपल और माइक्रोसॉफ्ट ने लगाई छलांग : ग्लासडोर की लिस्ट में एपल इस साल 71वें नंबर पर रही जबकि पिछले साल एपल 84वें नंबर पर थी। वहीं माइक्रोसॉफ्ट भी इस लिस्ट में 39वें नंबर से 34वें नंबर पर पहुंच गई है।

नौकरी के लिए टॉप-10 बेस्ट प्लेस :

कंपनी रेटिंग
बेन एंड कंपनी 4.6
जूम वीडियो कम्युनिकेशन 4.5
इन-एन-आउट बर्गर 4.5
प्रोकोर टेक्नोलॉजीस 4.5
बोस्टन कन्सल्टिंग ग्रुप 4.5
लिंक्डइन 4.5
फेसबुक 4.5
गूगल 4.4
लुलुलेमन 4.4
साउथवेस्ट एयरलाइंस 4.4



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facebook ranking falls in best place to work in 2019

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'सुई धागा' ने दिखाई Amazon जैसे मार्केटप्लेस पर ग्लोबल सेलिंग की नई राह


यदि आपने पिछले दिनों रिलीज हुई फिल्म 'सुई धागा' देखी है, तो इसने आपको जरूर चौंकाया होगा। फिल्म में वरुण धवन तथा अनुष्का शर्मा के किरदार मौजी वममता दिखाते हैं कि यदि इरादा पक्का हो तो छोटा व्यवसाई भी अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार में बेच सकता है। भारत के लाखों छोटे और मध्यम स्तर केव्यवसाइयों को भी Amazon जैसी ई—कॉमर्स वेबसाइट्स ने ऐसा ही ग्लोबल मंच दिया है।


Amazon जैसी आॅनलाइन सामान बेचने वाली वेबसाइट्स ने भारत में एक नई क्रांति का आगाज किया है। भारत का कोई भी व्यवसाई अब अपने उत्पाद देश में हीनहीं बल्कि विदेशों में भी बेच सकता है। एक क्लिक पर Amazon.in पर रजिस्टर करने के बाद वह भारतीय बाजार में अपने उत्पाद आॅनलाइन बेच सकता है।इसके बाद वह अपनी उपस्थिति को देश की सीमाएं तोड़कर और आगे बढ़ा सकता है। वह अपने उत्पाद अमेरिका, यूरोप, जापान और आॅस्ट्रेलिया रीजन के 11मार्केटप्लेस पर बेच सकता है। इसमें उत्तर अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको, ब्रिटेन, इटली, स्पेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश शामिल हैं। पहले जहां छोटे व्यवसाइयों केपास अपने उत्पाद बेचने के लिए मंच नहीं था, वहीं Amazon जैसा मार्केटप्लेस आने के बाद उनके लिए पूरा देश और दुनिया ही पसंदीदा बाजार बन गया है।


Amazon.in के आंकड़े बताते हैं कि इस मार्केटप्लेस पर 4 लाख से अधिक आॅनलाइन विक्रेता मौजूद हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 50 फीसदी सेज्यादा विक्रेता छोटे शहरों के हैं। इन विक्रेताओं में बड़ी संख्या में महिला उद्यमी और शिल्पकार व दस्तकार भी शामिल हैं। जो व्यवसायी पंरपरागत तरीके सेआॅफलाइन व्यवसाय करते हैं वे शुरुआत में ई—कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर आने में थोड़ा हिचकते हैं, लेकिन उनकी यह हिचक कुछ ही समय में दूर हो जाती है।


'ए लैदर गुड्स' के संचालक अनस कहते हैं कि 2011 से पहले वे जिन फर्मों को अपने उत्पाद बनाकर दे रहे थे वे उनसे उत्पाद खरीदकर उन्हीं को विदेशों मेंअधिक मुनाफे पर बेच रही थी। उन्हें अपने भाई से Amazon.in की जानकारी मिली और वे इससे जुड़ गए। कुछ वर्षों तक भारतीय बाजार में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद पिछले साल उन्होंने Amazon.com के साथ अमरीका में अपने उत्पाद बेचना शुरू किया है और इसका उन्हें बहुत फायदा मिला है। अनस कहते हैं, 'अबमार्केट बहुत ओपेन हो गया है। हम दूसरों के लिए उत्पाद नहीं बना रहे हैं। हमारी दूसरे ट्रेडर्स पर डिपेंडेंसी कम हो गई है।'


अनस बताते हैं कि वे Amazon से इसलिए जुड़े क्योंकि यह एक भरोसेमंद मार्केटप्लेस है। अनस की कंपनी ने 2 प्रॉडक्ट्स के साथ बिजनेस शुरू किया और आज उनके 70 से अधिक प्रॉडक्ट मार्केटप्लेस पर मौजूद हैं। वे बताते हैं कि Amazon का सपोर्ट और लॉजिस्टिक पार्टनर बहुत अच्छे हैं। कोई भी नया व्यवसायी यहां अपना बिजनेस आसानी से शुरू कर सकता है।


अहमदाबाद की टॉवेल कंपनी 'नंदन टेरी' के रौनक चिरिपाल कहते हैं कि जब उन्हें Amazon.in के बारे में पता चला तो उन्होंने इसका ट्रायल लिया। ट्रायल सक्सेसफुल रहा तो उन्होंने इस मार्केटप्लेस पर अपने कई प्रॉडक्ट उतारे। आज उनका ब्रांड Amazon.in की टॉवेल श्रेणी में सबसे अच्छा व्यवसाय कर रहा है।रौनक बताते हैं कि यदि आपको दुनिया भर के नए कस्टमर्स के साथ जुड़ना है तो इसके लिए ई—कॉमर्स प्लेटफॉर्म सबसे अच्छा माध्यम है। उन्होंने बताया कि Amazon पर रजिस्टर करने से लेकर सामान की डिलीवरी और पेमेंट का प्रोसेस बहुत आसान है। उन्होंने कहा कि यदि प्रॉडक्ट अच्छा हो, क्वालिटी अच्छी हो और बिजनेस में इन्वॉल्वमेंट रखा जाए तो आॅनलाइन ग्लोबल सेलिंग में सफलता निश्चित तौर पर मिलती है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में ई—कॉमर्स श्रेणी में बहुतग्रोथ हुई है। जो भी सही समय पर इसमें शामिल होगा उसके लिए तरक्की की राहें जल्दी खुलेंगी।


अनस और रौनक जैसे ही लाखों ऐसे सफल विक्रेता और भी हैं जो कपड़े, शिल्प उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट, सजावटी सामान, ज्वैलरी, रसोई के उपकरण आदि जरूरत का हर सामान Amazon जैसे मार्केटप्लेस पर बेच रहे हैं और अपनी छाप देश—दुनिया के वैश्विक बाजार में छोड़ रहे हैं। इस क्रांति में आप भी भागीदार हो सकते हैं। इसके लिए आपको हिचक छोड़नी होगी और संभावनाओं भरे बाजार में कदम रखना होगा। व्यवसायी के रूप में Amazon.in से जुड़ने के लिए क्लिक करें



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Amazon paves way for sellers to go global with their business.

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टैक्स के लिहाज से इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड ज्यादा फायदेमंद होते हैं: अश्विन पाटनी


नई दिल्ली. कहा जाता है कि मृत्यु और टैक्स के सिवाय दुनिया में कुछ भी निश्चित नहीं है। हमारी कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स चुकाने में चला जाता है। इसलिए निवेश करते समय उस पर टैक्स के असर को ध्यान में रखना भी जरूरी है। कम टैक्स वाले निवेश के विकल्पों में म्यूचुअल फंड भी एक है क्योंकि इसमें निवेशक को टैक्स तभी चुकाना पड़ता है जब वह म्यूचुअल फंड यूनिट को रिडीम करता है यानी उन्हें बेचता है। टैक्स के लिहाज से आयकर कानून में म्यूचुअल फंड स्कीमों को दो कैटेगरी में बांटा गया है- इक्विटी ओरिएंटेड और नॉन इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड। दोनों के लिए टैक्स के नियम अलग हैं।


इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में स्कीम का कम से कम 65% पैसा शेयरों में निवेश होता है। ये शेयर भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों के हों। जो फंड इक्विटी ओरिएंटेड के दायरे में नहीं हैं, वे सब नॉन-इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड कहलाते हैं। डेट फंड और गोल्ड फंड इसके उदाहरण हैं।


म्यूचुअल फंड कैटेगरी के अलावा आयकर कानून में इनसे होने वाले मुनाफे को भी दो अलग कैटेगरी में बांटा गया है। शॉर्ट टर्म और लॉन्गटर्म। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किसी स्कीम में कितने समय के लिए निवेश कर रखा है।


शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन: इक्विटी ओरिएंटेड फंड में अगर आपने 12 माह या उससे कम अवधि के लिए निवेश किया है तो वह शॉर्ट टर्म कहलाएगा। नॉन-इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में अगर आप कम से कम 36 माह तक बने रहते हैं तो वह शॉर्ट टर्म के दायरे में आएगा। इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में 15% की दर से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। सरचार्ज व सेस अलग होता है। नॉन-इक्विटी म्यूचुअल फंड में टैक्स की दर निवेशक के आयकर स्लैब के हिसाब से तय होती है।

लॉन्गटर्म कैपिटल गेन: इक्विटी ओरिएंटेड फंड में अगर आपने 12 महीने से ज्यादा समय के लिए निवेश किया है तो वह लॉन्गटर्म कहलाएगा। नॉन-इक्विटी फंड में इसकी समय सीमा 36 महीने से अधिक होनी चाहिए। वित्त वर्ष 2017-18 तक निवेशकों को लॉन्गटर्म कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था। लेकिन अप्रैल 2018 से इक्विटी शेयरों और इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में होने वाले मुनाफे पर लॉन्गटर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू हो गया है। इसमें टैक्स की दर 10% है। सरचार्ज और सेस अलग लगता है। इसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता। नॉन इक्विटी म्यूचुअल फंड में मुनाफे पर 20% की दर से टैक्स लगेगा। इसमें भी सरचार्ज और सेस अलग होगा, लेकिन इसमें इंडेक्सेशन का भी फायदा मिलेगा।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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अश्विन पाटनी, हेड, प्रोडक्ट्स, एक्सिस म्यूचुअल फंड।

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लग्नाआधी मुली बॅचलर पार्टीसाठी किंवा फक्त मैत्रिणी मिळून येथे जाऊ शकतात ट्रिपसाठी, १५००० रुपयांपासून सुरु होतात पॅकेजेस


नवी दिल्ली : तुम्ही तुमच्या खास मैत्रिणीच्या लागणीसाठी तयार होताय का? तुम्ही अजून तुमच्या बॅचलर पार्टीविषयी काही विचार केलाय? की तुम्ही फक्त एखादी गर्ल्स टूर प्लॅन करताय आणि तुमचा फोकस सेफटी आणि टूर डिटेल्सवर आहे. तर आज आम्ही तुम्हाला अशा काही टूर्सविषयी सांगणार आहोत ज्या फक्त मुलींसाठी आहेत. बऱ्याच कंपन्या सध्या फक्त मुलींसाठी खास करून बॅचलोरेट मुलींसाठी टूरचे पॅकेजेस देत आहेत. जाणून घेऊयात अशाच काही पॅकेजेसविषयी..

मुलींच्या टूरसाठी कोणत्या गोष्टी असतात जास्त महत्वाच्या..
कॉक्स अँड किंगचे अधिकारी थॉमस यांनी सांगितले की या ट्रिप फक्त मुलींसाठी तयार केल्या जातात. यामध्ये मुलींच्या सुरक्षिततेपासून त्यांचे खाणे-पिणे त्यांची लाईफ स्टाईल या सर्वानाच विचार केला जातो. या पॅकेजेसमधील हॉटेल्स शहरातच असतात आणि स्पा, शॉपिंग ,फूड अशा बऱ्याच सोयी असतात. स्पामध्ये एक सेशन मोफत असते. या पॅकेजेसमध्ये पब्स आणि बारचाही समावेश असतो.

गोवा
भारतात गोव्याला ट्रीपसाठी जास्त प्राधान्य दिले जाते. हे ठिकाण कोणत्याही पार्टीसाठी आणि बॅचलर पार्टीसाठी खूप परफेक्ट आहे. येथील बीच, कसिनो, नाईट क्लब, पब्ज, रेस्तराँ आणि हॉटेल सहज मिळतील. येथे वॉटर स्पोर्टचेही पर्याय उपलब्ध आहे.
पॅकेज - दोन रात्री तीन दिवस
पॅकेजची किंमत - 15000 ते 20000 रुपये
पॅकेज मधील सुविधा - येण्या जाण्याचे विमानाचा खर्च, हॉटेल आणि ब्रेकफास्ट

आणखी पॅकेजेससाठी पहा पुढील स्लाईड



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जगातल्या दुसऱ्या सर्वात श्रीमंत व्यक्ती बिल गेट्सने दिल्या नवीन व्यावसायिकांना पैसे कमावण्याच्या काही युक्त्या, सांगितले येथे उपलब्ध आहेत अनेक संधी


नवी दिल्ली : जगातल्या दुसऱ्या सर्वात श्रीमंत व्यक्ती बिल गेट्सने नवीन व्यावसायिकांना पैसे कमावण्याच्या काही युक्त्या सांगितल्या आहेत. मिळालेल्या माहितीनुसार बिल गेट्स यांनी नवीन व्यावसायिकांना अशा काही महत्वाच्या सेक्टर्सविषयी सांगितले आहे ज्यांमध्ये भविष्यात त्यांना आर्थिक फायदा होऊ शकतो. आम्ही तुम्हाला बिल गेट्सच्या अशाच काही कल्पनांविषयी सांगणार आहोत ज्यामुळे तुम्हाला आयुष्यात पुढे जाण्यासाठी, नोकरीमध्ये यश मिळण्यासाठी आणि व्यवसायात चांगला नफा होण्यासाठी मदत होईल.

सायन्स मध्ये करावे इन्व्हेस्ट..
बिल गेट्स यांनी नवीन व्यावसायिकांना सायन्स मध्ये इन्व्हेस्ट करण्याचा सल्ला दिला आहे. त्यांचे असे म्हणणे आहे की, ग्लोबल बिमाऱ्यांपासून सुटका मिळवून देणाऱ्या आणि एनर्जी सिस्टमला वाढवण्यासाठी काम करणाऱ्या व्यवसायांमध्ये इन्व्हेस्ट करावे. सायन्समध्ये जितके जास्त तुम्ही शिकाल तितक्या संधी तुम्हाला दिसतील. सायन्स आणि प्रोग्रामिंग, बायोलॉजि आणि एनर्जी सिस्टम यामध्ये इन्व्हेस्ट केल्यास जास्त फायदा होईल.

पुढे वाचा बिल गेट्सने दिलेले आणखी काही सल्ले



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bill gates gives tips for being successful parson.
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शेयर बाजार पर लिखी गई 330 साल पुरानी पहली किताब की नीलामी होगी, 2 करोड़ रु. में बिकने की उम्मीद


न्यूयॉर्क. अगर शेयर बाजार आपको कन्फ्यूज करता है तो आप ऐसे अकेले शख्स नहीं हैं। सच तो यह है कि ऐसा सदियों से होता आ रहा है। शायद इसीलिए शेयर बाजार पर लिखी पहली किताब का नाम 'कन्फ्यूजन ऑफ कन्फ्यूजंस' था। जोसेफ पेंसो डि ला वेगा ने 1688 में यह किताब लिखी थी।

यहकिताब 1602 में स्थापित दुनिया के पहले एम्सटर्डम एक्सचेंज पर आधारित है। सोदबी ऑक्शन हाउस इस किताब की नीलामी कर रही है। इसके डेढ़ से दो करोड़ में बिकने उम्मीद है। जीविश (यहूदी) थियोलॉजिकल सेमिनरी इस किताब को बेच रही है।

स्पेन के रहने वाले थे वेगा:वेगा मूलतः स्पेन के रहने वाले थे। 17वीं सदी की शुरुआत में ही वह एमस्टर्डम आ गए थे। उन्होंने यह किताब स्पेनिश भाषा में लिखी थी। इसमें स्टॉक मार्केट में इस्तेमाल होने वाले पुट और कॉल जैसे शब्दों की व्याख्या करने के साथ निवेश के सुझाव भी दिए गए हैं। किताब एक फिलॉस्फर, कारोबारी और शेयरहोल्डर के बीच बातचीत के रूप में लिखी गई है।

वेगा ट्रेडर नहीं थे:सोदबी में बुक्स और मैन्युस्क्रिप्ट डिपार्टमेंट के विशेषज्ञ सेल्बी किफर ने बताया कि वेगा ट्रेडर नहीं थे, लेकिन उनका ज्यादा समय शेयर मार्केट में ही बीतता था। सोदबी इसके पहले संस्करण की नीलामी कर रही है। इस किताब की 10 से भी कम प्रतियां दुनिया में उपलब्ध हैं। पहले संस्करण की पिछली नीलामी 30 साल पहले सोदबी ने ही की थी। तब यह 16,500 पाउंड (अब 20 लाख) में बिकी थी।



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The first book written about a stock market is selling

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सरकारी बैंक शेयर बाजार के अगले स्टार परफॉर्मर हो सकते हैं: जिमित मोदी


नई दिल्ली. सरकारी बैंकों के शेयर करीब 3 साल से सुस्त पड़े हैं। इस साल निफ्टी का पीएसयू बैंक इंडेक्स 20% गिरा है। एनपीए इसका सबसे बड़ा कारण है। सरकार और रिजर्व बैंक ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे इन बैंकों की सेहत आने वाले दिनों में सुधरेगी। 5 साल की अवधि में ये बैंक स्टार परफॉर्मर बन सकते हैं। यहां इसके कुछ प्रमुख कारण दिए जा रहे हैं।

दिवालिया कानून: पहले कर्ज लेने वाले बैंकों पर हावी रहते थे। इस कानून के बाद बैंकों का नियंत्रण रहता है। एनपीए के समाधान के लिए पहले भी कई उपाय किए गए। लेकिन लंबा समय लगने के बावजूद बैंकों को कुछ खास मिलता नहीं था।

सरकारी बैंक इसके शिकार हुए। आईबीसी जैसे कानून से प्रमोटर कंपनी पर अपना नियंत्रण खोने के डर से कर्ज लौटाने में गंभीर हुए हैं।

एंप्लॉयी स्टॉक ऑप्शन (इसोप): बैंक कर्मचारियों को इसोप देने की योजना अच्छी है। इससे कर्मचारियों में जिम्मेदारी और जवाबदेही बढ़ेगी। वे बेहतर सर्विस देने के लिए प्रेरित होंगे। इलाहाबाद, सिंडिकेट बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक इसोप जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।

कॉरपोरेट गवर्नेंस में सुधार: एनपीए बढ़ने की एक बड़ी वजह थी खराब कॉरपोरेट गवर्नेंस। बैंकों ने बिना पूरी जांच-पड़ताल किए कर्ज दिया। बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस के कारण ही निजी क्षेत्र के बैंकों में एनपीए कम है। फैसले लेने की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने और बाहरी सीईओ नियुक्त करने से बैंकों के कामकाज में सुधार होगा।

सरकार का समर्थन: सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह बैंकिंग सिस्टम में नकदी बनाए रखेगी। इसके लिए वह 4 महीने में बैंकों में 42,000 करोड रुपए की पूंजी डालेगी। हाल के दिनों में बैंकों में नकदी की जो समस्या आई है, इससे वह काफी हद तक कम हो जाएगी।

रिजर्व बैंक द्वारा नरमी: सरकार और रिजर्व बैंक के बीच हाल की बातचीत से लगता है कि कमजोर बैंकों के लिए तत्काल सुधार (पीसीए) के नियम आसान होंगे। अभी 11 सरकारी बैंक पीसीए श्रेणी में हैं। नियम आसान होने पर ये नया कर्ज दे सकेंगे।

आईएलएंडएफएस का डिफॉल्ट: इस संकट से पहले एनबीएफसी काफी तेजी से आगे बढ़ रहे थे। उन्हें कॉमर्शियल पेपर के जरिए बहुत कम ब्याज पर कर्ज मिल रहा था। लेकिन डिफॉल्ट के बाद नकदी संकट उभरने से कॉमर्शियल पेपर काम हो गए हैं। इसका फायदा सरकारी बैंकों को मिलेगा, क्योंकि उनके लिए फंड की लागत एनबीएफसी से कम होती है। इससे भी उन्हें अपना मार्केट दोबारा हासिल करने में मदद मिलेगी।

इकोनॉमी में बेहतरी: कई ऐसे संकेत हैं जिनसे इकोनॉमी में रिकवरी के संकेत मिलते हैं। बैंक कर्ज की ग्रोथ 6% से बढ़कर 15% हो गई है। मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई नवंबर में 54 दर्ज हुआ है जो एक साल में सबसे ज्यादा है। रिकवरी को देखते हुए कंपनियां नया निवेश कर रही हैं। इसी वजह से बैंकों के कर्ज की ग्रोथ ढाई गुना हो गई है।

औपचारिक क्षेत्र के हिस्सेदारी बढ़ना: जन-धन जैसी स्कीमों के जरिए सरकार की कोशिश है कि लोग बचत का पैसा बैंकों में रखें। यह बैंकों के लिए अच्छा है। इससे ग्रामीण इलाकों में बचत बढ़ेगी और वहां सरकारी बैंक ही ज्यादा हैं। जीएसटी से भी इकोनॉमी में औपचारिक क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ी है।

इन उपायों से सरकारी बैंकों की स्थिति सुधरेगी। हालांकि कई विशेषज्ञों को लगता है कि इसका प्रदर्शन नहीं सुधरेगा। इसलिए इनमें निवेश में जोखिम है। मेरे विचार से ऐसे वक्त में आंत्रप्रेन्योर-निवेशक रॉबर्ट एर्नोट की बात ध्यान में रखनी चाहिए। उन्होंने कहा था- निवेश में जो आसान होता है, उसमें मुनाफा नहीं होता। सरकारी बैंकों के शेयर बहुत कम कीमत पर उपलब्ध हैं। इनका औसत पीबी (प्राइस-बुक वैल्यू रेशियो) 0.67 है, जबकि निजी बैंकों का 2.39 है। यह डिस्काउंट 5 साल में निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे सकता है।

जिमित मोदी, संस्थापक एवं सीईओ, सैमको सिक्युरिटीज एंड स्टॉकनोट

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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PSU banks may be the next star performers of the stock market says Jimit Mo

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कोरा के 10 करोड़ यूजर्स का डेटा लीक; इनमें नाम, ईमेल एड्रेस और पासवर्ड शामिल


गैजेट डेस्क. सवाल-जवाब के लिए बना प्लेटफॉर्म कोरा (Quora) में भी अब डेटा लीक का मामला सामने आया है। कोरा के सीईओ एडम डी-एंजेलो ने एक ब्लॉग पोस्ट कर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हैकर्स ने उनके सिस्टम को ब्रेक किया और 10 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का डेटा चुराया। उनके मुताबिक, इनमें यूजर्स का नाम, ईमेल एड्रेस और उनके पासवर्ड शामिल हैं।

डी-एंजेलो ने बताया, ‘‘हैकर को थर्ड पार्टी की मदद से हमारे सिस्टम का अनअॉथराइज्ड एक्सेस मिला और इसकी मदद से हैकर ने यूजर्स के डेटा में सेंध लगाई।’’ उन्होंने यह भी बताया कि जिन यूजर्स का डेटा लीक हुआ है, उन्हें ईमेल कर इस बात की जानकारी दी गई है। जांच के लिए डिजिटल फॉरेंसिक फर्म की सेवाएं ली जा रही हैं। इसकी जानकारी सरकार के अफसरों को भी दे दी गई है।

हैकर्स ने किन जानकारियों को चुराया?

  • अकाउंट इन्फोर्मेशन : नाम, ईमेल एड्रेस, इन्क्रिप्टेड पासवर्ड।
  • पब्लिक कंटेंट एंड एक्शन : सवाल, जवाब, कमेंट्स और अपवोट्स।
  • नॉन-पब्लिक कंटेंट एंड एक्शन : आंसर रिक्वेस्ट, डाउनवोट्स और डायरेक्ट मैसेजेस।

यूजर्स को लॉग-आउट कर रही कंपनी : कोरा के सीईओ ने ब्लॉग पोस्ट में बताया कि डेटा लीक का मामला सामने आने के बाद यूजर्स के अकाउंट को लॉग-आउट किया जा रहा है। वहीं अगर कोई यूजर अपने पुराने पासवर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसे अमान्य किया जा रहा है। इसलिए कंपनी ने सभी यूजर्स को अपना पासवर्ड बदलने की सलाह दी है।



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quora says hackers stole up to 10 crore users data

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दिसंबर टैक्स डिक्लेरेशन देने का माह, टैक्स बचाने के लिए ये हैं विकल्प


नई दिल्ली. टैक्स की जब भी चर्चा होती है, लोग उससे बचना चाहते हैं। वजह है टैक्स को लेकर उनके भीतर डर। उन्हें नहीं मालूम होता कि टैक्स से जुड़े प्रावधानों का उन्हें क्या फायदा मिल सकता है। यह अनिश्चितता दिसंबर में तब और बढ़ जाती है जब लोग अपने नियोक्ता को टैक्स डिक्लेरेशन देने के लिए निवेश के तमाम विकल्पों तलाशते हैं। इस टैक्स सीजन में आपको परेशानी ना हो, इसके लिए यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं।

कमाई का ब्रेकअप समझें: अगर परिवार में कई लोग काम करते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि सब अलग-अलग टैक्सपेयर हों। अगर पूरे परिवार की कमाई किसी एक व्यक्ति की कमाई के रूप में दिखाएंगे तो टैक्स का बोझ काफी ज्यादा होगा। उतनी ही कमाई अगर कई लोगों को मिलाकर होती है तो परिवार पर टैक्स का बोझ कम हो जाएगा।

सैलरी स्ट्रक्चर की प्लानिंग: सैलरी का स्ट्रक्चर हमेशा ऐसा रखना चाहिए जिससे ग्रॉस कम हो और टैक्स में छूट का फायदा उठा सकें। टैक्स प्लानिंग के लिए इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं :-

  • जिनके पास अपना घर नहीं है उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा किराए में जाता है। सरकार किराए की पूरी रकम या उसके एक हिस्से पर टैक्स में छूट देती है।
  • अगर लीव ट्रैवल एलाउंस (एलटीए) सैलरी स्ट्रक्चर में है तो इस अलाउंस का टैक्स छूट में इस्तेमाल कर सकते हैं। देश के भीतर आप कहीं भी घूमने जाते हैं तो यात्रा खर्च पर आपको टैक्स में छूट मिलेगी।
  • ऑफिस आने-जाने का साल का 19,200 रुपए का खर्च टैक्स के दायरे से बाहर होता है। बिना कोई प्रूफ या रसीद दिए आप इसे क्लेम कर सकते हैं।

रिटायरमेंट सुरक्षित कीजिए: हम जो कमाते हैं वह सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के लिए भी होता है। इनकम टैक्स कानून की धारा 80सी के तहत हर साल 1.5 लाख रु. तक के निवेश पर छूट ले सकते हैं। इसमें पेंशन फंड, प्रोविडेंट फंड, लॉन्ग टर्म लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, रिटायरमेंट फंड आदि शामिल हैं। 1.5 लाख रुपए से ऊपर धारा 80सीसीडी के तहत एनपीएस में 50,000 रुपए निवेश कर सकते हैं।

धारा 80सी के अलावा और विकल्प:आमतौर पर लोग 80सी को डिडक्शन के एकमात्र विकल्प के रूप में देखते हैं। इसके अलावा भी कई विकल्प मौजूद हैं।

  • 80डी के तहत आप अपने परिवार के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 25,000 रुपए तक की छूट ले सकते हैं। और 25,000 रुपए की छूट माता-पिता के इंश्योरेंस पर मिलेगी। वे सीनियर सिटीजन हैं तो छूट सीमा 30,000 रुपए होगी। इस तरह आप कुल 50-55 हजार रुपए तक की छूट ले सकते हैं।
  • 80ई के तहत एजुकेशन लोन के ब्याज पर भी छूट मिलती है। इसकी कोई ऊपरी सीमा नहीं है। इसके तहत आप अपनी, पति/पत्नी या बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज़ पर ब्याज में छूट ले सकते हैं।
  • घर खरीदना सबके जीवन का महत्वपूर्ण लक्ष्य होता है। होम लोन के ब्याज में हर साल 2 लाख रुपए तक की छूट हासिल की जा सकती है।
  • कुछ रिलीफ फंड (जैसे पीएम रिलीफ फंड) और चैरिटेबल संस्थाओं को दान पर 80जी के तहत टैक्स में छूट ले सकते हैं। बचत खाते में 10,000 रुपए तक की ब्याज भी टैक्स के दायरे से बाहर है।


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राहुल जैन, हेड, पर्सनल वेल्थ एडवाइजरी, एड्लवाइज

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सेंसेक्स में 200 अंक की बढ़त, निफ्टी 10900 के ऊपर पहुंचा


मुंबई. शेयर बाजार में सोमवार को तेजी आई। सेंसेक्स 200 अंक की बढ़त के साथ 36,394 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी में 60 अंक की तेजी दर्ज की गई। सेंसेक्स के 30 में से 22 शेयरों में उछाल आया। निफ्टी के 50 में से 31 शेयर फायदे में नजर आए।

  1. मजबूत विदेशी संकेत मिलने से भारतीय बाजार में तेजी आई। अमेरिका-चीन के बीच व्यापार विवाद सुलझने की उम्मीद से ज्यादातर एशियाई बाजारों में मजबूती आई। अमेरिका ने चाइनीज इंपोर्ट पर 1 जनवरी से प्रस्तावित शुल्क बढ़ोतरी 90 दिन के लिए टाल दी है।

  2. भारतीय बाजार में मेटल शेयरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में मेटल इंडेक्स 2.80% चढ़ गया। वेदांता, हिंडाल्को, टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील के शेयरों में एनएसई पर 2 से 4% तक तेजी दर्ज की गई।

  3. सन फार्मा के शेयर में 10.4% गिरावट दर्ज की गई। मई 2017 के बाद यह सबसे ज्यादा है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक सन फार्मा के खिलाफ इनसाइडर ट्रेडिंग का केस फिर से खुल सकता है। इस खबर से शेयर में बिकवाली बढ़ गई।



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      Sensex gain 200 points in early trade on Monday 3 December

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कृषि में सिर्फ 3.8% विकास दर बताती है कि किसान क्यों रैलियां निकाल रहे हैं: देवांग्शु दत्ता


नई दिल्ली. ग्लोबल स्थिति देखें तो अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वार के समाधान की संभावना बढ़ी है। दोनों देश 1 जनवरी से नया टैरिफ नहीं लगाने पर सहमत हैं। कच्चा तेल पिछले हफ्ते एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया भी मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 69.85 पर आ गया। हालांकि रूस द्वारा यूक्रेन के जहाज सीज करने से नया तनाव उभर रहा है। यह भी ऑयल मार्केट को प्रभावित कर सकता है। कच्चा तेल मौजूदा स्तर पर बना रहा तो रुपया आगे और मजबूत होगा।

किसान कर्ज माफी से राजकोषीय घाटा बढ़ेगा
जुलाई-सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़े ग्रोथ में सुस्ती की ओर संकेत करते हैं। पिछली तिमाही विकास दर 7.1% रही जो 3 तिमाही में सबसे कम है। पिछले साल जीएसटी के कारण इकोनॉमी में सुस्ती दिखी थी। इस बार कृषि के साथ मेटल और माइनिंग में विकास दर कम है। कृषि की विकास दर 3.8% है। यह किसानों की परेशानी को बताता है। इसी का नतीजा है कि वे कर्ज माफी की मांग को लेकर रैलियां निकाल रहे हैं। अगर सरकार कर्ज माफ करती है तो उसका राजकोषीय घाटा काफी बढ़ जाएगा। यह अक्टूबर के अंत में पहले ही पूरे साल के लक्ष्य को पार कर चुका है। ज्यादा घाटे का मतलब है कि सरकार बाजार से ज्यादा पैसे जुटाएगी। इससे बांड मार्केट में यील्ड बढ़ेगी और रुपया कमजोर होगा।

सन फार्मा के खिलाफ टैक्सेशन, कॉरपोरेट गवर्नेंस की जांच
व्हिसलब्लोअर की शिकायत पर सेबी ने सन फार्मा की जांच शुरू की है। 150 पेज की शिकायत में व्हिसलब्लोअर ने कॉरपोरेट गवर्नेंस, टैक्सेशन और सिक्योरिटीज मार्केट के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। रेगुलेटर कंपनी और इसके प्रमोटरों के खिलाफ इनसाइडर ट्रेडिंग का केस दोबारा खोलने पर विचार कर रहा है। 2017 में सन फार्मा, इसके एमडी दिलीप सांघवी और 9 अन्य लोगों ने 18 लाख देकर सेटलमेंट किया था।

जेट में बहुमत हिस्सेदारी ले सकती है एतिहाद
जेट एयरवेज में हिस्सेदारी के लिए इसके प्रमोटरों के साथ अबूधाबी की एतिहाद एयरवेज की बात चल रही है। चर्चा है कि एतिहाद किसी और भारतीय पार्टनर के साथ मिलकर निवेश बढ़ाएगी। उसके पास पहले ही 24% हिस्सेदारी है जिसे वह 49 फ़ीसदी तक बढ़ा सकती है। विदेशी एयरलाइंस को किसी भारतीय एयरलाइन में बहुमत हिस्सेदारी लेने की इजाजत नहीं है। इसलिए एतिहाद किसी भारतीय पार्टनर के साथ मिलकर मैनेजमेंट कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगी। इस घाटे वाली एयरलाइन में अभी नरेश गोयल और उनके परिवार की 51% हिस्सेदारी है। डील की खबरों के कारण पिछले हफ्ते जेट के शेयरों में तेजी रही।

यस बैंक के बॉन्ड के दाम घटने से फंडों को नुकसान
रेटिंग एजेंसी मूडीज और इसकी सब्सिडियरी इक्रा ने यस बैंक की रेटिंग घटा दी है। इक्रा ने कई बोर्ड मेंबरों के इस्तीफे और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंता जताई है। बैंक के जिन बॉन्ड्स की रेटिंग घटाई गई है उनमें 60 करोड़ डॉलर के विदेशी बॉन्ड भी शामिल हैं। विदेशी और घरेलू मिलाकर कुल करीब 33,000 करोड़ के बॉन्ड हैं। रिजर्व बैंक ने इसके प्रमोटर और सीईओ राणा कपूर का कार्यकाल 1 फरवरी 2019 से आगे बढ़ाने की मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद 3 बोर्ड मेंबरों ने इस्तीफा दे दिया है। बहुत से म्यूचुअल फंडों के पास यस बैंक के बॉन्ड हैं। इनकी कीमत घटने से फंडों को नुकसान होगा। बैंक के शेयरों में भी गिरावट आई है।

जीएसके का भारतीय बिजनेस खरीद सकती है यूनिलीवर
भारत की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर की प्रमोटर यूनिलीवर ग्लैक्सो स्मिथकलाइन (जीएसके) का भारत में कंज्यूमर हेल्थ केयर बिजनेस खरीद सकती है। यह तीन अरब डॉलर में 70% हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रही है। जीएसके की भारतीय इकाई में नेस्ले की भी रुचि है। जीएसके के भारतीय ब्रांड में बूस्ट, वीवा और चॉकलेट ड्रिंक माल्टोवा भी शामिल हैं।



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देवांग्शु दत्ता, कंट्रीब्यूटिंग एडिटर, बिजनेस स्टैंडर्ड।

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नवंबर में विदेशी निवेशकों ने पूंजी बाजार में 12,260 करोड़ रु लगाए, बीते 10 महीने में सबसे ज्यादा


मुंबई. विदेशी निवेशकों (एफपीआई) ने नवंबर में भारतीय पूंजी बाजार में 12,260 करोड़ रुपए लगाए। डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में एफपीआई ने शेयर बाजार में 6,913 करोड़ रुपए और डेट मार्केट में 5,347 करोड़ रुपए लगाए हैं। यह बीते 10 महीने में सबसे ज्यादा है।

सितंबर-अक्टूबर में एफपीआई ने 60,000 करोड़ रुनिकाले थे

जनवरी में विदेशी निवेशकों ने 22,240 करोड़ रुपए लगाए थे। क्रूड की कीमतों में नरमी और रुपए के मजबूत होने से एफपीआई के निवेश में तेजी आई है। सितंबर-अक्टूबर में इन्होंने पूंजी बाजार (शेयर और डेट) से 60,000 करोड़ रुपए निकाले थे। जुलाई-अगस्त में एफपीआई ने 7,300 करोड़ रुपए लगाए थे।

टॉप-10 कंपनियों का मार्केट कैप 2.14 लाख करोड़ रुपए बढ़ा
बीते हफ्ते (सोमवार से शुक्रवार) सेंसेक्स 1,213.28 अंक (2.34%) की बढ़त में रहा। बाजार में तेजी का सबसे ज्यादा फायदा टीसीएस को हुआ। इसका मार्केट कैप 58,293 करोड़ रुपए बढ़कर 7.39 लाख करोड़ रुपए हो गया। सेंसेक्स की टॉप-10 कंपनियां के कुल मार्केट कैप में बीते हफ्ते 2.14 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ।



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FPI invest Rs 12260 crore in capital market in November

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पेट्रोल, डीजल की कीमतों में गिरावट, दिल्ली-कोलकाता में 30 पैसे की कमी


नई दिल्ली. पेट्रोल और डीजल के दाम में रविवार को लगातार 11वें दिन गिरावट का सिलसिला जारी रहा। पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आई गिरावट के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में उपभोक्ता को राहत मिल सकती है। तेल विपणन कंपनियों ने दिल्ली और कोलकाता में पेट्रोल के भाव में 30 पैसे प्रति लीटर की कटौती की। वहीं, मुंबई में पेट्रोल के दाम 29 पैसे और चेन्नई में 32 पैसे प्रति लीटर कम हुए।

दिल्ली और कोलकाता में डीजल के दाम में 33 पैसे, जबकि मुंबई और चेन्नई में 35 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के भाव क्रमश: 72.23 रुपए, 74.25 रुपए, 77.80 रुपए और 74.94 रुपये प्रति लीटर दर्ज किए गए। चारों महानगरों में डीजल की कीमतें क्रमश: 67.02 रुपए, 68.75 रुपए, 70.15 रुपए और 70.77 रुपए प्रति लीटर दर्ज की गई।

पेट्रोल-डीजल के दाम दो से तीन रुपए तक हो सकते हैं कम
एंजेल ब्रोकिंग हाउस के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता (रिसर्च कमोडिटी व करेंसी) के अनुसार, "पेट्रोल और डीजल के दाम में दो से तीन रुपए की कमी हो सकती है। ऐसा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में तीन अक्टूबर के बाद करीब 27 डॉलर प्रति बैरल की कमी से हो सकता है।



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Petrol cheaper by 30 paise in Delhi Kolkata on sunday 1 December

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आम लोगों पर असर डालने वाले 8 बदलाव 1 दिसंबर से लागू, पैन के आवेदन में मां का नाम भी मान्य


नई दिल्ली. बैंकिंग सेवाओं समेत 8 बदलाव शनिवार से लागू हो गए हैं। ये सभी आम लोगों से जुड़े हुए हैं। मोबाइल नंबर रजिस्टर नहीं करवाने वाले एसबीआई के खाताधारकों की इंटरनेट बैंकिंग सुविधा रोकी जा सकती है। दिल्ली एयरपोर्ट से उड़ान भरने के लिए अब घरेलू यात्रियों को 10 की बजाय 77 रुपए देने होंगे। कुछ सुविधाजनक बदलाव भी लागू हुए हैं।

  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के जिन ग्राहकों ने अभी तक अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर नहीं करवाया है। उनकी इंटरनेट बैंकिंग सेवा शनिवार से बंद हो सकती है। इस बारे में बैंक पहले ही ग्राहकों मैसेज दे चुका था। वो ऑनलाइन एसबीआई डॉट कॉम पर लॉगिन कर प्रोफाइल सेक्शन में यह पता कर सकते हैं कि उनका मोबाइल नंबर बैंक में रजिस्टर है या नहीं।
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का मोबाइल वॉलेट एसबीआई बडी भी शनिवार से बंद हो गया है। इसकी जगह अब योनो ऐप काम करेगा। जिन ग्राहकों ने शुक्रवार तक एसबीआई बडी से पैसे नहीं निकाले उन्हें अब दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
  • एसबीआई की शाखाओं से पेंशन की रकम निकालने वाले 76 साल तक की उम्र के पेंशनर्स को लोन के लिए प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। यह केंद्र सरकार और राज्य सरकार के पेंशनधारकों पर लागू होगी। फेस्टिव ऑफर के तहत 30 नवंबर तक प्रोसेसिंग फीस में छूट दी गई थी।
  • जिन पेंशनर्स ने शुक्रवार तक जीवित होने का प्रमाण पत्र (लाइफ सर्टिफिकेट) बैंक में जमा नहीं किया, उनकी पेंशन बंद हो जाएगी। हर साल नवंबर के आखिर तक पेंशनर्स को ऐसा करना होता है। इस बार भी 30 नवंबर आखिरी तारीख थी।
  • दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों को अब 77 रुपए सर्विस चार्ज देना पड़ेगा। शुक्रवार तक यह घरेलू टिकट पर 10 रुपए और इंटरनेशनल पर 45 रुपए था। यह फीस दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड द्वारा ली जाती है। एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (एआईआरए) ने सर्विस चार्ज रिवाइज करने की मंजूरी दी थी।
  • जेट एयरवेज की पुणे-सिंगापुर फ्लाइट शनिवार से शुरू हो गई है। पुणे से यह सुबह 5.15 बजे उड़ान भरकर दोपहर 1.15 बजे सिंगापुर पहुंचेगी। वापसी में सिंगापुर में रात 9 बजे उड़ान भरकर अगले दिन सुबह 5 बजे पुणे पहुंचेगी। अभी तक यात्रियों को सिंगापुर जाने के लिए मुंबई से फ्लाइट लेनी पड़ती थी।
  • शनिवार से ड्रोन उड़ाने की मंजूरी मिल जाएगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इससे जुड़ी राष्ट्रीय नीति तैयार की है। इसके तहत ड्रोन के मालिकों और पायलटों को रजिस्ट्रेशन करवाना होगा और उड़ान की अनुमति लेनी होगी। इसके लिए ऐप पर आवेदन कर तुरंत डिजिटल परमिट लिए जा सकते हैं।
  • पैन के लिए आवेदन में पिता की जगह अब मां का नाम भी दिया जा सकेगा। यह व्यवस्था उन आवेदकों के लिए की गई है, जिनके माता-पिता किसी वजह से अलग हो गए हैं।


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Eight changes affecting common people apply Delhi airport will charge Rs 77

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पेण अर्बन सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन और डायरेक्टर गिरफ्तार, 774 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप


रायगढ़. महाराष्ट्र के रायगढ़ में जनता के 774 करोड़ रुपए का निजी इस्तेमाल करने के आरोप मेंपेण अर्बन सहकारी बैंक लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन और डायरेक्टर गिरफ्तार किए गए हैं। इन दोनों को पीएमएलए कानून के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया है। पेण अर्बन सहकारी बैंक के घोटाला के चलते बैंक के करीब ढ़ाई लाख डिपॉजिटर को नुकसान हुआ था।


बैंक के पूर्व चेयरमैन शिशिर धारकर (57) और डायरेक्टरप्रेम कुमारशर्मा (67) को शुक्रवार की रात गिरफ्तार कर लियागय। अब तक की जांच में यह सामने आयाहै कि इन दोनों ने साल 2001 से 2010 के बीच 685 फर्जी लोन अकाउंटखोलकर करीब774 करोड़ रुपए का घोटाला किया था।

फ्रॉड के पैसे से खरीदी प्रॉपर्टी:पेण अर्बन सहकारी बैंक में आठ साल पहले इस घोटाले का खुलासा हुआ था। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपियों ने बैंक से पैसे चेक और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए निकाले। दोनों ने फ्रॉड की रकम से कई जगह प्रॉपर्टीखरीदी। 22 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी किसी और के नाम पर खरीदने का भी पता चला है।



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Two top officials of ped co-op bank in Maha held for embezzlement

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जुलाई-सितंबर में भारत की ग्रोथ रेट घटकर 7.1% हुई, फिर भी दुनिया में सबसे ज्यादा


नई दिल्ली. जुलाई-सितंबर की तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.1% रही। यह पिछली तिमाही से कम है, लेकिन दुनिया में अब भी सबसे ज्यादा है। अप्रैल-जून में जीडीपी ग्रोथ 8.2% थी। यह 9 तिमाही यानी 27 महीने में सबसे ज्यादा थी। इससे पहले जनवरी-मार्च 2016 में ग्रोथ रेट 9.2% थी। दूसरी तिमाही के दौरान एग्रीकल्चर सेक्टर की ग्रोथ रेट 3.8% रही। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की विकास दर 7.4% रही। जीडीपी ग्रोथ रेट के मामले में चीन दुनिया में दूसरे नंबर पर है। जुलाई-सितंबर तिमाही में चीन की जीडीपी ग्रोथ 6.5% रही।

लगातार बढ़ रही थी जीडीपी ग्रोथ

तिमाही जीडीपी ग्रोथ
जुलाई-सितंबर 2018 7.1%
अप्रैल-जून 2018 8.2%
जनवरी-मार्च 2018 7.7%
अक्टूबर-दिसंबर 2017 7%
जुलाई-सितंबर 2017 6.3%
अप्रैल-जून 2017 5.6%

जीडीपी के आंकड़े बदलने पर देश में विवाद

सरकार ने पिछले दिनों 2005-06 से लेकर 2011-12 की ग्रोथ रेट के नए आंकड़े जारी किए थे। ऐसा पहली बार हुआ था, जब पिछली सरकार के कार्यकाल की ग्रोथ रेट के आंकड़े संशोधित किए गए थे। 2010-11 में 10.3% की ग्रोथ रेट को घटाकर 8.5% किया गयाथा। इस पर पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा था कि सरकार ने यह भद्दा मजाक किया है। वहीं, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जीडीपी के संशोधित आंकड़े भरोसेमंद और अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर पेश करने वाले हैं। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक हैं।



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GDP Growth Rate 7.1% in July-September Month, Slow than Last Three Months
GDP Growth Rate 7.1% in July-September Month, Slow than Last Three Months

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2 महीने में चुनावों से जुड़े 48 लाख ट्वीट हुए, 27 से 29 नवंबर के बीच 36 घंटे में 2.5 लाख पोस्ट


नई दिल्ली. दो महीने में मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना के विधानसभा चुनावों से जुड़े 48 लाख ट्वीट किए गए। यहडेटा 1 अक्टूबर से 28 नवंबर का है। इस दौरान27 से 29 नवंबर के बीच 36 घंटे में सबसे ज्यादा 2.5 लाख ट्वीट पोस्ट हुए।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 26 नवंबर का ट्वीट 3,266 बार रीट्वीट किया गया। इसे 13,283 लोगों ने लाइक किया। मोदी ने इस ट्वीट में लोगों से मतदान करने की अपील की थी।

राहुल के ट्वीट को24 हजार लोगों ने पसंद किया:कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का 18 नवंबर का ट्वीट 7,098 बार रीट्वीट किया गया। इसे 24,018 लोगों ने पसंद किया। इस ट्वीट में राहुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो था।

दुनियाभर के लोग ट्विटर से नजर रख रहे : ट्विटर के मुताबिक बीजेपी, कांग्रेस, राजस्थान, मध्यप्रदेश और तेलंगाना हैशटैग सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहे हैं। चुनावों को लेकर भारत में ट्विटर पर वार्तालाप बढ़ा है। लोगों ने अपनी राय, सुझाव और चुनाव से जुड़ी जानकारी शेयर कीं।दुनियाभर के लोग भी ट्विटर के जरिए भारत की घटनाओं पर नजर रख रहे हैं।चुनावों से जुड़े ट्वीट के आंकड़ों पर ट्विटर इंडिया की पब्लिक पॉलिसी और गवर्मेंट हेड, महिमा कौल ने कहा कि क्षेत्रीय नेता और दल मतदाताओं से जुड़ने के लिए ट्विवर का इस्तेमाल कर रहे हैं।ट्विटर ने चुनावों को देखते हुए बहुत से नए फीचर शुरू किए थे। इनमें रियल टाइम अपडेट्स ऑन कैंपेन ट्रेल्स और कनेक्टिंग वोटर्स टू पॉलिटिशियन शामिल हैं।

सबसे ज्यादा ट्रेंड में रहे ये हैशटेग
सबसे ज्यादा #bjp, #congress, #rajasthan, #madhyapradesh और #telangana हैशटेग ट्रेंड में रहे। इसके अलावा, # telanganaelections2018, # madhyapradeshelections, # rajasthanelections2018, # mizoram, # bjp4mp,# bjp4telangana, # assemblyelections2018, # votebjpsecuremp पर भी लोगों ने ट्वीट और रिट्वीट किया।



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Over 48 lakh tweets on assembly polls recorded in Oct-Nov

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म्यूचुअल फंड यूनिट बेचने का समय पहचानना भी जरूरी: भूषण केदार


मुंबई. म्यूचुअल फंड स्कीम खरीदते समय लोग इसके तमाम पहलुओं पर ध्यान देते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह देखते हैं कि इससे कब बाहर निकला जाए। यह सच है कि इक्विटी फंड में निवेश का फायदा लंबे समय में मिलता है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं कि आप पैसे लगाने के बाद भूल जाएं और जब निवेश की अवधि खत्म होने को आए तब उस पर ध्यान दें। एक और बात। लोग इक्विटी मार्केट में थोड़े समय के लिए आई गिरावट या बढ़त के समय निवेश करने या पैसे निकालने का फैसला करते हैं। इससे उन्हें लांग टर्म का फायदा नहीं मिल पाता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि फंड से निकलने का सही समय कौन सा होता है।

फंड लगातार अंडरपरफॉर्म कर रहा हो: होल्डिंग पर हमेशा नजर रखनी चाहिए ताकि अंडरपरफॉर्मर को पहचाना जा सके। अगर बेंचमार्क रिटर्न की तुलना में कोई स्कीम लगातार अंडरपरफॉर्म कर रही है तो उसकी वजह देखनी चाहिए। अगर स्कीम कमजोर लगती है तो उससे तत्काल निकल कर बेहतर परफॉर्मेंस वाली स्कीम में पैसे लगाएं। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक या दो तिमाही तक स्कीम की अंडरपरफार्मेंस के आधार पर फैसला ना करें। लांग टर्म के आधार पर निर्णय लें।

स्कीम में बदलाव: सेबी ने हाल ही म्यूचुअल फंड कैटेगरी का रिक्लासिफिकेशन किया है। इसके बाद म्यूचुअल फंडों ने भी स्कीमों में बदलाव किए हैं। उदाहरण के लिए जो डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड था वह पूरी तरह लार्ज कैप इक्विटी फंड हो चुका है। संभव है कि इसमें रिटर्न भी पहले की तुलना में कम मिले। कुछ स्मॉल और मिड कैप फंड पूरी तरह स्मॉल कैप फंड बन गए हैं। इनमें जोखिम पहले की तुलना में अधिक होगा। अगर यह आपकी जोखिम लेने की क्षमता से मेल नहीं खाता तो उसे स्कीम से निकल जाना चाहिए।

निवेशक के रिस्क प्रोफाइल में बदलाव: कई बार परिस्थितियां बदलने से आपकी जोखिम लेने की क्षमता कम हो जाती है। तब आपको निवेश की योजना में भी बदलाव करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए जब आप ज्यादा जोखिम ले सकते हैं तो आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा अधिक होगा। लेकिन अगर आप ज्यादा जोखिम नहीं ले सकते तो इक्विटी फंड का कुछ निवेश निकालकर डेट फंड में लगाना पड़ेगा।

पोर्टफोलियो की रिबैलेंसिंग: मान लीजिए आपके पोर्टफोलियो में डेट और इक्विटी 40:60 के अनुपात में था। 2017 में बाजार में तेजी की वजह से पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा बढ़कर 80% हो गया। ऐसे में आपको पोर्टफोलियो का मूल्यांकन करना चाहिए और इक्विटी फंड से कुछ होल्डिंग कम करके डेट फंड में लगाना चाहिए। इससे आप का जोखिम कम रहेगा।

लक्ष्य हासिल करने के बाद: फाइनेंशियल प्लानिंग का मकसद तय समय में आर्थिक लक्ष्य को हासिल करना होता है। आपने समय से पहले लक्ष्य हासिल कर लिया तो निवेश को सुरक्षित करना बेहतर होगा। जैसे, आपने कार खरीदने के मकसद से 3 साल के लिए हाइब्रिड फंड में एसआईपी शुरू किया। लेकिन बेहतर रिटर्न की वजह से आपको 2 साल में ही कार खरीदने लायक पैसे मिल गए। आपको तत्काल उस फंड से निकल कर कम जोखिम वाले प्रोडक्ट में पैसा लगाना चाहिए।

भूषण केदार, डायरेक्टर, कैपिटल मार्केट्स फंड रिसर्च, क्रिसिल

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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Identify the timing of selling mutual fund unit is also important says Bhus

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एसबीआई ने एफडी पर ब्याज दरें 0.05 से 0.10% तक बढ़ाईं, एक करोड़ रु से कम के जमा पर लागू


नई दिल्ली. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने एफडी पर ब्याज दरों में 0.05 से 0.10% तक इजाफा किया है। एक करोड़ रुपए से कम के फिक्स्ड डिपॉजिट पर नई दरें बुधवार से लागू हो गईं। एक से दो साल की एफडी पर 6.7% की बजाय 6.8% ब्याज मिलेगा। दो से तीन साल के जमा पर 6.75% की बजाय 6.8% इंटरेस्ट मिलेगा।

सामान्य लोगों के लिए ब्याज दरें

जमा की अवधि पुरानी ब्याज दर नई ब्याज दर
7 से 45 दिन 5.75% 5.75%
46 से 179 दिन 6.25% 6.25%
180 से 210 दिन 6.35% 6.35%
211 दिन से 1 साल 6.4% 6.4%
1 साल से 2 साल 6.7% 6.8%
2 से 3 साल 6.75% 6.80%
3 से 5 साल 6.8% 6.8%
5 से 10 साल 6.85% 6.85%

एसबीआई के स्टाफ को सामान्य के मुकाबले 1% ज्यादा ब्याज मिलेगा। सीनियर सिटीजन के लिए सभी अवधि के जमा पर ब्याज दरें 0.50% ज्यादा हैं।

सीनियर सिटीजन के लिए जमा पर ब्याज दरें

जमा की अवधि पुरानी ब्याज दर नई ब्याज दर
7 से 45 दिन 6.25% 6.25%
46 से 179 दिन 6.75% 6.75%
180 से 210 दिन 6.85% 6.85%
211 दिन से 1 साल 6.9% 6.9%
1 साल से 2 साल 7.2% 7.3%
2 से 3 साल 7.25% 7.3%
3 से 5 साल 7.3% 7.3%
5 से 10 साल 7.35% 7.35%



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SBI hikes fixed deposit interest rates on select maturities

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अगले कुछ महीनों तक क्रूड और सोने के दाम स्थिर रहने के आसार: अरिंदम साहा


मुंबई. कमोडिटी में ट्रेड करने वालों के लिए सोना और कच्चा तेल हमेशा पसंदीदा प्रोडक्ट रहे हैं। अब जब 2018 खत्म होने वाला है, हम इस बात पर गौर करेंगे कि आने वाले महीनों में इनके दामों में क्या रुख रहेगा। भारत के पास विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार है। हालांकि यह 426 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से घटकर 400 अरब डॉलर रह गया है। कच्चे तेल के दाम में गिरावट और रुपए में मजबूती के चलते डॉलर की तुलना में रुपया मजबूत हो सकता है।

कच्चा तेल: 6 दिसंबर को ओपेक की बैठक से तय होगा कीमत का रुख
दो महीने पहले तक क्रूड के दाम लगातार बढ़ रहे थे। विश्लेषकों की हर बात में इसका जिक्र होता था। लेकिन उसके बाद इसमें तेज गिरावट आई है। क्रूड और पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी से महंगाई दर नीचे लाने में मदद मिलेगी। बहुत से एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल प्रोडक्ट्स के दाम भी कम हो सकते हैं। कुल मिलाकर सस्ते तेल से भारत जैसी इकोनॉमी को फायदा होगा। लेकिन 6 दिसंबर को ओपेक देशों की महत्वपूर्ण बैठक होनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें उत्पादन घटाने पर फैसला हो सकता है। इससे क्रूड के दाम में फिर बढ़ोतरी का रुख बनेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ओपेक देश दैनिक उत्पादन 10 से 14 लाख बैरल तक घटा सकते हैं। भारत ने इस साल अप्रैल से अक्टूबर तक 4.9 लाख करोड़ रुपए का 1.4 लाख टन क्रूड आयात किया है। भारत में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में क्रूड के दाम 3,600 रुपए प्रति बैरल के आसपास हैं। यह इस साल का सबसे निचला स्तर है। एक महीने पहले की तुलना में दाम 40% घटे हैं। आगे भी दाम नीचे रह सकते हैं, लेकिन 6 अक्टूबर की बैठक पर नजर रखना जरूरी होगा।

सोना: आने वाले कुछ महीनों तक दाम बढ़ने के आसार नहीं
क्रूड की तरह सोने की कीमत भी कुछ महीनों तक बढ़ने के आसार नहीं हैं। ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 1,250 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी रहेगी। आम तौर पर डॉलर की हेजिंग (एक तरह का इंश्योरेंस) के लिए सोने का इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय निवेशकों के लिए सोने की कीमत दो बातों पर निर्भर करती है- ग्लोबल मार्केट में भाव और डॉलर की तुलना में रुपए की कीमत। रुपया इस साल 15% गिरने के बाद सुधार के रास्ते पर है। सोना ग्लोबल मार्केट में 1250 डॉलर और रुपया 71 के आस पास स्थिर होता लग रहा है। इसलिए 2019 के शुरुआती महीनों में सोने के दाम में ज्यादा बदलाव के आसार नहीं हैं। भारत हर साल करीब 1,000 टन सोने का आयात करता है। घरेलू बाजार में ज्वैलरी और सिक्के आदि के रूप में सोने की फिजिकल डिमांड लगभग स्थिर बनी हुई है। लेकिन ईटीएफ में इसकी मांग पिछली तिमाही 100 टन घट गई। एमसीएक्स में भी इसकी कीमत साल के शुरू के आस पास ही है। इसलिए निवेशकों को इसमें पैसा लगाने से पहले मुद्रा विनिमय दर पर ध्यान देना चाहिए।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा)



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अरिंदम साहा, जॉइंट सीईओ, टिकरप्लांट।

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सेंसेक्स 159 अंक चढ़कर 35513 पर बंद, निफ्टी में 57 प्वाइंट की तेजी


मुंबई. शेयर बाजार मंगलवार को लगातार दूसरे दिन फायदे में रहा। सेंसेक्स 159.06 अंक की बढ़त के साथ 35,513.14 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 35,555.16 तक चढ़ा। निफ्टी की क्लोजिंग 57 प्वाइंट ऊपर 10,685.60 पर हुई। इंट्रा-डे में इसने 10,695.15 का उच्च स्तर छुआ।

  1. सेंसेक्स के 30 में से 14 और निफ्टी के 50 में से 26 शेयरों में तेजी आई। एनएसई के 11 में से 7 सेक्टर इंडेक्स फायदे में रहे। आईटी इंडेक्स 1.43% बढ़त में रहा।

  2. शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट दर्ज की गई लेकिन, मिडसेशन के बाद उछाल आया।विश्लेषकों के मुताबिक रुपए में स्थिरता और क्रूड सस्ता होने जैसी वजहों से बाजार में तेजी आई।

  3. निफ्टी के टॉप-5 गेनर

    शेयर बढ़त
    इन्फोसिस 3.15%
    बजाज फिनसर्व 3%
    गेल 2.71%
    टीसीएस 2.65%
    बीपीसीएल 2.43%
  4. निफ्टी के टॉप-5 लूजर

    शेयर गिरावट
    हीरो मोटोकॉर्प 3.84%
    सन फार्मा 3.81%
    यस बैंक 3.03%
    भारती एयरटेल 2.39%
    विप्रो 1.93%


    1. Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
      Sensex rises 159 points to close at 35513 Nifty gains 57 points to 10686 on

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शादी समारोह में नुकसान की भरपाई के लिए वेडिंग इंश्योरेंस कराना बेहतर: शशि कुमार अदिदामु


नई दिल्ली. शादी किसी के भी जीवन के सबसे बेहतरीन अवसरों में एक होता है। शादी का समारोह ना सिर्फ यादगार होता है, बल्कि यह काफी खर्चीला भी होता है। दूसरी तरफ ऐसी अनिश्चितताएं भी होती हैं जिनकी वजह से खर्च बढ़ने या नुकसान का अंदेशा रहता है। शादी समारोह का बीमा यानी वेडिंग इंश्योरेंस आपको ना सिर्फ नुकसान से, बल्कि ऐसी अप्रिय घटनाओं से भी बचाता है जिनकी वजह से इस शुभ समारोह में व्यवधान की आशंका रहती है। कुछ बीमा कंपनियां पहले से तैयार पैकेज उपलब्ध कराती हैं। आप अपनी जरूरत के हिसाब से उनमें से कोई भी पैकेज चुन सकते हैं।

समारोह शुरू होने के 24 घंटे पहले से कवरेज: कुछ बीमा कंपनियां इवेंट इंश्योरेंस पोर्टफोलियो के तहत शादी के समारोह का बीमा करती हैं, तो कुछ ने इसके लिए अलग पॉलिसी बना रखी है। इसकी कवरेज संगीत, मेहंदी जैसी रस्म शुरू होने के 24 घंटे पहले शुरू हो जाती है। इसलिए शादी से एक दिन पहले भी यह पॉलिसी खरीद सकते हैं। हालांकि हमारी राय यही होगी कि समारोह शुरू होने से 15 दिन पहले पॉलिसी लेनी चाहिए। यह पॉलिसी समारोह आयोजित करने वाले ऑर्गेनाइजर, दूल्हा, दुल्हन या उनके परिवार के सदस्य ले सकते हैं।

वेडिंग इश्योरेंस में क्या-क्या कवर होगा: आजकल डेस्टिनेशन वेडिंग का जमाना है, जो काफी खर्चीला होता है। वेडिंग इंश्योरेंस में व्यक्तिगत दुर्घटना, कार्यक्रम रद्द होना या उसमें व्यवधान आना, समारोह वाली जगह पर किसी तरह का नुकसान जैसी चीजें शामिल होती हैं। दूसरी बीमा पॉलिसी की तरह इसमें भी यह प्रावधान होता है कि अगर बीमा कराने वाले ने ऐसी परिस्थितियों को छुपाया है जिनसे नुकसान का खतरा हो सकता है, तो बीमा का लाभ नहीं मिलेगा।

कितने का बीमा कराना ठीक होगा: अन्य बीमा पॉलिसी की तरह वेडिंग इंश्योरेंस में भी सभी तथ्यों का खुलासा करना जरूरी होता है। शादी में कौन-कौन शामिल होंगे, कितने लोग आएंगे, निमंत्रण पत्र की कॉपी, शादी की जगह इनडोर है या आउटडोर, शादी का समय, यह सब बताना जरूरी होता है। अगर शादी की जगह बदलती है तो उसकी सूचना भी देनी पड़ेगी। बीमा कंपनी को यह भी बताना पड़ेगा कि शादी वाली जगह के डेकोरेशन, स्टेज, ज्वैलरी आदि पर कितना खर्च आया है। इन सबके हिसाब से ही बीमे की रकम तय होगी। बीमा कंपनी आपको कई विकल्प दे सकती है। आप अपने बजट और जरूरत के हिसाब से उन्हें में से एक चुन सकते हैं।

क्लेम लेने की प्रक्रिया क्या होगी: अगर किसी नुकसान के क्लेम लेने की नौबत आती है तो पहला काम यह करें कि बीमा कंपनी को यथाशीघ्र नुकसान की जानकारी दें। नुकसान की प्रकृति के हिसाब से आपको पुलिस में भी शिकायत करनी पड़ सकती है। तब बीमा कंपनी को एफआईआर की कॉपी देनी पड़ेगी। कंपनी को सूचना देने के अलावा आपको क्लेम फॉर्म जमा देना पड़ेगा। इसमें नुकसान का विवरण भरना पड़ेगा। कितने का नुकसान हुआ यह बताने के लिए जरूरी कागजात भी देने पड़ेंगे। उसके बाद बीमा कंपनी उसका आकलन करेगी।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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शशि कुमार अदिदामु, सीटीओ, बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस।

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मार्च तक बैंकों को सरकार से 42 हजार करोड़ रु मिलेंगे, अगली किश्त दिसंबर में जारी होगी


नई दिल्ली. सरकारी बैंकों को मार्च 2019 तक सरकार से 42,000 करोड़ रुपए की पूंजी मिलेगी। अगली किश्त दिसंबर में जारी की जाएगी। वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

  1. इस साल के शुरुआत में सरकार ने 5 बैंकों को 11,336 करोड़ रुपए की राशि दी थी। यह पूंजी पंजाब नैशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को मिली थी।

  2. वित्त मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक पीएनबी और एसबीआई जैसे बड़े सरकारी बैंकों को चालू वित्त वर्ष में ज्यादा पूंजी की जरूरत नहीं पड़ेगी। पीएनबी को अभी तक दो बार पूंजी दी जा चुकी है।

  3. आरबीआई की तरफ से बेसल-3 के नियम पूरे करने के लिए समय सीमा मार्च 2020 तक बढ़ा दी गई है। इस फैसले के बाद सरकारी बैंकों को कम पूंजी की जरूरत होगी।

  4. केंद्र सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में सरकारी बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डालने की घोषणा की थी। इस योजना के मुताबिक सरकारी बैंकों को 1.35 लाख करोड़ रुपए की रकम रिकैपिटलाइजेशन बॉन्ड के जरिए मिलनाी है जबकि बाकी 58,000 करोड़ रुपए बाजार से जुटाए जाएंगे।



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      Govt to infuse Rs 42000 cr in PSU banks by March next tranche likely in Dec

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सेंसेक्स 373 अंक की बढ़त के साथ 35354 पर बंद, क्रूड सस्ता होने से फायदा


मुंबई. शेयर बाजार में हफ्ते की शुरुआत अच्छी रही। सेंसक्स 373.06 अंक की बढ़त के साथ 35,354.08 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान 35,397.24 तक चढ़ा। निफ्टी की क्लोजिंग 101.85 प्वाइंट ऊपर 10,628.60 पर हुई। इंट्रा-डे में इसने 10,637.80 का उच्च स्तर छुआ।

  1. कच्चे तेल में गिरावट और एशियाई बाजारों से मजबूत संकेत मिलने की वजह सेभारतीय बाजार में तेजी आई।इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया।

  2. सेंसेक्स के 30 में से 21 और निफ्टी के 50 में से 34 शेयर फायदे में रहे। एनएसई के 11 में से 9 सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। एफएमसीजी इंडेक्स 2.36% चढ़ा।

  3. निफ्टी के टॉप-5 गेनर

    शेयर बढ़त
    हीरो मोटोकॉर्प 6.11%
    विप्रो 4.04%
    हिंदुस्तान यूनीलीवर 3.87%
    एक्सिस बैंक 2.90%
    एशियन पेंट्स 2.67%
  4. निफ्टी के टॉप-5 लूजर

    शेयर गिरावट
    ओएनजीसी 3.45%
    सनफार्मा 2.83%
    यस बैंक 1.97%
    वेदांता 1.93%
    कोल इंडिया 1.79%
  5. डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को 39 पैसे की बढ़त के साथ 70.30 के स्तर पर आ गया। रुपया गुरुवार को 77 पैसे चढ़कर 70.69 पर बंद हुआ था। गुरुनानक जयंती की वजह से शुक्रवार को करंसी मार्केट बंद रहा था।



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      Sensex soars 373 points to 35354 Nifty rallies 102 points on Monday 26 Nov

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आर्सेलर की बोली को मंजूरी देने के खिलाफ ट्रिब्यूनल पहुंचा स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक


अहमदाबाद. एस्सार स्टील के कर्जदाताओं के पैनल के खिलाफ स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (एससीबी) ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में अर्जी दाखिल की है। बैंक ने एस्सार स्टील के अधिग्रहण के लिए आर्सेलर मित्तल के प्रस्ताव को मंजूरी देने का फैसला गैरकानूनी बताया है।

  1. स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक का दावा है कि आर्सेलर मित्तल के 42,000 करोड़ रुपए के संशोधित प्रस्ताव पर कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स ने कभी विचार ही नहीं किया। एस्सार स्टील के क्रेडिटर्स की कमेटी में एसबीसी का वेटेज 7.5% से भी ज्यादा है।

  2. एस्सार स्टील पर एससीबी का 2,646 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है। लेकिन, नीलामी से मिलने वाली रकम से उसे सिर्फ 60.71 करोड़ रुपए देने की बात कही गई है। एससीबी ने कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स की 22 से 25 अक्टूबर के दौरान हुई बैठकों पर सवाल उठाए हैं।

  3. एससीबी चाहता है कि आर्सेलर मित्तल के प्रस्ताव को मंजूरी देने का फैसला रद्द किया जाए। अगर उसे माना भी जाए तो 42,000 करोड़ रुपए की रकम सभी कर्जदाताओं के दावों के मुताबिक सही अनुपात में बांटी जाए।

  4. सरकारी कंपनी गेल और गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन (गेटको) आर्सेलर मित्तल की योजना को खारिज करने के लिए एनसीएलटी में अर्जी दाखिल कर चुके हैं। इनका कहना है कि एस्सार के कर्जदाताओं के व्यावसायिक हितों को दरकिनार किया गया है।

  5. एस्सार स्टील पर 49,395 करोड़ रुपए का कर्ज है। इसकी वसूली के लिए दिवालिया प्रक्रिया के तहत कर्जदाताओं ने बोलियां मांगी थीं। कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स ने पिछले महीने दुनिया की सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी आर्सेलर मित्तल के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।



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      Standard Chartered Bank moves NCLT against CoC selecting Arcelor for Essar

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विधानसभा चुनाव के नतीजे जो भी हों, ये शेयर बाजार पर असर डालेंगे: देवांग्शु दत्ता


नई दिल्ली. ट्रेड वॉर पर अमेरिका और चीन के बीच बातचीत अभी तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है। इसलिए ग्लोबल मार्केट में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि कच्चे तेल के दाम एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। इसकी वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम घटे हैं और रुपया भी 3 महीने में सबसे मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। कच्चे तेल के दाम में गिरावट विश्व अर्थव्यवस्था में सुस्ती के डर से आई है।

डिमांड से ज्यादा तेल की सप्लाई हो रही है। ग्रोथ घटने की आशंका के चलते पिछले हफ्ते अमेरिकी शेयर बाजारों में बिकवाली का रुख रहा। आईटी स्टॉक्स में भी गिरावट रही। विधानसभा चुनाव के कारण घरेलू मोर्चे पर सेंटीमेंट नर्वस बना हुआ है। इन चुनावों के नतीजे 11 दिसंबर को आने हैं। नतीजे जैसे भी हों, बाजार को प्रभावित करेंगे। राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ बीजेपी की सरकार बनती है तो निवेशक खुश होंगे। अब तक के ओपिनियन पोल नजदीकी लड़ाई की संभावना जता रहे हैं।

आरबीआई की बोर्ड मीटिंग में एमएसएमई को राहत
सोमवार को आरबीआई की बोर्ड मीटिंग में सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच सुलह होती दिखी। 18 सदस्यों वाले बोर्ड में गवर्नर उर्जित पटेल, 4 डिप्टी गवर्नर, आरबीआई के 4 अन्य अधिकारी, सरकार द्वारा नियुक्त 7 स्वतंत्र निदेशक, आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और वित्तीय मामलों के सचिव राजीव कुमार भी हैं। बोर्ड ने केंद्रीय बैंक में पूंजी रिजर्व तय करने के लिए समिति बनाने का फैसला किया। वित्त मंत्री अरुण जेटली और उर्जित पटेल तय करेंके गि समिति के सदस्य कौन होंगे और इसकी शर्तें क्या होंगी। बोर्ड मीटिंग में आरबीआई ने बैंकों का कैपिटल टू रिस्क वेटेड ऐसेट रेश्यो (सीआरएआर) 9% से घटाकर 8% करने की मांग नहीं मानी। हालांकि यह बेसल 3 सीआरएआर नियमों के पालन के लिए बैंकों को एक साल अतिरिक्त यानी मार्च 2020 तक का समय देेने पर राजी हो गया। इससे अधिक एनपीए वाले बैंक भी ज्यादा कर्ज दे सकेंगे। 25 करोड़ रुपए तक कर्ज वाले एमएसएमई के लिए कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग का भी फैसला हुआ।

जेट की हिस्सेदारी बेचने के लिए एतिहाद से बातचीत
जेट एयरवेज ने बेलआउट के लिए अपने साझीदार एतिहाद एयरवेज से फिर बातचीत शुरू की है। एयरलाइन में एतिहाद की अभी 24% हिस्सेदारी है, जिसे यह 49% तक बढ़ा सकती है। भारतीय एयरलाइंस में किसी विदेशी एयरलाइन की अभी यही निवेश सीमा है। टाटा संस के बोर्ड ने भी कहा है कि जेट के साथ उसकी शुरुआती बातचीत चल रही है। चर्चा है कि विस्तारा में टाटा की साझीदार सिंगापुर एयरलाइंस जेट में हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रही है।


खर्च बढ़ने से आधे से ज्यादा एटीएम बंद होने का खतरा
देश में अभी 2.38 लाख एटीएम हैं। इनमें से 1.3 लाख कम इंटरचेंज फीस और बढ़ी लागत के चलते बंद हो सकते हैं। एटीएम इंडस्ट्री के संगठन कैटमी का कहना है कि हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपडेट करने की गाइडलाइंस से खर्च काफी बढ़ जाएगा। छोटे शहर और ग्रामीण इलाकों के एटीएम ज्यादा प्रभावित होंगे। जनधन योजना के लाभार्थियों को परेशानी होगी, क्योंकि ये एटीएम से ही पैसे निकालते हैं। फिलहाल बैंक और एटीएम कंपनियों के बीच बात चल रही है कि अतिरिक्त खर्च का बोझ कौन उठाएगा।



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देवांग्शु दत्ता, कंट्रीब्यूटिंग एडिटर, बिजनेस स्टैंडर्ड

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हफ्तेभर में विदेशी मुद्रा भंडार 57 करोड़ डॉलर बढ़ा


नई दिल्ली.देश का विदेशी मुद्रा भंडार 16 नवंबर को खत्म हुए हफ्ते में 56.89 करोड़ डाॅलर बढ़कर 393.58 अरब डॉलर हो गया। इससे पहले के हफ्ते यानी नौ नवंबर को इसमें 12.12 करोड़ डॉलर की कमी आई थी।

रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 50.60 करोड़ डॉलर बढ़कर 368.54 अरब डॉलर हो गया। स्वर्ण भंडार 7.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 20.96 अरब डॉलर हो गया। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि 44 लाख डॉलर घटकर 2.62 अरब डॉलर रह गई। इस दौरान विशेष आहरण अधिकार भी 57 लाख डॉलर घटकर 1.45 अरब डॉलर रहा।



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Indian foreign exchange reserves raise 57 million

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पान मसाले के दो ब्रांड राजश्री और केसर में मिला कैंसर वाला रसायन, बिक्री पर रोक


हमीरपुर.उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में पान मसाले के दो नामी ब्रांड- राजश्री और केसर के नमूनों की जांच में गैम्बियर मिलाने की पुष्टि हुई है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने निर्माताओं को पत्र लिखकर इनकी बिक्री पर रोक लगा दी है। इनके निर्माताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी बीके शर्मा ने शुक्रवार को बताया कि कुछ दिन पहले दोनों के नमूने लखनऊ की लैब में टेस्ट किए गए थे। जिसमें गैम्बियर मिला, इसका इस्तेमाल चमड़ा रंगने में हाेता है। इसके सेवन से गुर्दे-लिवर खराब व कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।



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Chemical cancer found in Rajshri

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भारत में श्याओमी का मार्केट शेयर चीन से 14% ज्यादा, 45% मार्केट पर चीनी कंपनियों का ही कब्जा


गैजेट डेस्क.चीन की कंपनी श्याओमी की भारत के स्मार्टफोन मार्केट में हिस्सेदारी जुलाई-सितंबर तिमाही में 27% रही। रिसर्च फर्म काउंटरप्वाइंट की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में श्याओमी का शेयर भारत के आधे से भी कम 13% है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में 45% हिस्सेदारी चीन की कंपनियों की है।

माइक्रोमैक्स का शेयर 1% से बढ़कर 9% हुआ
भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में चीनी कंपनियों की स्थिति काफी बेहतर है। जुलाई-सितंबर में वीवो और ओप्पो का कुल मार्केट शेयर 18% रहा। सैमसंग का मार्केट शेयर 28% से घटकर 22% रह गया। उधर, माइक्रोमैक्स का शेयर 1% से बढ़कर 9% हो गया।

कंपनी पहली तिमाही दूसरी तिमाही तीसरी तिमाही
सैमसंग 26% 28% 22%
श्याओमी 31% 28% 27%
वीवो 6% 12% 10%
माइक्रोमैक्स 3% 1% 9%
ओप्पो 6% 9% 8%
अन्य 29% 22% 24%

चीनके मार्केट में चाइनीजकंपनियों की स्थिति : चीनी स्मार्टफोन मार्केट में श्याओमी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है और इस कंपनी का मार्केट शेयर तीसरी तिमाही में सिर्फ 13% रहा जो भारत से 14% कम है। तीसरी तिमाही में सबसे ज्यादा 42% मार्केट शेयर वीवो और ओप्पो का रहा।

कंपनी पहली तिमाही दूसरी तिमाही तीसरी तिमाही
हुआवे 22% 26% 23%
वीवो 16% 18% 21%
ओप्पो 18% 19% 21%
श्याओमी 13% 13% 13%
एपल 13% 8% 9%
मीजू 3% 2% 2%
अन्य 15% 14% 11%

दुनिया में क्या है चीनी कंपनियों की स्थिति :ग्लोबली मार्केट शेयर की बात की जाए तो श्याओमी और ओप्पो-वीवो की स्थिति और भी ज्यादा खराब है। तीसरी तिमाही में श्याओमी का ग्लोबल मार्केट शेयर 9% जबकि ओप्पो-वीवो का मार्केट शेयर सिर्फ 17% ही है। सबसे ज्यादा ग्लोबल मार्केट शेयर के मामले में सैमसंग सबसे आगे है जिसका 19% मार्केट पर कब्जा है। वहीं दूसरे नंबर 14% मार्केट शेयर के साथ हुआवे और 12% के साथ एपल तीसरे नंबर पर है।

कंपनी पहली तिमाही दूसरी तिमाही तीसरी तिमाही
सैमसंग 22% 20% 19%
हुआवे 11% 15% 14%
एपल 14% 11% 12%
श्याओमी 8% 9% 9%
ओप्पो 7% 8% 9%
वीवो 5% 7% 8%
मोटोरोला 2% 2% 3%
अन्य 31% 28% 26%

पिछले एक साल भारत में नंबर-1 है श्याओमी : 2017 की चौथी और आखिरी तिमाही में श्याओमी ने सैमसंग को पछाड़कर भारत के सबसे ज्यादा मार्केट शेयर 25% पर कब्जा किया था और इसी के साथ पहले नंबर की कंपनी बनी थी। तब से लेकर अभी तक श्याओमी ही मार्केट शेयर के मामले में भारत की नंबर-1 कंपनी है।

2016 में श्याओमी का मार्केट शेयर सिर्फ 4%, अब 27% पर कब्जा

  • काउंटरप्वॉइंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 की पहली तिमाही में श्याओमी का भारत में मार्केट शेयर सिर्फ 4% था जो साल के आखिरी तक बढ़कर 9% हो गया।
  • 2017 में भी श्याओमी ने अपनी स्थिति मजबूत की और आखिरी तक 25% मार्केट शेयर के साथ भारत की सबसे बड़ी कंपनी बनी।
  • हालांकि, 2018 में श्याओमी का मार्केट शेयर थोड़ा कम हुआ है। पहली तिमाही में श्याओमी का मार्केट शेयर जहां 31% था वही तीसरी तिमाही तक 27% हो गया।


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smartphone market share in third quarter of 2018

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सैमसंग ने कर्मचारियों को कैंसर के मामले में गलती मानी, हर पीड़ित को 95 लाख रु देगी


सियोल. सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने सेमीकंडक्टर बनाने वाली फैक्ट्रियों के वर्करों को कैंसर जैसी बीमारियां होने के मामले में माफी मांगी है। वह हर पीड़ित को 95 लाख रुपए (1.33 लाख डॉलर) का हर्जाना देगी। साल 2007 में एक वर्कर की मौत के बाद यह मामला पहली बार सामने आया था। साउथ कोरिया का एक्टिविस्ट ग्रुप शार्प्स इस मामले में सैमसंग से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था। शार्प्स के मुताबिक सैमसंग के प्लांटों में काम करने वाले 200 वर्करों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो गईं। इनमें से 70 की मौत हो चुकी है।

  1. दस साल अदालत में चले इस मामले में कंपनी ने समझौते कर लिया है। पीड़ित पूर्व और मौजूदा कर्मचारियों को कंपनी हर्जाना देगी। साल 1984 से सैमसंग के प्लांट में काम करने वाले वो सभी पीड़ित जिन्होंने एक साल से ज्यादा काम किया है, हर्जाने के हकदार होंगे।

  2. समझौते के तहत सैमसंग 16 तरह के कैंसर, गर्भपात और वर्कर्स के बच्चों की जन्मजात बीमारियों के मामलों में हर्जाना देगा। इस महीने के आखिर तक पीड़ितों के लिए कंपेनसेशन की गाइडलाइंस और माफी का पत्र सैमसंग की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा। मुआवजा देने की प्रक्रिया 2028 तक पूरी की जाएगी।

  3. एक्टिविस्ट ग्रुप शार्प्स के फाउंडर ह्वांग सांग-की ने उम्मीद जताई है कि कई और कर्मचारी भी मुआवजे का दावा करेंगे। लेकिन, उन्हें कार्यस्थल के हालातों की वजह से बीमारियां होने की बात साबित करने के लिए लंबी मेडिकल प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।



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      Samsung Electronics decided to pay compensation to its workers by 2028

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बैंकों के लिए बेसल से ज्यादा सख्त मानदंडों की जरूरत नहीं: राजीव कुमार


नई दिल्ली. रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय ने मतभेद वाले विषयों को बातचीत के जरिए सुलझा लिया है। ऐसा ही होना चाहिए था। रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय एक ही टीम के मेंबर हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे दूसरों को लगे कि इनमें टकराव है और आपस में मुठभेड़ हो रही है। इससे अर्थव्यवस्था का मैनेजमेंट ठीक से नहीं चल सकता है। साढ़े नौ घंटे की मीटिंग में यह बात जाहिर हुई कि दोनों तरफ के लोग समन्वय चाहते हैं। समन्वय के साथ रिजर्व बैंक की स्वायत्तता बरकरार रखी जा सकती है। स्वायत्तता का मतलब यह नहीं कि किसी और से बात ना की जाए या राय नहीं ली जाए। उम्मीद है कि बातचीत आगे भी जारी रहेगी।

रिजर्व बैंक का सरप्लस: समिति की बात सरकार-आरबीआई दोनों को मान्य होगी

यह अच्छा रहा कि दोनों पक्ष रवैया नरम करने पर तैयार थे। कितना रिजर्व सरप्लस आरबीआई को सरकार को देना चाहिए, यह तय करने के लिए एक समिति बनेगी। इसमें रिजर्व बैंक और सरकार दोनों के नुमाइंदे होंगे। चार साल पहले मालेगाम समिति ने कहा था कि रिजर्व बैंक के पास काफी सरप्लस है, जिसे वह तीन साल में सरकार को दे। पिछले साल रिजर्व बैंक ने कम सरप्लस पैसा सरकार को ट्रांसफर किया था। समिति बनाना अच्छा कदम है। इसकी बात दोनों को मान्य होगी।

बैंकों की पूंजी: यह अनुपात ज्यादा होने से कर्ज बढ़ने की रफ्तार कम रहेगी
कॉमर्शियल बैंकों के लिए पर्याप्त पूंजी (कैपिटल एडेक्वेसी) बेसल मानकों से ज्यादा है। दोनों पक्ष बात करेंगे कि यह स्तर बनाए रखना ठीक है या कम किया जा सकता है। बेसल-3 के जो मानदंड हैं वे काफी सख्त हैं। मेरे विचार से भारतीय बैंकों के लिए उससे ज्यादा स्तर रखने की जरूरत नहीं है। पूंजी अनुपात ज्यादा होने का मतलब है कि बैंकों के पास कर्ज देने के लिए कम पैसे होंगे। कर्ज बढ़ने का अनुपात भी कम रहता है। इसके समाधान के लिए कदम बढ़ाना भी अच्छा संकेत है।

पीसीए: कुछ बैंकों को मोहलत मिले तो अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होगा
रिजर्व बैंक ने 11 बैंकों को पीसीए में रखा है। दोनों पक्ष इसकी समीक्षा के लिए तैयार हुए हैं। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि सभी 11 बैंकों की स्थिति अब खराब नहीं है। कुछ बैंकों की परफॉर्मेंस 6 महीने में सुधरी है। एनपीए कम हुआ और रिकवरी बढ़ी है। डिपॉजिट भी बढ़ा है। नकदी इन बैंकों में फंस गई है। कुछ बैंकों को पीसीए से मोहलत मिल गई तो अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होगा।

एनबीएफसी: नकदी बढ़ाने पर अगली बोर्ड मीटिंग में चर्चा हो सकती है

आईएलएंडएफएस के डिफॉल्ट के बाद एनबीएफसी के लिए नकदी संकट बढ़ा। नकदी बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक से आग्रह किया गया था। लगता है इस मुद्दे पर बोर्ड मीटिंग में बात नहीं हुई। आने वाले महीनों में इस पर बात करना जरूरी है। क्योंकि एनबीएफसी बाइक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए लोगों को जो कर्ज दे रहे थे, वह लगभग रुक गया है। अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए इस कर्ज का बाजार में वापस आना जरूरी है। उम्मीद है कि अगली बोर्ड मीटिंग में इस पर बात हो जाएगी। पांच साल से कॉमर्शियल बैंक जो कर्ज नहीं दे पा रहे थे, उसकी पूर्ति एनबीएफसी ने ही की। इसलिए उनका समर्थन करना जरूरी है।



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राजीव कुमार, उपाध्यक्ष, नीति आयोग।

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जापानी कार कंपनी निसान के बोर्ड मेंबर्स ने कार्लोस घोस को चेयरमैन पद से हटाया : रिपोर्ट


टोक्यो. भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किए गए कार्लोस घोस (64) को निसान बोर्ड ने गुरुवार को चेयरमैन पद से हटा दिया। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, यह फैसला सात सदस्यीय बोर्ड की मैराथन मीटिंग के बाद लिया गया। हालांकि, निसान के प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि नहीं की है। कार्लोस करीब 17 साल से जापान की कार कंपनी निसान का नेतृत्व कर रहे थे।

जापानी मीडिया ने बताया था कि कार्लोस घोस को भ्रष्टाचार और आय छिपाने के आरोप में सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा कार्लोस पर जापान के वित्तीय कानून के उल्लंघन का भी आरोप था। वहीं, निसान ने भी आरोपों की पुष्टि करते हुए कहा था कि कार्लोस ने कई साल तक अपनी इनकम वास्तविक से कम बताई। उन्होंने कंपनी के पैसे का इस्तेमाल निजी कार्यों के लिए किया। व्हिसल ब्लोअर की शिकायत मिलने के बाद कार्लोस के खिलाफ जांच शुरू हुई थी।

कार्लोस फ्रांस की ऑटो कंपनी रेनो के चेयरमैन और सीईओ भी हैं। कार्लोस की गिनती जापान के टॉप एग्जिक्यूटिव में होती है। उन्होंने निसान को दिवालिया होने से बचाया था। साल 1999 में रेनो ने निसान में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी खरीदी थी। उसके बाद कार्लोस निसान से जुड़े और 2001 में सीईओ बन गए थे।



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Carlos Ghosn's era is over, Nissan board removes him as chairman

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सेंसेक्स 219 की गिरावट के साथ 34981 पर बंद, लगातार तीसरे दिन नुकसान


मुंबई. शेयर बाजार गुरुवार को लगातार तीसरे दिन नुकसान में रहा। सेंसेक्स 218.78 अंक की गिरावट के साथ 34,981.02 के स्तर पर बंद हुआ। इंट्रा-डे में यह 34,937.98 तक फिसला। निफ्टी की क्लोजिंग 73.30 प्वाइंट नीचे 10,526.75 पर हुई। कारोबार के दौरान इसने 10,512 का निचला स्तर छुआ।

  1. कारोबार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई थी। लेकिन, ऊपरी स्तरों से बिकवाली और यूरोपीय बाजारों से खराब संकेतों की वजह से भारतीय बाजार में गिरावट में आ गई। मेटल, पीएसयू, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में ज्यादा दबाव रहा।

  2. सेंसेक्स के 30 में से 25 और निफ्टी के 50 में से 40 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। एनएसई के 11 में से 10 सेक्टर इंडेक्स नुकसान में रहे। मेटल इंडेक्स 1.7% लुढ़क गया।

  3. निफ्टी के टॉप-5 लूजर

    शेयर गिरावट
    महिंद्रा एंड महिंद्रा 3.02%
    ग्रासिम 2.52%
    हिंडाल्को 2.51%
    बजाज फाइनेंस 2.50%
    आईओसी 2.37%
  4. निफ्टी के टॉप-5 गेनर

    शेयर बढ़त
    जी एंटरटेनमेंट 4.23%
    अडानी पोर्ट्स 2.01%
    लार्सन एंड टुब्रो 0.52%
    एचडीएफसी 0.35%
    इन्फोसिस 0.28%


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      Stock Market erases early gains Sensex falls over 200 pts on Thrusday 22 No

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लोढ़ा ग्रुप के फाउंडर मंगल प्रभात देश के सबसे अमीर बिल्डर, नेटवर्थ 27150 करोड़ रुपए


मुंबई. लोढ़ा ग्रुप के फाउंडर और बीजेपी विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा (62) देश के सबसे अमीर बिल्डर हैं। उनके पास 27,150 करोड़ रुपए की संपत्ति होने का अनुमान है। रिसर्च फर्म हुरुन और ग्रोहे ने 'इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट' जारी की है। इसमें एम्बेसी ग्रुप के चेयरमैन जितेंद्र विरवानी (52) का दूसरा नंबर है। उनके पास 23,160 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

  1. डीएलएफ के चेयरमैन के पी सिंह पिछले साल 23,460 करोड़ रुपए की नेटवर्थ के साथ सबसे ऊपर थे। लेकिन, इस बार 100 में भी जगह नहीं बना सके। शेयरहोल्डिंग पैटर्न में बदलाव और अपनी हिस्सेदारी घटाने की वजह से के पी सिंह की नेटवर्थ में कमी आई। उनके पास डीएलएफ के सिर्फ 0.81% शेयर हैं। हालांकि, उनके बेटे राजीव सिंह इस साल तीसरे नंबर पर हैं। जबकि, पिछले साल वो लिस्ट में शामिल नहीं थे।

  2. देश के टॉप-5 अमीर बिल्डर

    नाम नेटवर्थ (रुपए करोड़) कंपनी शहर
    मंगल प्रभात लोढ़ा 27,150 लोढ़ा ग्रुप मुंबई
    जितेंद्र विरवानी 23,160 एम्बेसी बेंगलुरु
    राजीव सिंह 17,690 डीएलएफ दिल्ली
    चंद्रू रहेजा 14,420 के रहेजा मुंबई
    विकास ओबेरॉय 10,980 ओबेरॉय रियल्टी मुंबई
  3. मंगल प्रभात लोढ़ा मुंबई की मालाबार हिल सीट से बीजेपी विधायक हैं। पिछले साल अमीर बिल्डरों की लिस्ट में वो दूसरे नंबर पर थे। उनकी नेटवर्थ 18,610 करोड़ रुपए थी।

  4. इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट के मुताबिक देश के 100 बड़े बिल्डरों के पास 2.36 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है। पिछले साल के मुकाबले यह 27% ज्यादा है। हुरुन की रिसर्च में कहा गया है कि रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी की वजह से बड़े बिल्डरों के लिए छोटी कंपनियों का अधिग्रहण आसान हुआ है।



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      Mangal Prabhat Lodha of Lodah group is India Richest Realtor says Hurun rep

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अब रेलवे में भी मिलेगा जियो का नेटवर्क, इससे फोन के बिल में 35% कमी आएगी


गैजेट डेस्क. देश की तीसरी सबसले बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो अब भारतीय रेलवे को अपनी सर्विसेस देगा। जियो रेलवे को अपनी सर्विसेस 1 जनवरी 2019 से देने लगेगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जियो की सर्विसेस की मदद से रेलवे कर्मचारियों के फोन कनेक्शन बिल में 35% तक की कमी आने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारी-कर्मचारियों के फोन कनेक्शन का बिल भारतीय रेलवे ही चुकाता है।

दरअसल, रेलवे के अधिकारी और कर्मचारियों को क्लोज्ड यूजर ग्रुप (सीयूजी) के तहत मोबाइल कनेक्शन दिए जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि पिछले 6 सालों से भारती एयरटेल रेलवे को सर्विस दे रहा था, जिसके लिए रेलवे हर साल 100 करोड़ रुपए का बिल जमा करता था लेकिन इसकी वैलिडिटी 31 दिसंबर 2018 को खत्म हो रही है। इसलिए अब इसका टेंडर रिलायंस जियो इन्फोकॉम को दिया गया है।

एयरटेल के मुकाबले 1.83 लाख ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगी सुविधा : भारती एयरटेल रेलवे के करीब 1.95 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को अपनी सुविधाएं देता था, लेकिन रिलायंस जियो 3.78 लाख कर्मचारियों को अपनी सुविधाएं देगा। इस हिसाब से एयरटेल के मुकाबले जियो 1.83 लाख ज्यादा अधिकारी-कर्मचारियों को अपनी सुविधा देने जा रहा है।

रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग : रेलवे के कर्मचारियों को जियो की तरफ से हाई-स्पीड इंटरनेट डेटा और अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के अलावा एसएमएस की सुविधा भी मिलेगी। जियो के प्लान के मुताबिक, रेलवे के कर्मचारी डेली डेटा खत्म होने के बाद सिर्फ 10 रुपए में 2 जीबी एक्स्ट्रा डेटा भी ले सकेंगे।

जियो की तरफ से मिलेंगे चार प्लान : रेलवे के अधिकारी-कर्मचारियों को रिलायंस जियो चार तरह के प्लान देगा। इस प्लान में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी को 60 जीबी डेटा मिलेगा, जिनकी संख्या सिर्फ 2% है। वहीं ज्वॉइंट सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों (26%) को 45 जीबी डेटा मिलेगा जबकि ग्रुप-सी के स्टाफ (72%) को 30 जीबी डेटा मिलेगा। इसके अलावा एक 49 रुपए का एसएमएस प्लान भी रेलवे वालों को मिलेगा।

प्लान डेटा
125 रुपए 60 जीबी डेटा
99 रुपए 45 जीबी डेटा
67 रुपए 30 जीबी डेटा


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reliance jio to take over as service provider for railways

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कैंसर के लिए अलग बीमा प्लान लेना जरूरी: राकेश वाधवा


नई दिल्ली. ब्रेस्ट कैंसर भारत में महिलाओं को प्रभावित करने वाले सबसे घातक कैंसर में से एक है। देश में महिलाओं को होने वाले कैंसर में एक चौथाई इसी से जुड़े हैं। इस रोग की इतनी ऊंची दर के बावजूद महिलाओं के बीच इसके बारे में जागरूकता और वित्तीय तैयारी बहुत कम है। फ्यूचर जेनराली इंडिया लाइफ इंश्योरेंस के एक सर्वे के मुताबिक 65% से अधिक महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में आने वाले खर्च से अनजान हैं। विभिन्न शहरों में कराए गए इस सर्वे में करीब 72% उत्तरदाताओं ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर के लिए खास इंश्योरेंस प्लान उपलब्ध है उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। ज्यादातर ने यही कहा कि यदि उन्हें यह रोग हुआ तो वे इलाज के लिए पैसे उधार लेंगी। व्यक्तिगत बचत इस्तेमाल करेंगी या पर्सनल लोन लेंगी।

लोगों को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारियों में कैंसर सबसे घातक है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक, 2020 तक भारत में कैंसर के 17.3 लाख नए मामले दर्ज होने और 8.8 लाख से अधिक मौत होने का अंदेशा है। ब्रेस्ट कैंसर के ज्यादातर मामले एडवांस स्टेज में पता चल पाते हैं। इनमें अधिक विशिष्ट उपचार की जरूरत होती है। इसका इलाज कितना महंगा होगा यह इसके प्रकार/स्टेज, इलाज के तरीके और संबंधित अस्पताल पर निर्भर करता है। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज का खर्च 2.5 लाख से 20 लाख रुपए के बीच हो सकता है। लगभग 50% महिलाएं यही मानती हैं कि इसके इलाज पर 2 लाख रुपए तक खर्च आता होगा। यह एक खराब फाइनेंशियल प्लानिंग है और ऐसी घातक बीमारी होने पर परिवार पर अचानक खर्च का बड़ा बोझ आ सकता है।

छिपे खर्च क्या हैं, इनसे कैसे निपट सकते हैं ?
यदि आपने फाइनेंशियल प्लानिंग कर रखी है तो ऐसी डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी उपलब्ध है जो शुरुआत में ही इस कैंसर का पता लगा सकती हैं और समय पर इलाज करवाकर इससे मुक्त हुआ जा सकता है। जब आप फाइनेंशियल प्लानिंग करते हैं तो इलाज, दवाओं के खर्च के अलावा कुछ छिपे खर्च भी होते हैं। इनमें लॉस ऑफ इनकम, लंबी अवधि तक देखभाल, दूसरे शहर में इलाज के लिए आने-जाने और होटल में रहने का खर्च, दवाएं महंगी होने से जैसे शामिल हैं।

अलग से एक कैंसर इंश्योरेंस प्लान क्यों लें ?
कैंसर से लड़ने के लिए आर्थिक रूप से सुरक्षित होने का सबसे अच्छा तरीका बेसिक हेल्थ इंश्योरेंस के अलावा कैंसर-स्पेसिफिक इंश्योरेंस प्लान लेना है। ऐसे प्लान कैंसर की शुरुआती स्टेज से लेकर एडवांस स्टेज तक के खर्च को कवर करते हैं। एक मेडिक्लेम पॉलिसी अस्पताल में भर्ती और संबंधित खर्चों तक ही सीमित है जबकि कैंसर इंश्योरेंस पॉलिसी रोगी को भर्ती होने से ऊपर के फायदे मुहैया कराती है। यह अपेक्षाकृत कम प्रीमियम पर कॉम्प्रिहेंसिव कवरेज की पेशकश करती है। यह वित्तीय व मानसिक सुरक्षा भी देती है क्योंकि इमसें डाइग्नोज, इलाज और सर्जरी के विभिन्न चरणों में एकमुश्त राशि मिलती है।

ज्यादातर इंश्योरेंस प्लान 'प्रीमियम से छूट' का फायदा भी देते हैं। यदि शुरुआत में ही कैंसर का पता चल जाता है तो भविष्य में प्रीमियम अदायगी से छूट मिल जाती है। क्लेम का भुगतान पिछले दावों और स्टेज तक पहुंच जाता है तो पॉलिसी सुनिश्चित करती है कि आपको अतिरिक्त राशि मिले ताकि आप इलाज का खर्च उठा पाएं। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में कुछ महीने से लेकर कुल साल तक लगते हैं। इसका खर्च परिवार के लिए बड़ा आर्थिक बोझ साबित हो सकता है। यदि आप पॉलिसी लेकर 'वित्तीय तैयारी' रखते हैं तो संकट के समय बड़ी मदद मिल सकती है।


(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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राकेश वाधवा, सीएमओ, फ्यूचर जनराली इंडिया लाइफ इंश्योरेंस।

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ऑटो शेयरों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद: देवेन आर चोकसी


मुंबई. पिछले हफ्ते निफ्टी और सेंसेक्स ने अच्छा प्रदर्शन किया। निफ्टी में 0.91% और सेंसेक्स में 0.84% की तेजी रही। जहां तक कंपनियों की आमदनी की बात है बुनियादी कारक मजबूत बने हुए हैं। अर्थव्यवस्था में तेजी देखने को मिल रही है। खुदरा महंगाई दर में कमी आई है। खाने की चीजें, फल और प्रोटीन वाली वस्तुएं सस्ती होने से अक्टूबर में यह 3.31% दर्ज हुई है। यह सितंबर 2017 के बाद इसका सबसे कम स्तर है। पिछले साल सितंबर में यह 3.28% और अक्टूबर में 3.58% थी। जीडीपी का प्रदर्शन बेहतर बना हुआ है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रदर्शन पिछले हफ्ते बेहतर नहीं रहा। अमेरिका में डो जोंस 2.22%, नास्डैक 2.15% और एसएंडपी 500 इंडेक्स 1.61% गिरकर बंद हुए। यूरोप में ब्रिटेन का एफटीएसई 1.29%, जर्मनी का डैक्स 1.63% और फ्रांस का कैक-40 इंडेक्स 1.60% नुकसान के साथ बंद हुआ।

ब्रिटेन की कैबिनेट ने पिछले बुधवार ब्रेक्जिट डील पर मुहर लगा दी। इस संबंध में घंटों की लंबी चर्चा के बाद 28 देशों वाले यूरोपियन यूनियन (ईयू) से ब्रिटेन के बाहर होने से संबंधित समझौते के मसौदे को हरी झंडी दी गई। इसके बाद समीकरण ईयू से बाहर होने की मांग करने वालों के मुकाबले ब्रिटेन सरकार के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। प्रधानमंत्री थेरेसा मे को पार्टी के भीतर ही चुनौती मिल रही है। संसद इस पर अनुमति देगी इसकी उम्मीद नहीं है।

सेक्टर आउटलुक- सीमेंट: सितंबर तिमाही में सीमेंट सेक्टर की वॉल्यूम ग्रोथ दो अंकों में रही है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों से मांग, कम कीमत वाले घरों के निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में तेजी बने रहने का प्रमुख योगदान है। लेकिन दिसंबर तिमाही में इस सेक्टर की ग्रोथ में सुस्ती दिखने का अंदेशा है। बड़ा सवाल यह है कि क्या आगे भी मांग में तेजी रहेगी? क्या सीमेंट के दाम बढ़ेंगे? पिछले तीन महीनों में प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण के तहत बनने वाले घरों की संख्या 22% बढ़ी है। इसमें मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बने घरों का अहम योगदान है। योजना के तहत अब तक 49.7 लाख घर बनाए जा चुके हैं। यह सरकार के एक करोड़ घर बनाने के लक्ष्य का करीब आधा है।

सेक्टर आउटलुक- ऑटो: देश के ऑटो उद्योग का प्रदर्शन इस वित्त वर्ष की शेष अवधि में बेहतर रह सकता है। इस वित्त वर्ष में घरेलू बाजार में यात्री वाहनों की बिक्री 8-10%, यूटिलिटी व्हीकल की 14-15% और कारों की बिक्री 8-9% बढ़ने की उम्मीद है। दोपहिया की बिक्री 11-13% की रफ्तार से बढ़ सकती है। मोटरसाइकिलों की बिक्री 9-11%, स्कूटरों की बिक्री 13-16% की सालाना दर से बढ़ने का अनुमान है। कॉमर्शियल व्हीकल की बिक्री 9-12% की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है।

हमारी अर्थव्यवस्था में पॉजिटिव कारक हैं। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आने वाली नकारात्मक खबरों से मार्केट सेंटिमेंट उतार-चढ़ाव वाले बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध के बावजूद भारत को तेल आयात करने की अस्थायी अनुमति दी है। यह भारत जैसे तेल की अधिक खपत करने वाले बड़े देशों के लिए राहत की खबर है। वहीं, दूसरी तरफ सऊदी अरब ने क्रूड की कीमतों को 75-80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रखने के लिए उत्पादन घटाने का फैसला किया है। यह अच्छी खबर नहीं है। वजह, पिछले एक साल में क्रूड की मांग 1% से ज्यादा नहीं बढ़ी है। ऐसे में कीमतों का इतने ऊंचे स्तरों पर टिके रहना मुश्किल है। अमेरिका ने दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाईं तो डॉलर फिर मजबूत होगा और अन्य मुद्राओं में गिरावट दिखेगी। ऐसी नकारात्मक खबरों से दुनिया के बाजारों में खासकर ईटीएफ की ओर से बिकवाली का दबाव जारी रह सकता है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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देवेन आर. चोकसी, एमडी, केआर चोकसी इन्वेस्टमेंट

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आम्रपाली ग्रुप को फटकार- आखिरी मौका देते हैं, हमारे सभी आदेशों को पूरा करें


नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लगातार आदेशों का पालन नहीं करने पर आम्रपाली ग्रुप को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि हमने साफ शब्दों में आपसे कहा था कि अपनी हर गतिविधि का खुलासा कीजिए। बेंच ने कहा कि हम आखिरी मौका देते हैं, ग्रुप और उसके डायरेक्टर्स सभी जानकारियां दें। सुप्रीम कोर्ट ने जवाब देने के लिए 3 दिसंबर की तारीख तय की है और मामले की अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।

आम्रपाली ग्रुप पर 40 हजार खरीदारों को वक्त पर घर का पजेशन न दे पाने का आरोप है। खरीदारों ने घर मिलने में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

हर चीज की जानकारी हमें चाहिए- कोर्ट
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने कहा- ग्रुप 3 दिसंबर तक अपने डायरेक्टर्स, उनके परिजनों, रिश्तेदारों, मुख्य वित्तीय अधिकारी और ऑडिटर्स की भारत और विदेश में संपत्तियों की जानकारी दे। हम ग्रुप के डायरेक्टर्स और प्रमोटर्स को आखिरी मौका दे रहे हैं। आप पिछले साल मई से दिए गए कोर्ट के हर आदेश को पूरा करें। हर चीज की जानकारी हमें चाहिए। हर वित्तीय लेन-देन की जानकारी भी, जिनके जरिए घर खरीदने वालों का पैसा ट्रांसफर किया गया।

बेंच ने कहा- हमने आपसे स्पष्ट किया था कि 2008 के बाद रिहायशी, व्यावसायिक, निजी, आधिकारिक और वित्तीय संबंध में हर जानकारी हमें दी जाए और ये भी कि पैसा कहां ट्रांसफर किया गया। अगर ये सारे खुलासे ग्रुप नहीं करता है तो फिर उनके लिए स्थितियां बेहद मुश्किल होने वाली हैं।

बैंक और अधिकारी फॉरेंसिक ऑडिटरों को सहयोग करें
अदालत ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों, बैंकों और दूसरे विभागों को फॉरेंसिक ऑडिटर्स के साथ सहयोग करने के निर्देश दिए। बेंच ने कहा कि ऑडिटर्स कोर्ट के निर्देशों पर काम कर रहे हैं और अनुपालन में किसी भी तरह की कोताही कोर्ट की अवमानना समझी जाएगी। जांच में सहयोग के लिए आम्रपाली ग्रुप अपने 4 सदस्यों को ऑडिटर्स के सहयोग के लिए नियुक्त करे।



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"Writing is very clear on the wall", says SC warns Amrapali Group

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सेंसेक्स 300 अंक की गिरावट के साथ 35475 पर बंद, निफ्टी 107 प्वाइंट लुढ़का


मुंबई. शेयर बाजार में मंगलवार को तेज गिरावट आई। सेंसेक्स 300.37 अंक के नुकसान के साथ 35,474.51 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी की क्लोजिंग 107.20 प्वाइंट नीचे 10,656.20 पर हुई। विदेशी बाजारों की गिरावट से देश में सेंटीमेंट बिगड़े और बिकवाली हावी हो गई। पिछले दिनों तेजी वाले शेयरों में मुनाफावसूली से भी दबाव बढ़ा।

  1. सेंसेक्स के 26 और निफ्टी के 44 शेयर नुकसान में रहे। एनएसई के 11 में से 10 सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। मेटल इंडेक्स 2.82% लुढ़क गया। टेक इंडेक्स 1.58% और हेल्थकेयर इंडेक्स 1.57% टूट गया।

  2. निफ्टी के टॉप-5 लूजर

    शेयर गिरावट
    यस बैंक 6.01%
    हिंडाल्को 5.91%
    इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस 3.79%
    डॉ. रेड्डी 3.57%
    विप्रो 3.29%
  3. निफ्टी के टॉप-5 गेनर

    शेयर बढ़त
    गेल 2.79%
    अडानी पोर्ट्स 1.41%
    इंडसइंड बैंक 0.97%
    बजाज फाइनेंस 0.55%
    जी एंटरटेनमेंट 0.49%
  4. रुपए में मजबूती से आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली बढ़ी। टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो के शेयर 2.59% तक गिर गए। यस बैंक को बोर्ड डायरेक्टर के इस्तीफे की खबर से इसके शेयर में 6% गिरावट आ गई।

  5. ब्रोकर्स के मुताबिक पिछले दिनों जिन शेयरों में तेजी आई उनमें निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं। प्रोविजनल डेटा के मुताबिक सोमवार को घरेलू निवेशकों ने 310.26 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं, विदेशी निवेशकों ने 1,103.36 करोड़ रुपए की खरीदारी की।

  6. डॉलर के मुकाबले रुपया मंगलवार को भी बढ़त में है। इंट्रा-डे में यह 39 पैसे मजबूत होकर 71.28 के स्तर पर आ गया। चार सितंबर के बाद यह सबसे उच्च स्तर है। रुपए में तेजी का लगातार छठा दिन है। आरबीआई और सरकार के बीच मतभेद सुलझने की उम्मीद से रुपए को फायदा हुआ।



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      Sensex drops over 100 points on global selloff profit booking

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यस बैंक के स्वतंत्र निदेशक आर चंद्रशेखर का इस्तीफा, बैंक के शेयर में 6% गिरावट


नई दिल्ली. यस बैंक के स्वतंत्र निदेशक आर चंद्रशेखर ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया। बैंक ने रेग्युलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। बैंक ने इस्तीफे की वजह निजी बताई है। लेकिन, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चंद्रशेखर कंपनी के मौजूदा हालातों से नाखुश थे। उनके इस्तीफे की खबर का असर मंगलवार को यस बैंक के शेयर पर दिखा। बीएसई पर शेयर 6% गिर गया।

  1. सूत्रों के मुताबिक प्रमोटर्स की इच्छा से यस बैंक अपने बोर्ड में बदलाव करना चाहता है। बैंक की नॉमिनेश एंड रेम्यूनरेशन (एनआरसी) कमेटी द्वारा बोर्ड के सदस्यों का परफॉर्मेंस रिव्यू शुरू होने के बाद चंद्रशेखर इस्तीफा देने वाले बैंक तीसरे सदस्य हैं।

  2. यस बैंक का कहना है कि एनआरसी कमेटी बोर्ड में नए सदस्यों की नियुक्ति के लिए आईटी और साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में विकल्प तलाशेगा। सूत्रों के सूत्रों के मुताबिक आने वाले समय में बोर्ड में बड़े पैमाने पर फेरबदल हो सकते हैं।

  3. पिछले हफ्ते नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अशोक चावला और बैंक की ऑडिट कमिटी के हेड वसंत गुजराती ने इस्तीफा दिया था। चावला का नाम एयरसेल-मैक्सिस मामले में सीबीआई की चार्जशीट में आया था। वसंत ने ऑडिट कमेटी की परफॉर्मेंस से जुड़े मुद्दे को लेकर इस्तीफा दिया था।

  4. एसबीआई के पूर्व चेयरमैन ओ पी भट्ट ने भी यस बैंक के पैनल से पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया था। उन्हें बैंक के सीईओ और एमडी राणा कपूर का विकल्प तलाशने वाले पैनल में शामिल किया गया था। भट्ट किंगफिशर एयरलाइंस को लोन देने के मामले में सीबीआई की जांच के दायरे में हैं।



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      YES Bank R Chandrashekhar resigns promoters seek board overhaul

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बच्चों के भविष्य के लिए एसआईपी से म्यूचुअल फंड में निवेश बेहतर: अश्विन पाटनी


नई दिल्ली. हर माता-पिता की इच्छा होती है कि वे अपने बच्चों को बेहतर से बेहतर चीजें-सुविधाएं मुहैया कराएं। पर इसी के साथ उनकी कामकाजी व्यस्तताएं भी जुड़ी होती हैं। अपने कॅरियर और बच्चों की हर इच्छा को पूरी करने के लिए ज्यादा से ज्यादा कमाने में उनका बड़ा वक्त निकल जाता है। यदि आप भी ऐसे माता-पिता में से एक हैं तो यह समय है जब आपको बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बचत करनी चाहिए।

कई माता-पिता जन्म से ही बच्चे के कॅरियर के बारे में सोचने लगते हैं। लेकिन इसके लिए बचत कैसे करें इसकी प्लानिंग आमतौर पर नहीं कर पाते हैं। पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों की शिक्षा के लिए सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश कर अच्छी बचत की जा सकती है। एसआईपी में एक निश्चित समय अंतराल (आमतौर पर तिमाही, छमाही, या सालाना) पर एक निश्चित रकम निवेश करनी होती है। लंबी अवधि में इससे आप अच्छा रिटर्न पा कर सकते हैं।

हमारी पिछली पीढ़ी ने भी हमारी शिक्षा के लिए बचत की थी, लेकिन उनकी ज्यादातर बचत निवेश के पारंपरिक माध्यमों तक केंद्रित थी। ऐसे माध्यमों में से अधिकतर टैक्स के बाद रिटर्न कम ही मिलता रहा है। महंगाई दर को एडजस्ट करने के बाद यह रिटर्न और कम हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ, सभी एसेट क्लास में शेयरों में लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देने की प्रवृत्ति देखने को मिली है। यदि बीएसई सेंसेक्स के 18 साल (नवंबर 2000 से अक्टूबर 2018) के प्रदर्शन पर गौर करें तो यह बताता है कि यदि आपने बच्चों की शिक्षा से लिए इस इंडेक्स में शामिल कंपनियों में हर महीने 10,000 रुपए निवेश किए होते तो अक्टूबर 2018 तक आप 81.84 लाख रुपए बना सकते थे। जबकि इस दौरान महज 21.60 लाख रुपए ही निवेश किए होते। लेकिन ऑफिस और घर की जिम्मेदारियों के बीच हम अक्सर अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग नहीं कर पाते हैं। पर्याप्त समझ और रिसर्च के बिना शेयरों में निवेश करना भी मुश्किल होता है। इसकी जगह म्यूचुअल फंड में निवेश आपकी इस मुश्किल को आसान कर सकता है। इसमें आप निवेश का संतुलित तरीका अपना सकते हैं और इसमें आपका निवेश अपेक्षाकृत सुरक्षित किसी प्रोफेशनल फंड मैनेजर के हाथ में होता है।

एक्सिस म्यूचुअल फंड, 'एक्सिस चिल्ड्रन गिफ्ट फंड' मैनेज कर रहा है। यह एक ओपन एंडेड फंड है। इससे आपको अपनी बचत को बच्चों के लिए एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाने में मदद मिल सकती है। इसमें नाबालिग बच्चे के नाम से निवेश किया जा सकता है। इसमें 5 साल का लॉक-इन-पीरियड होता है। इस लॉक-इन अवधि या बच्चे के बालिग होने, दोनों में से जो पहले हो, आप फंड से पैसा निकाल सकते हैं। लॉक-इन से फायदा यह होता है कि आप चाहकर भी इससे पैसा नहीं निकाल सकते और लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए किया गया निवेश बना रहता है। वहीं, फंड मैनेजर को भी आपकी रकम को लॉन्ग टर्म के लिहाज से अलग-अलग कंपनियों में निवेश करने का मौका मिलता है। यह प्रोडक्ट उन लोगों के लिए निवेश का बेहतर विकल्प है जो लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न चाहते हैं और डेट-मनी मार्केट के साथ-साथ इक्विटी और इनसे जुड़े अन्य इन्स्ट्रूमेंट्स में निवेश करना चाहते हैं, पर उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि म्यूचुअल फंड के निवेश में बाजार का जोखिम रहता है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।)



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अश्विन पाटनी, हेड प्रोडक्ट्स एंड फंड मैनेजर, एक्सिस म्यूचुअल फंड।

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30 नवंबर तक बकाया तनख्वाह दो, वरना नहीं करेंगे अतिरिक्त ड्यूटी : पायलट


मुंबई. जेट एयरवेज के पायलटों ने चेतावनी दी है कि अगर 30 नवंबर तक उनकी बकाया तनख्वाह नहीं दी गई तो वे अगले महीने से अतिरिक्त ड्यूटी नहीं करेंगे। एयरलाइंस के सूत्रों ने सोमवार को बताया कि नरेश गोयल की यह कंपनी पिछली तीन तिमाही से घाटे में है और अपने कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं दे पा रही है।

  1. घरेलू एयरलाइंस के पायलटों की संस्था नेशनल एविएटर गिल्ड (एनएजी) ने इस मामले पर मंगलवार को कंपनी के अधिकारियों से बातचीत करने के लिए कहा है। हालांकि, एनएजी पर इस मुद्दे पर ढिलाई बरतने के आरोप लग चुके हैं।फिलहाल इस मसले पर जेट एयरवेज मैनेजमेंट ने कोई टिप्पणी नहीं की है।

  2. सूत्रों ने बताया, ‘‘पायलटों ने निर्णय लिया है कि अगर 30 नवंबर तक उनकी बकाया सैलरी नहीं मिलती है तो एक दिसंबर से वे सिर्फ रोस्टर के हिसाब से काम करेंगे। अतिरिक्त ड्यूटी पर नहीं जाएंगे। उन्होंने अपना यह निर्णय मौखिक रूप से कंपनी मैनेजमेंट को भी बता दिया है।’’

  3. जेट एयरवेज के करीब 1600 कर्मचारियों, टेक्निकल स्टाफ और मैनेजमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों को सितंबर में आधी तनख्वाह मिली थी। उन्हें सितंबर की आधी तनख्वाह के अलावा अक्टूबर की पूरी सैलरी भी नहीं मिली है। पिछले हफ्ते दूसरी तिमाही के आंकड़े सामने आने के बाद जेट एयरवेज के सीईओ विनय दुबे ने कहा था, ‘‘करीब 15% कर्मचारियों को वक्त पर तनख्वाह नहीं मिली।’’

  4. सूत्रों के मुताबिक, एक पायलट को हर महीने 75 से 80 घंटे उड़ान भरनी होती है, लेकिन जेट एयरवेज के पायलट हर महीने 90 घंटे तक उड़ान भर रहे हैं। खासतौर पर बोइंग 737 बेड़े को पायलटों की कमी के कारण ज्यादा ओवरटाइम करना पड़ रहा है।

  5. कंपनी ने रविवार को मुंबई में 10 घरेलू उड़ानें रद्द कर दी थीं। जून की तिमाही में 1323 करोड़ का घाटा झेलने के बाद जेट एयरवेज ने सितंबर में घोषणा की थी कि पायलटों, इंजीनियर और मैनेजमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों को नवंबर तक हर महीने तनख्वाह दो हिस्सों (11 और 26 तारीख) में दी जाएगी। हालांकि, कंपनी अपना यह वादा पूरा नहीं कर पाई।



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      salary dues jet airways pilots not to do additional duties

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रिलायंस का जामनगर रिफाइनरी के विस्तार पर 10 अरब डॉलर खर्च करने का विचार


मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड अपनी जामनगर रिफाइनरी का करने पर विचार कर रही है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक योजना पूरी होने पर रिफायनरी की सालाना प्रोसेसिंग क्षमता 3 करोड़ टन हो जाएगी। रिलायंस तेल उपभोक्ता देशों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक 2040 तक भारत की ऊर्जा की मांग बढ़कर दोगुनी से भी ज्यादा होने की उम्मीद है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस ने जामनगर कॉम्प्लेक्स में नई रिफाइनिंग ट्रेन के लिए वैश्विक लाइसेंसधारकों और उपकरण विक्रेताओं से चर्चा शुरू कर दी है। इस प्रोजेक्ट पर 10 अरब डॉलर का खर्च आने का अनुमान है। बताया जा रहा है कि साल 2020 तक इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जा सकता है। रिलायंस जल्द इसमें निवेश का आखिरी फैसला लेगी।


रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस प्रमुख तेल उपभोक्ता देशों में विस्तार करना चाहती है। सऊदी अरामको और एडनॉक ने भी भारत के पश्चिमी तट पर प्रस्तावित 6 करोड़ टन क्षमता वाले रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स में निवेश करने के लिए समझौते किए हैं। रोजनेफ्ट और उसके पार्टनरों ने भी देश में बड़ी डील की है।



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RIL considers plan to expand world largest refinery at Jamnagar by half

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आरबीआई की निगरानी बढ़ाने के लिए सरकार नियम में बदलाव कर सकती है: देवांग्शु दत्ता


नई दिल्ली. ग्लोबल मार्केट में ज्यादा सप्लाई के चलते कच्चे तेल के दाम में इस हफ्ते और गिरावट आई। भारत के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि इससे व्यापार घाटा कम होगा। रुपए ने भी डॉलर की तुलना में सुधार दर्ज किया है। अमेरिका और चीन के बीच बातचीत जारी रहने से उम्मीद बंधी है कि ट्रेड वार का असर कम होगा। लेकिन इंग्लैंड में ब्रेक्जिट को लेकर तनाव बढ़ा है। यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने पर दोनों भौगोलिक क्षेत्र एक बार फिर मंदी की चपेट में आ सकते हैं।

रिजर्व बैंक के बोर्ड की आज महत्वपूर्ण बैठक
रिजर्व बैंक के बोर्ड की सोमवार को महत्वपूर्ण बैठक है। रिजर्व बैंक डिफॉल्ट करने वाली बिजली कंपनियों के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई शुरू करना चाहता है, जबकि वित्त मंत्रालय इन्हें और समय देने के पक्ष में है। रिजर्व बैंक उन कमजोर सरकारी बैंकों को ढील देने के पक्ष में भी नहीं है जिन्हें इसने तत्काल सुधार (पीसीए) की श्रेणी में रखा है। यह एनबीएफसी सेक्टर के लिए कर्ज के नियमों में ढील देने के भी खिलाफ है। सरकार चाहती है कि कमजोर बैलेंस शीट वाले सरकारी बैंकों के लिए नियमों में ढील दी जाए ताकि वे नए कर्ज दे सकें। सरकार आरबीआई के रिजर्व का भी इस्तेमाल करना चाहती है। अगर इन मुद्दों का समाधान नहीं निकला तो सरकार आरबीआई की निगरानी बढ़ाने के लिए नियमों में बदलाव कर सकती है।

मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दर बढ़ा सकता है आरबीआई
अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर 3.31% दर्ज हुई है। यह सितंबर में 3.77% थी। औद्योगिक उत्पादन का इंडेक्स (आईआईपी) सितंबर में 4.5% बढ़ा है। महंगाई में गिरावट खाने-पीने की वस्तुओं के दाम घटने से आई है। फूड बास्केट 0.8% नीचे आया है। हालांकि यह किसानों के लिए परेशानी का विषय हो सकता है। रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई के लिए 4% का लक्ष्य रखा है। इसमें 2% घट-बढ़ की गुंजाइश है। इसलिए उम्मीद है कि दिसंबर की समीक्षा में आरबीआई ब्याज बढ़ा सकता है। आईआईपी के आंकड़े बताते हंै कि मैन्युफैक्चरिंग में ग्रोथ हो रही है। अप्रैल से सितंबर तक इस सेक्टर में ग्रोथ पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 5.1% रही है।

51 कंपनियों ने 26,594 करोड़ के शेयर बायबैक किए
प्राइमरी मार्केट में सुस्ती दिख रही है। 2017 में 36 कंपनियों ने आईपीओ से 67,147 करोड़ रुपए जुटाए थे। इस साल अभी तक 24 कंपनियों ने सिर्फ 30,959 करोड़ जुटाए हैं। निवेश का सेंटीमेंट मजबूत नहीं होने की वजह से कंपनियां इंतजार कर रही है। इस साल बायबैक का ट्रेंड बढ़ा है। जनवरी से अब तक 51 कंपनियों ने कुल 26,594 करोड रुपए के शेयर बायबैक किए हैं।

अमेरिका में केस के चलते सन फार्मा को अप्रत्याशित घाटा
सन फार्मा ने सितंबर तिमाही में अप्रत्याशित घाटा दर्ज किया है। अमेरिका में एक केस के लिए 1,217 करोड़ की प्रोविजनिंग के चलते यह 219 करोड़ रुपए के घाटे में आ गई। पिछले साल सितंबर तिमाही में 912 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। रेवेन्यू 4% बढ़कर 6,938 करोड़ रहा है।

कोल इंडिया का उत्पादन लक्ष्य से कम रहने का अंदेशा
कोल इंडिया का मुनाफा 734% बढ़कर 3,085 करोड़ रु. हो गया। पिछले साल सितंबर तिमाही में सिर्फ 370 करोड़ मुनाफा हुआ था। रेवेन्यू 19,172 करोड़ की तुलना में 24,209 करोड़ रु. रहा है। जुलाई से सितंबर के दौरान 11.30 करोड़ टन की तुलना में 11.96 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया। पूरे साल में उत्पादन 65 करोड़ के लक्ष्य से कम रहने के आसार हैं।



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देवांग्शु दत्ता, कंट्रीब्यूटिंग एडिटर, बिजनेस स्टैंडर्ड।

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निर्यात पर फोकस से मोबाइल इंडस्ट्री में 7 साल में 47 लाख नौकरियों के आसार


नई दिल्ली. भारत से मोबाइल हैंडसेट के निर्यात की काफी संभावनाएं हैं। लेकिन इसके लिए फोन बनाने वाली कंपनियों ने टैक्स में 10 साल तक छूट और नियमों में सुधार की मांग की है। इनका कहना है कि निर्यात पर फोकस किया गया तो 2025 तक यहां 125 करोड़ हैंडसेट बनाए जा सकते हैं। इससे 2025 तक यह इंडस्ट्री 11 गुना बढ़कर 16 लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी। इसके अलावा 47 लाख नौकरियां भी निकलेंगी। अगर फोकस सिर्फ घरेलू बाजार पर रहा तो 2025 तक सिर्फ 45 करोड़ फोन बनाए जा सकेंगे। इंडस्ट्री का आकार 5.7 लाख करोड़ रुपए का होगा और 18 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।

देश में मोबाइल की मांग घट रही है: रिपोर्ट
इंडियन सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ने कंसल्टेंसी फर्म मैकिंजे के साथ मिलकर रिपोर्ट तैयार की है, जिसे उसने सरकार को सौंपा है। इसी रिपोर्ट में ये बातें कही गई हैं। इसके मुताबिक भारत में मोबाइल की डिमांड कम हो रही है। इसलिए मेक इन इंडिया का फोकस निर्यात पर करने की जरूरत है। अगर भारत निर्यात बढ़ाने में कामयाब रहता है तो असेंबलिंग, प्रोग्रामिंग, टेस्टिंग व पैकेजिंग जैसे क्षेत्र में नई नौकरियां निकलेंगी। रिपोर्ट में निर्यात बढ़ाने के लिए नीतियों में बदलाव और टैक्स में छूट की जरूरत बताई गई है। इसके मुताबिक मोबाइल फोन मशीनरी पर आयात शुल्क भी घटाना पड़ेगा। अन्य सिफारिशों में ड्यूटी ड्रॉबैक रेट बढ़ाकर 5% करना और कर्मचारियों को हटाने और कंपनी बंद करने के नियम आसान बनाना शामिल हैं।

टैक्स में 10 साल तक छूट और नियमों में बदलाव से ही यह संभव हो सकेगा

  • भारत में 2014 से अब तक120 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई गई हैं
  • वर्ष 2017 के दौरान यहां 22.5 करोड़ मोबाइल हैंडसेट यहां बनाए गए
  • 1.4 लाख करोड़ रुपए के फोन बनाए गए, निर्यात सिर्फ 700 करोड़ का हुआ

2017 में 51 कंपोनेंट कंपनियों ने समझौते किए, सिर्फ दस ने यूनिट लगाई
51 कंपोनेंट कंपनियों ने 2016 में यूनिट लगाने की बात कही, लेकिन 2017 में सिर्फ 10 यूनिट लग पाईं। चीन व वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देश इन कंपनियों से 30 साल तक सिर्फ 10-15% टैक्स लेते हैं। भारत में भी 20 साल के दौरान यूनिट लगाने वाली कंपनियों को टैक्स में 10 साल तक छूट मिलनी चाहिए।

चीन में 7,200 करोड़ से ज्यादा रेवेन्यू वाले एपल के 30 सप्लायर
एपल के 30 सप्लायरों ने चीन में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई है। इन सबका सालाना रेवेन्यू 7,200 करोड़ रुपए से ज्यादा है। शीर्ष 15 सप्लायरों ने 2007 से अब तक 7 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। इनका रेवेन्यू सिर्फ 2016 में 5.6 लाख करोड़ का था।



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Mobile industry have potential to create 47 lakh jobs in 7 years says repor

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विदेशी मुद्रा भंडार 12 करोड़ डॉलर घटकर 393.01 अरब डॉलर पहुंचा


नई दिल्ली. देश का विदेशी मुद्रा भंडार नौ नवंबर को समाप्त सप्ताह में 12.12 करोड़ डॉलर घटकर 393.01 अरब डॉलर पर आ गया। इससे पहले दो नवंबर को खत्म हुए हफ्ते में यह लगातार पांचवीं बार बढ़त पर था। तब विदेशी मुद्रा भंडार 1.05 अरब डॉलर बढ़कर 393.13 अरब डॉलर पहुंच गया था।

रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 9 नवंबर को खत्म हुए हफ्ते में विदेश पूंजी भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा भंडार 10.32 करोड़ डॉलर घटकर 368.03 अरब डॉलर हो गया।

स्थिर रहा स्वर्णभंडार
पिछले हफ्ते दामों में तेज उछाल के बाद स्वर्ण भंडार 20.89 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि 1.16 करोड़ डॉलर घटकर 2.62 अरब डॉलर रह गई। इस दौरान विशेष आहरण अधिकार 64 लाख डॉलर की गिरावट के साथ 1.46 अरब डॉलर हो गया।



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Indian Forex Reserves down to 393.01 US Dollars

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