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कांग्रेस ने भाजपा से छत्तीसगढ़ छीना, राजस्थान में भी बहुमत; मप्र में बराबरी का मुकाबला


नई दिल्ली. पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी है। रुझानों के मुताबिक,कांग्रेस ने भाजपा से छत्तीसगढ़ छीन लिया है। राजस्थान में भी हर 5 साल में सरकार बदलने का 25 साल से चल रहा ट्रेंड कायम है। कांग्रेस यहां बहुमत के साथ वापसी करती दिख रही है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही 100 सीटों के पार हैं, लेकिन बहुमत अभी किसी को मिलता नहीं दिख रहा। उधर, तेलंगाना में दूसरी बार टीआरएस सत्ता हासिल कर रही है। मिजोरम के रुझान बता रहे हैं कि कांग्रेस के हाथ से पूर्वोत्तर का एकमात्र राज्य निकल गया है।


भाजपा 5 में से 3 राज्यों में दूसरे नंबर पर
रुझान में भाजपा मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में दूसरे नंबर पर है। यहां कांग्रेस को बहुमत मिलता नजर आ रहा है। तेलंगाना और मिजोरम में भाजपा तीसरे नंबर पर है।

3 अहम राज्यों के रुझानोंकीहर घंटे की तस्वीर

मप्र राजस्थान छग
भाजपा कांग्रेस भाजपा कांग्रेस भाजपा कांग्रेस
9 बजे 27 51 43 65 24 30
10बजे 109 110 80 100 24 60
11 बजे 103 115 86 99 25 57
12 बजे 108 112 78 100 18 66
1 बजे 104 115 75 99 17 67
2 बजे 110 110 67 103 21 64
3 बजे 112 106 70 102 15 66
4 बजे 115 105 72 102 16 65

भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान राजस्थान में, पिछली बार से 57% सीटें गंवाईं
रुझानों में भाजपा राजस्थान में सत्ता से दूर नजर आ रही है। 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान भी यहीं हुआ है। यहां पिछली बार 163 सीटें पाने वाली भाजपा 70 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।

भाजपा को कहां, कितना नुकसान

प्रदेश 2013 में सीटें 2018 में सीटें नुकसान
मध्यप्रदेश 165 112 (रुझान) - 53
राजस्थान 163 70 (रुझान) - 93
छत्तीसगढ़ 49 15 (रुझान) -34

वोट शेयर : भाजपा को छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा 10% का नुकसान

छत्तीसगढ़

पार्टी 2013 में वोट शेयर 2018 में वोट शेयर
भाजपा 42.3% 33%
कांग्रेस 41.6% 42.9%

राजस्थान

पार्टी 2013 में वोट शेयर 2018 में वोट शेयर
भाजपा 46% 38.6%
कांग्रेस 33.7% 39.2%

मध्यप्रदेश

पार्टी 2013 में वोट शेयर 2018 में वोट शेयर
भाजपा 45.7% 41.4%
कांग्रेस 36.38%

41.3%

1 बजे तक के रुझानों का विश्लेषण

राहुल-मोदी के लिए इन नतीजों के मायने
राहुल: 2017 में राहुल गांधी दिसंबर में ही कांग्रेस अध्यक्ष बने थे। राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस की यह पहली बड़ी जीत है। कांग्रेस ने भाजपा को 2 राज्यों छत्तीसगढ़ और राजस्थान में रोक लिया है। उधर, मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है।

मोदी-शाह: भाजपा की इस जोड़ी को झटका लगा है, क्योंकि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद साढ़े चार साल में भाजपा की यह सबसे बड़ी हार मानी जा रही है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे दो बड़े गढ़ भाजपा के हाथ से निकल रहे हैं।
मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा पंजाब में हारी थी। गोवा में भी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस बनी, लेकिन भाजपा सरकार बनाने में कामयाब रही। कर्नाटक में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन, यहां कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने सरकार बनाई। गुजरात में भाजपा की सीटें घटीं, लेकिन वह यहां सरकार बचाने में कामयाब रही।

12 बजे तक के रुझानों का विश्लेषण

11 बजे तक के रुझानों काएनालिसिस



10 बजे तक के रुझानों काएनालिसिस

तीन प्रमुख राज्यों में पिछली बार कौन जीता?

दल मप्र छत्तीसगढ़ राजस्थान
भाजपा 165 49 163
कांग्रेस 58 39 21
बसपा 4 1 13
अन्य 3 1 13
कुल सीटें 230 90 200

तेलंगाना विधानसभा- 2014

कुल सीटें- 119

दल सीटें वोटशेयर
टीआरएस 63 34.3%
कांग्रेस 21 25.2%
टीडीपी 15 14.7%
एआईएमआईएम 7 3.8%
भाजपा 5 7.1%
निर्दलीय 1 5%

मिजोरम: 2013 नतीजे

कुल सीटें- 40

कांग्रेस 34
एमएनएफ 5
एमपीपी 1
भाजपा 0


मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा का कैसा प्रदर्शन रहा?

  • 2014 में मोदी के पीएम बनने के बाद 22 राज्यों में चुनाव हुए। भाजपा ने 13 राज्यों में सरकार बनाई। वह अभी 18 राज्यों में सत्ता में है।
  • मई 2014 में जब मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तब भाजपा या एनडीए की सिर्फ आठ राज्यों में और कांग्रेस की 14 राज्यों में सरकार थी।
  • मोदी के प्रधानमंत्री बनने के वक्त मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गोवा और गुजरात में पहले से भाजपा सरकार थी। आंध्र में उसकी तेदेपा के साथ, पंजाब में अकाली दल और नगालैंड में एनपीएफ के साथ गठबंधन सरकार थी।
  • यहां भाजपा ने चुनाव जीतकर सरकार बनाई : महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, असम, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, हिमाचल, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय। गोवा, गुजरात में सत्ता बनाए रखी।
  • यहां सत्ता हासिल की : अरुणाचल प्रदेश में समीकरण बदले तो भाजपा ने सरकार बनाई। वहीं, बिहार में भाजपा 2015 मंे हार गई थी। लेकिन डेढ़ साल बाद उसका जदयू से गठबंधन हुआ और सत्ता में आई।
  • जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भंग : राज्य में भाजपा-पीडीपी की गठबंधन सरकार थी। पीडीपी ने भाजपा से समर्थन वापस लिया। हाल ही में यहा राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग कर दी।
  • कांग्रेस अभी चार राज्यों- पंजाब, मिजोरम, पुड्डूचेरी और कर्नाटक में सत्ता में है। इनमें से कर्नाटक में उसका जेडीएस के साथ गठजोड़ है। दिल्ली समेत बाकी नौ राज्यों में दूसरे दलों की सरकार है।
  • जीडीपी और आबादी के लिहाज से अभी 68% आबादी और 59% इकोनॉमी वाले राज्यों में भाजपा की सरकार।


अभी किस दल की कहां सरकार?
भाजपा :
महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, असम, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा, गुजरात, हिमाचल, त्रिपुरा, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़।
कांग्रेस : पंजाब, पुड्डूचेरी, मिजोरम, कर्नाटक।
अन्य राज्य : दिल्ली- आप, केरल- सीपीएम, ओडिशा- बीजद, तमिलनाडु- अन्नाद्रमुक, आंध्रप्रदेश- तेदपा, जम्मू-कश्मीर- राष्ट्रपति शासन, तेलंगाना- टीआरएस, बंगाल- तृणमूल, सिक्किम - एसडीएफ।

2019 में लोकसभा चुनाव के अलावा 6 राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव

राज्य कब तक कार्यकाल
सिक्किम 27 मई 2019
अरुणाचल प्रदेश 01 जून 2019
ओडिशा 11 जून 2019
आंध्रप्रदेश 18 जून 2019
हरियाणा 02 नवंबर 2019
महाराष्ट्र 09 नवंबर 2019




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Election Result 2018 Live Updates: MP, Chhattisgarh, Rajasthan, Telangana & Mizoram Results LIVE
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कांग्रेस ने भाजपा को रोका, हर बार सत्ता बदलने का 25 साल का ट्रेंड बरकरार


जयपुर.राजस्थान विधानसभा की 199 सीटों पर मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस 101और भाजपा 73सीटों पर आगे चल रही है। अन्य को 25सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं।

अपडेट्स

  • शाहपुरा सीट पर भाजपा के कैलाश चंद्र मेघवाल 74542 वोटों से जीते, कांग्रेस के महावीर प्रसाद को हराया।
  • अंता सीट परकांग्रेस के प्रमोद भाया 34063 वोटों से जीते, कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी को हराया।
  • वसुंधरा राजे की झालरापाटन से जीत,उनके सामने कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह मैदान में थे।
  • टोंक में सचिन पायलट ने परिवहन मंत्री यूनुस खान को 53,556 वोटों से हराया।
  • जयपुर की मालवीय नगर सीट से भाजपा के कालीचरण सराफ 900 से ज्यादा वोटों से जीते।
  • पचपदरा से कांग्रेस के मदन प्रजापत 2395 वोटों से जीते, भाजपा के अमराराम को हराया।
  • तिजारा से बीएसपी के संदीप कुमार 4457 वोटों से जीते, कांग्रेस के दुर्रु मियां को हराया।
  • मांडल से कांग्रेस के रामलाल जाट 8065 वोटों से जीते, निर्दलीय प्रद्युमन सिंह को हराया।
  • अनूपगढ़ से भाजपा के संतोष 21124 वोटों से जीते, कांग्रेस के कुलदीप इंदौरा को हराया।

सरकार बनाने का भरोसा, दूसरे दलों के भी संपर्क में: कांग्रेस
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि राजस्थान में हमें जनादेश मिला है। कांग्रेस की सरकार बनेगी। उन्होंने निर्दलियों और भाजपा के उम्मीदवारों को भी सरकार में शामिल होने का खुला न्यौता दिया है।

पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने भी सरकार बनाने का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि हम कांग्रेस की विचारधारा में भरोसा रखने वाले उम्मीदवारों के भी संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि बीएसपी 3 सीटों और सीपीआई-एम 2 सीटों पर आगे है। हम इस तरह के दलों का भी स्वागत करेंगे।

भाजपा की उम्मीदें बरकरार
भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अभी मतगणना के कई अहम राउंड बचे हुए हैं और अगले रुझान पार्टी के पक्ष में आ सकते हैं। उधर, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अभी तक के चुनावी नतीजों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

मुख्यमंत्री का दावेदार कौन ?
राज्य में इस बार कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (67) और पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट (41) सीएम कैंडिडेट माने जा रहे हैं। गहलोत 2 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। प्रदेश की राजनीति में उनका लंबा अनुभव और काफी प्रभाव है। सचिन पायलट यूपीए-2 में कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्टर रह चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद राहुल गांधी ने उन्हें प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी सौंपी थी। पार्टी के युवा नेता के तौर भी उनकी पहचान है।

राज्य में इस बार कांग्रेस की तरफ से सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सीएम कैंडिडेट माने जा रहे हैं। दोनों ही इस बार चुनाव मैदान में थे। इनके अलावा कांग्रेस से रमेश डूडी के नाम की भी चर्चा है।

राजस्थान की 199सीटों पर इस बार 74.08% मतदान हुआ था। राज्य में पिछली बार (75.67%) से 1.52% कम वोटिंग हुई। राज्य के 7 एग्जिट पोल्स में कांग्रेस को आगे दिखाया गया था। सिर्फ एक एग्जिट पोल में भाजपा के आगे रहने का अनुमान लगाया गया था।

भाजपा का वोट प्रतिशत 7% घटा, कांग्रेस का 5% बढ़ा

पार्टी 2013 में वोट शेयर 2018 में वोट शेयर
भाजपा 46% 38.6%
कांग्रेस 33.7% 39.2%

25 साल से ट्रेंड : हर चुनाव में बदलती है सरकार
1993 : भाजपा ने 38.60% और 95 सीटें लेकर सत्ता में वापसी की। कांग्रेस को 76 सीटें मिलीं।
1998 : कांग्रेस ने 44.95% वोट लिए। 153 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 120 सीटें मिलीं।
2003 : भाजपा ने 39.20% वोट लेकर कांग्रेस को सत्ता से निकाला। भाजपा को 120, कांग्रेस को 56 सीटें मिलीं।
2008 : कांग्रेस ने 36.82% वोट लिए और 96 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 78 सीटें मिलीं।
2013 : मोदी लहर में भाजपा ने 46.05% वोट और 163 सीटें लेकर कांग्रेस को 21 सीटों पर समेटा।

66 साल में 14 चुनाव हुए; 13 मुख्यमंत्री बने
इससे पहले राजस्थान में 66 साल में 14 विधानसभा चुनाव हुए थे। सबसे ज्यादा 4 बार मोहन लाल सुखाड़िया और तीन बार भैरोंसिंह शेखावत सीएम रहे थे। सुखाड़िया करीब 16 साल 5 महीने और शेखावत 10 साल 4 महीने सीएम रहे, इन दोनों ने राज्य में करीब 44% समय तक शासन किया।

पिछली बार भाजपा ने 13 जिलों में क्लीन स्वीप किया था

  • भाजपा ने 2013 में राज्य के 33 में से 13 जिलों में क्लीनस्वीप किया था। यहां 59 विधानसभा सीटेंहैं।
  • 2013 में भाजपा ने अजमेर-8, बारां-4, चित्तौड़गढ़-6, डूंगरपुर-4, हनुमानगढ़-5, जैसलमेर-2, झालावाड़-4, कोटा-6, पाली-6, राजसमन्द-4, सवाई माधोपुर-4, सिरोही-3, टोंक-4 की सभी सीटें जीत ली थीं। उसके सामने इस प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है।
  • 2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का राज्य के 33 में से 17 जिलों में खाता तक नहीं खुला। इन जिलों में कांग्रेस के सामने प्रदर्शन सुधारने की चुनौती है।
  • 2013 के चुनाव में 11 सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को मिले थे
  • 2013 विधानसभा चुनाव में पहली बार नोटा का इस्तेमाल हुआ। राज्य में 5.88 लाख यानी 1.91% वोट नोटा को मिले थे।



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    5 राज्यों की 12 बड़ी सीटें: मिजोरम के मुख्यमंत्री थनहवला दोनों सीटों पर हारे, तेलंगाना में केसीआर जीते


    भोपाल/जयपुर/रायपुर.पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे और रुझानों मेंभाजपा शासित तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री रमन सिंह, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह अपनी-अपनी सीटों पर निर्णायकबढ़त बनाई। तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव (केसीआर) गजवेल सीट सेजीते। उधर,चंद्रयान गुट्टा सीट से एआईएमआईएम केअकबरुद्दीनओवैसी को भी जीत मिली।मिजोरम में 10 साल सेमुख्यमंत्री लल थनहवला ने अपनी दोनों सीटें (चम्फाई-सेरछिप) गंवाईं।

    1. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज बुधनी सीट से चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने उनके खिलाफ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को उतारा। अरुण के पिता सुभाष यादव दिग्विजय सरकार में डिप्टी सीएम थे। खुद अरुण खंडवा से सांसद रह चुके हैं। शिवराज बुधनी से पिछले 13 साल से विधायक। 2013 में शिवराज ने कांग्रेस के डॉक्टर महेंद्र सिंह चौहान को हराया था।

    2. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजेझालरापाटन सीट से आगे चल रही हैं। कांग्रेस ने उनके खिलाफ अटल सरकार में मंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र को उतारा। मानवेंद्र चुनाव से ऐन पहले भाजपा से कांग्रेस में आए। वसुंधरा विरोध के कारण वो भाजपा में हाशिए पर थे। मानवेंद्र 2013 में जैसलमेर की शिव सीट से विधानसभा चुनाव जीते थे।राजे ने 2013 मेंझालरापाटन से कांग्रेस की मीनाक्षी चंद्रावत को हराया था।

    3. रमन सिंह राजनांदगांव सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं। वे दिसंबर 2003 से राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उनके खिलाफ इस बार कांग्रेस ने अटलजी की भतीजी करुणा शुक्ला को उतारा है। मुख्यमंत्री रमन सिंह के लिए 15 साल में सबसे कड़ा मुकाबला था। रमन सिंह ने राजनांदगांव से जीत हासिल की थी।

    4. पायलटटोंक सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं।उनके खिलाफ भाजपा ने राज्य सरकार में मंत्री यूनुस खान को उतारा। अजमेर से सांसद और यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। 2014 लोकसभा चुनावों में वे हार गए थे। मौजूदा वक्त में राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हैं। कांग्रेस के सत्ता में आने पर उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार माना जा रहा है।

    5. अशोक गहलोतसरदारपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशीशंभू सिंह से आगे चल रहे हैं।गहलोत 1998 और 2008 में राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इससे पहले वे यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत एक बार फिर कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। वे 2013 में सरदारपुर विधानसभा से चुनाव जीते थे।

    6. मध्यप्रदेश की चुरहट विधानसभा सीट पर पीछे चल रहे हैं। भाजपा के सरदेंदु तिवारी आगे चल रहे हैं।सिंह पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे हैं। निवर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। अजय सिंह 2013 में भी चुरहट से विधायक चुने गए थे।

    7. भूपेशपाटन सीट से आगे चल रहे हैं। उनके खिलाफ भाजपा के मोतीलाल साहू दूसरे नंबर पर हैं। बघेलछत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। प्रदेश के चर्चित सीडी कांड में नाम है। इस मामले में जेल में भी गए। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। 2013 में वे इसी सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

    8. छत्तीसगढ़ की अंबिकापुर सीट से बढ़त बनाए हुए हैं। भाजपा के अनुराग सिंह देव उनसे पीछे हैं।निवर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। राज्य के सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। 500 करोड़ से अधिक की सपंत्ति के मालिक हैं। सिंह देव 2008 से अंबिकापुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। कांग्रेस की ओर से वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी माने जा रहे हैं।

    9. टीआरएस प्रमुख और तेलंगाना के वर्तमान मुख्यमंत्री केसीआर गजवेल विधानसभा सीट से चुनाव जीत गएहैं। 2014 में अलग राज्य बनने के बाद पहली बार हुए चुनावों में उनकी पार्टी पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई। यहां लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव होने थे। लेकिन राव ने समय से पहले ही विधानसभा भंग कर दी।

    10. अकबरुद्दीन एआईएमआईएमप्रमुख असद्दुद्दीन ओवैसी के भाई हैं। उन्होंने चंद्रयान गुट्टा से जीत हासिल की। इस सीट से अकबरुद्दीन 1999, 2004, 2009 और 2014 में विधायक चुने गए थे। इस बार भाजपा ने उनके खिलाफ एबीवीपी नेता सैयद शहजादी (25) को टिकट दिया था।

    11. पु लल थनहवला दोनों सीटोंसेरछिपऔर चम्फाई से चुनाव हार गए। चम्फाई में उन्हें एमएनएफ केटीजे ललननलुआंगा ने मात दी। थनहवला 1987 में मिजोरम राज्य बनने के बाद से तीन बार मुख्यमंत्री रहे।

    12. छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री जोगी मरवाही सीट से आगे चल रहे हैं। इस सीट पर भाजपा की अर्चना पोर्ते दूसरे नंबर पर हैं।जोगी ने नवंबर 2000 से दिसंबर 2003 तक राज्य की कमान संभाली। 2016 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाई। जोगी की पार्टी ने छत्तीसगढ़ में बसपा के साथ गठबंधन किया है। 2013 में उनके बेटे अमित जोगी मरवाहीसीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।



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    रुझानों में तेलंगाना में टीआरएस को बहुमत, मिजोरम में कांग्रेस ने सत्ता गंवाई


    हैदराबाद/आइजोल. तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव में मतगणना हो रही है।रुझानों मेंतेलंगाना में टीआरएस 86,कांग्रेस-गठबंधन23, एआईएमआईएम 7और भाजपा 1 सीट पर आगे है। उधर, मिजोरम में कांग्रेस 5 और एमएनएफ 26,भाजपा 1 और अन्य 8पर आगे चल रही है।मिजोरम के मुख्यमंत्रीथनहवला दो सीटों से चुनाव लड़ थे। वे चम्फाई औरसेरछिप दोनोंसीटों से हार गए हैं। उन्हेंचम्फाई में एमएनएफ केटीजे ललननलुआंगा ने मात दी।

    तेलंगाना में तय वक्त से पहले हुए चुनाव
    2014 में अलग राज्य बनने के बाद तेलंगाना में पहला विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ हुआ था। यहां 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव होने थे, लेकिन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने तय वक्त से 9 महीने पहले ही विधानसभा भंग कर दी। इससे पहले 2014 के चुनाव में केसीआर की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र निर्माण पार्टी (टीआरएस) को बहुमत मिला था। पार्टी 63 सीटों के साथ पहले नंबर पर थी। वहीं, कांग्रेस को 21 और तेदेपा को 15 सीटें मिली थीं।

    t

    तेलंगाना में 119 विधानसभा चुनावों के लिए 7 दिसंबर को वोट पड़े थे। जबकि, मिजोरम की 40 सीटों पर 28 नवंबर को मतदान हुआ था। 2014 में अलग राज्य बनने के बाद तेलंगाना में यह दूसरा विधानसभा चुनाव है। उधर, मिजोरम पूर्वोत्तर का इकलौता राज्य है, जहां कांग्रेस की सरकार है। बाकी 6 जगहों पर मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, त्रिपुरा, असम, मणिपुर में भाजपा की सरकार है। इसलिए दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के लिए यह राज्य काफी अहम है।


    केंद्र में अपनी सहयोगी एमएनएफ से अलग चुनाव लड़ा
    एमएनएफ केंद्र सरकार में भाजपा की सहयोगी है। लेकिन यहां दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। इस विधानसभा चुनाव में 8 पार्टियों के 209 कैंडिडेट मैदान में थे। इनमें सत्ताधारी कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट के सबसे ज्यादा 40-40, भाजपा के 39, नेशनल पीपुल्स पार्टी के 9 और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के 5 प्रत्याशी हैं। 2013 में भाजपा ने सिर्फ 17 उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन एक भी सीट नहीं जीती थी।

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    कांग्रेस की कमान सीएम लल थनहवला के पास
    कांग्रेस ने तीन बार के मुख्यमंत्री लल थनहवला के हाथों कमान सौंपी। थनहवला 1989-1998 और 2008 से अब तक मुख्यमंत्री हैं। वे इस बार सेरछिप्प और चम्फाई सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां 34 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, एमएनएफ को 5 और मिजो पीपुल्स पार्टी को 1 सीट से संतोष करना पड़ा था।

    क्या कहते हैं एग्जिट पोल

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    Election Result 2018 Live Updates Telangana & Mizoram Election Result LIVE
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    कांग्रेस ने पहली बार दो तिहाई सीटें जीतीं, भाजपा का 15 साल में सबसे खराब प्रदर्शन


    रायपुर. पांच चुनावी राज्यों में भाजपा को सबसे बड़ी हार छत्तीसगढ़ में मिलती दिख रही है। रुझानों से नजर आ रहा है कि भाजपा को 30से ज्यादा सीटों का नुकसान हो रहा है, वहीं, कांग्रेस को करीब 20 सीटों का फायदा होता दिख रहा है। छत्तीसगढ़ के 15 साल के चुनावी इतिहास और चार विधानसभा चुनावों में भाजपा का यह सबसे खराब प्रदर्शन है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की कैबिनेट के ज्यादातर सभी मंत्री हारने की कगार पर हैं। भाजपा को करीब 9% वोट शेयर का नुकसान हुआ।


    पहली बार किसी पार्टी को 50 से ज्यादा सीटें

    कुल सीटें 90, अभी तक 85सीटों के रुझान

    बहुमत : 46

    दल 2018 2013

    हार-जीत काअंतर

    भाजपा 17 (33%) 49 (42.3%) - 32 (-9%)
    कांग्रेस 60 (43%) 39 (41.6%) +21 ( ‌+ 1.4%)
    जछकां 5 (8%) - -
    बसपा 3 (3%) 2 ( 4.4%) + 1 (1.4%)

    2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 10 ( 49.7% वोट शेयर) और कांग्रेस ( 39.1% वोट शेयर) को एक सीट मिली थी‌।

    जोगी ने कहा- हम हमारे प्रदर्शन से संतुष्ठ

    • जछकां के प्रमुख अजीत जोगी ने कहा कि हमें दो महीने पहले सिम्बल मिला। इसके बावजूद में हम जितनी सीटें जीत रहे हैं, जितना हमें वोट शेयर मिल रहा है। वह काफी है। हम हमारे प्रदर्शन से संतुष्ठ हैं। पहले यहां दो पार्टियां थीं। हमने अपनी मौजूदगी दर्ज की है। लोग भाजपा से नाराज थे।
    • कांग्रेस के प्रदेशअध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य में बदलाव जरूरी था। हमें विश्वास था कि हम जीतेंगे। एक तरफा जीत ने यह सिद्ध कर दिया।

    कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
    कांग्रेस ने इस बार किसी भी नेता का नाम आगे नहीं किया था। हालांकि, इस दौड़ में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और पार्टी नेता टीएस सिंह जूदेव व चरण दास महंत भी हैं। इनके अलावा कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रामदयाल उइके, डॉक्टर शिव डहरिया और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे के नाम की भी चर्चा रही।

    अविभाजित मप्र में कांग्रेस का गढ़ था छत्तीसगढ़, अब वहां दोबारा हुई मजबूत
    एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ को मध्यप्रदेश से अलग कर नए राज्य का दर्जा मिला था। इससे पहले अविभाजित मध्यप्रदेश में आपातकाल के बाद कांग्रेस को छह में से चार 1980, 1985, 1993 और 1998 के चुनाव में जीत मिली थी। चारों चुनाव में छत्तीसगढ़ इलाके की जनता ने कांग्रेस को बढ़त दिलाने में मदद की थी। यहां की 90 में से 1980 में 77, 1985 में 74, 1993 में 54 और 1998 में 48 सीटें कांग्रेस को मिली थीं। कांग्रेस ने सूबे में 20 साल पहले जैसी मजबूती दिखाई है।

    जोगी कांग्रेस को 8.5% वोट
    पहली बार मायावती की बसपा के साथ चुनाव लड़ रही अजीत जोगी की पार्टी जनता छत्तीसगढ़ कांग्रेस 5 सीटों पर आगे चल रही है। उसे करीब 8.5% वोट मिला है। एग्जिट पोल्स में जनता कांग्रेस और बसपा को 3 से 8 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। राज्य में इकलौते गैर-भाजपाई मुख्यमंत्री डॉ. अजीत जोगी रहे हैं। तब वे कांग्रेस में थे। हालांकि, 2013 का चुनाव हारने के बाद उन्होंने 2016 में कांग्रेस से इस्तीफा दिया और नई पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ बनाई। बसपा का पिछले तीन चुनाव में 4 से 6 फीसदी के बीच वोट शेयर रहा है। इस बार बसपा के वोट शेयर में करीब 3% की गिरावट आई।



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    CG Election Result 2018 Live Updates: Chhattisgarh Chunav Result Live
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    राजस्थान में गहलोत और छत्तीसगढ़ में बघेल के मुख्यमंत्री बनने की संभावना ज्यादा


    भोपाल/जयपुर/रायपुर. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भाजपा को लगातार चौथी बार चुनाव जीतने से रोक दिया है। राजस्थान की तस्वीर भी कांग्रेस के पक्ष में नजर आ रही है। वहीं, मध्यप्रदेश में अभी मामला बराबरी पर बना हुआ है। राजस्थान में मुख्यमंत्री बनने के दावेदारों में अशोक गहलोत सबसे आगे हैं। वे पहले भी मुख्यमंत्री रहे हैं। मध्यप्रदेश में कांग्रेस के जीतने की स्थिति में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को मौका मिल सकता है। वहीं, छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल का नाम सीएम कैंडिडेट के तौर पर आगे चल रहा है।

    1. राजस्थान में 100 या इससे कम सीटें रहने पर अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के आसार ज्यादा हैं। इसलिए कि गहलोत संकट मोचक हैं और अन्य दलों से उनका मैनेजमेंट भी अच्छा है। इसके पहले भी जब गहलोत मुख्यमंत्री थे तो उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। 96 सीटों के साथ कांग्रेस सरकार बनी थी और गहलोत ने सफलतापूर्वक पांच साल राज किया था। सचिन पायलट चूंकि नए हैं, इसलिए कम सीटों की सरकार में उनके सीएम बनने की संभावना कम है।

    2. भाजपा जीतती है तो शिवराज तय हैं लेकिन कांग्रेस जीतती है तो कमलनाथ की संभावनाएं ज्यादा हैं। यह भी हो सकता है कि कमलनाथ और सिंधिया के झगड़े में दिग्विजय सिंह द्वारा अजय सिंह ‘राहुल भैया’ को आगे कर दिया जाए। अब अजय सिंह चुरहट से खुद ही हार जाएं तो ये उनका दुर्भाग्य होगा। वैसे यहां कांग्रेस में कमलनाथ का नाम सबसे ऊपर है।

    3. छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल का मुख्यमंत्री बनना तय है। क्योंकि वही थे, जो लड़ रहे थे, संघर्ष कर रहे थे। केस झेले, जेल गए। सब कुछ किया। केवल ट्रांसफर, नियुक्तियां कराने वाले नेताओं की दौड़ से बाहर रहे। दूसरा नाम टीएस सिंहदेव का है, लेकिन भूपेश बघेल के सामने सिंहदेव की संभावना ना के बराबर है।



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        Meta who will be new CM: Rajasthan CM Ashok Gehlot, MP CM Kamal Nath, Chhattisgarh CM Bhupesh Bhagel after win

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    शादी के लिए शॉपिंग करने गई थी फैमिली, बच्ची को मॉल में ही भूल आए, देर रात तक बच्ची के खोने का भी नहीं हुआ अहसास


    कालीकट. केरल के कालीकट में शादी की खरीदारी करने पहुंचा एक परिवार अपने साथ आई 5 साल की एक बच्ची को मॉल में ही भूल गया। इतना ही नहीं, उन्हें देर रात इस बात की खबर भी नहीं लगीं। मॉल बंद करते वक्त सिक्योरिटी गार्ड्स की नजर बच्ची पर पड़ी। तब गार्ड्स ने बच्ची से पूछताछ की। बच्ची सिर्फ अपना और अपने स्कूल का ही नाम बता पाई। यहीं से पुलिस को बच्ची के घर का पता चला और वो अपने घर तक पहुंच सकी।

    मॉल में भूल गए बच्ची
    - मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कालीकट में रहने वाला एक परिवार शादी की शॉपिंग के लिए मॉल गया था। परिवार के साथ 8 बच्चे थे, जिनमें से वो 5 साल की एक बच्ची को मॉल में ही भूल गए।
    - इस बच्ची के पिता विदेश में रहते हैं और वहीं उसकी मां परिवार के साथ शॉपिंग करने गई नहीं थी। बच्ची अपने चाचा और फैमिली के साथ गई थी, जिन्हें देर रात घर लौटने तक उसके खोने का पता ही नहीं चला।
    - घर पहुंचने पर जब उन्हें बच्ची के लापता होने का अहसास हुआ तो घर में हड़कंप मच गया। फिर परिवार ने बच्ची को ढंढने की काफी कोशिश की लेकिन कुछ पता नहीं चला।

    ऐसे पहुंचे अपने घर
    - इधर, सिक्युरिटी अफसर जब मॉल बंद कर रहे थे तब उनकी नजर इस बच्ची पर पड़ी। उन्होंने मॉल के अफसरों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद उन्होंने बच्ची को घर पहुंचाने के लिए पुलिस से कॉन्टैक्ट किया।
    - इसके बाद पुलिस बच्ची के नाम और उसके स्कूल के नाम के आधार पर उसके स्कूल पहुंची, जहां उन्होंने उसका एड्रेस और कॉन्टैक्ट नंबर जुटाया। इसके बाद पुलिस ने उसके परिवार से संपर्क किया।
    - इसके बाद पुलिस ने परिवारवालों को बच्ची की जानकारी देते हुए मॉल बुलाया, जिसके बाद रात करीब 2 बजे बच्ची अपने परिवार को पास वापस जा सकी।



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    Family Forgot 5 Year Old girl In Shopping Mall of Calicut

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    230 सीटों पर मतगणना: रुझानों में भाजपा-कांग्रेस 100 के पार लेकिन दोनों बहुमत से दूर


    भोपाल. मध्यप्रदेश में230 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है। कांग्रेस 115 और भाजपा105 सीटों पर आगे चल रही हैं। भाजपा को मालवा-निमाड़, विंध्य, महाकौशल में नुकसान उठाना पड़ा।पिछले 13 साल से शिवराज सिंह चौहान सत्ता में हैं। उधर, 15 साल बाद कांग्रेस राज्य में वापसी का इंतजार कर रही है। शिवराज ने दावा किया था कि वे सबसे बड़े सर्वेयर हैं और वे जानते हैं कि भाजपा ही जीतेगी।राज्य के 8 एग्जिट पोल्स में से 5 सर्वे में कांग्रेस को आगे दिखाया गया था।

    अपडेट्स

    • पांच राउंड की मतगणना के बाद बुधनी सीट पर मुख्यमंत्री शिवराजआगे चल रहे हैं।
    • इंदौर-3 सीट से भाजपा महासचिवकैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश औरइंदौर-4 सीट से भाजपा प्रत्याशी मालिनी गौड़ आगे चल रही हैं।
    • दतिया से भाजपा के मंत्री नरोत्तम मिश्रापीछे चल रहे हैं।
    • भोपाल की गोविंदपुरा सीट पर भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर आगे चल रही हैं।
    • भोपाल की दक्षिण-पश्चिम सीट पर मंत्री उमाशंकर गुप्ता आगेचल रहेहैं।
    • भोपाल की हुजूर सीट पर भाजपा के रामेश्वर शर्मा आगे चल रहे हैं।
    • भोपाल मध्य सीट पर भाजपा के सुरेंद्र नाथ सिंह 18 हजार से ज्यादा वोटों से पीछे चल रहे हैं।
    • शिवपुरी सीट से भाजपा की यशोधरा राजे सिंधिया आगे चल रही हैं।
    • बालाघाट से भाजपा के मंत्री गौरीशंकर बिसेन आगे चल रहे हैं।
    • वारासिवनी सीट से सीएम शिवराज के साले संजय सिंह पीछेचल रहे हैं।
    • राजपुर सीट से सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन पीछे चल रहे हैं। कांग्रेस से बगावत कर सपा से चुनाव लड़ा था।
    • कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- चुनावों में हमसे गलती हुई। कांग्रेस का हमने हल्के में लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भी देश के सबसे बड़े नेता हैं। कांग्रेस की जीत को राहुल गांधी का मैजिक नहीं कहा जा सकता।
    • ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा- जो भी निर्णय रहा हो, उसे शीश पर लगाते हुए प्रदेश की जनता और 5 करोड़ मतदाताओं को धन्यवाद देता हूं।
    • मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतगणना के दौरान 11 ईवीएम खराब हुईं। इन पर बाद में फैसला लिया जाएगा।
    • भाजपा के बागी रामकृष्ण कुसमरिया ने दमोह-पथरिया से चुनाव लड़ा था, दोनों सीटों से पीछे चल रहे हैं।
    • शिक्षा मंत्री दीपक जोशी और वित्त जयंत मलैया पीछे चल रहे हैं।
    • भाजपा के बागी सरताज सिंह होशंगाबाद सीट से पीछे चल रहे हैं। यहां से भाजपा के सीताशरण शर्मा आगे है।
    • बुरहानपुर से मंत्री अर्चना चिटणिस, निर्दलीय प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह 14 हजार से ज्यादा वोटों से पीछे चल रही हैं।
    • सागर से भाजपा के शैलेंद्र जैन जीते।
    • चुरहट से कांग्रेस के अजय सिंह पीछे चल रहे हैं।
    • ग्वालियर से भाजपा के जयभान सिंह पवैया 5 हजार से ज्यादा वोटों से पीछे चल रहे हैं।

    रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी

    राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर इस बार 75% मतदान हुआ था। राज्य में 61 साल में यह रिकॉर्ड वोटिंग पर्सेंट था। साथ ही, यह 2013 के चुनाव परिणाम से (72.18%) से 2.82 फीसदी ज्यादा रहा। मध्यप्रदेश के 11 जिले ऐसे थे, जहां पिछली बार के मुकाबले तीन फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई। इन 11 जिलों में कुल 47 सीटें हैं। इनमें से भाजपा के पास पिछली बार 37 और कांग्रेस के पास 9 सीटें थीं।

    नजर मालवा-निमाड़ पर :यहां की 29 सीटों पर ज्यादा वोटिंग हुई। ज्यादा वोटिंग वाले 11 जिलों में से 6 जिले मालवा-निमाड़ के थे। इनमें इंदौर, रतलाम, धार, झाबुआ, आलीराजपुर और नीमच शामिल है। इन जिलों में 29 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 25 सीटों पर पिछली बार भाजपा जीती थी और कांग्रेस के पास महज 3 सीटें थीं। राज्य में 2016 में किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर भी मालवा-निमाड़ में ही था।

    शिवराज मप्र में सबसे लंबे समय तक सीएम रहने वाले नेता

    मप्र में भाजपा ने 2003, 2008 और 2013 का चुनाव जीता। शिवराज सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले राज्य के इकलौते और देशभर में भाजपा के दूसरे नेता हैं। मप्र में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह 10 साल सीएम रहे। भाजपा के मुख्यमंत्रियों के लिहाज से देश में सिर्फ छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह उनसे आगे हैं।

    भाजपा राज्य में लगातार 15 साल सरकार चलने वाली पहली पार्टी है। 1956 में अलग राज्य बनने के 11 साल बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली। लेकिन सिर्फ चार महीने बाद ही पार्टी में टूट के कारण उसे दो साल तक सत्ता से बाहर रहना पड़ा था।

    भाजपा युग : अब तक तीन मुख्यमंत्री बदले गए

    2003 में उमा भारती के नेतृत्व में लड़े गए चुनाव में भाजपा ने 10 साल से मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को सत्ता से बेदखल कर दिया। भाजपा के 15 साल में उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह सीएम रहे।

    कांग्रेस युग : पार्टी ने 10 मुख्यमंत्री दिए

    कांग्रेस ने 32 साल के शासन में 10 मुख्यमंत्री दिए, जिन्होंने 19 बार पद संभाला। कांग्रेस के सिर्फ दो मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू और दिग्विजय सिंह टर्म पूरा कर सके। दिग्विजय ने दो कार्यकाल पूरे किए।

    3 मुद्दों की वजह से चर्चा में रहा चुनाव

    1. व्यापमं घोटाला : इसे लेकर शिवराज सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे।
    2. किसान आंदोलन : पिछले साल जून में मंदसौर में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर हुई गोलीबारी में 6 की मौत हो गई थी। राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी नेताओं ने प्रदेश का दौरा कर शिवराज सरकार को किसान विरोधी करार दिया।
    3. टेम्पल रन : राज्य की 109 सीटों पर 8 धर्मस्थलों का प्रभाव है। इसके लिए नेताओं ने मंदिरों की यात्राएं कीं। अमित शाह उज्जैन के महाकाल मंदिर गए। राहुल ने चित्रकूट में कामतानाथ मंदिर में मत्था टेका।

    मंदिर का कितनी सीटों पर असर

    महाकाल दरबार- 33

    सलकनपुर मंदिर- 9

    पीतांबरा पीठ- 28

    मैहर, कामतानाथ, राम वन गमन पथ- 28

    रामराजा दरबार- 11

    असर वाली कुल सीटें- 109



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    MP Election Result Live: रुझानों में भाजपा 109 और कांग्रेस 108 सीटों पर आगे
    MP Election Result Live: रुझानों में भाजपा 109 और कांग्रेस 108 सीटों पर आगे

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    Q&A: राजस्थान, छत्तीसगढ़ में भाजपा से मुक्ति


    नवनीत गुर्जर. अप्रत्याशित तौर पर छत्तीसगढ़ और राजस्थान अब भाजपा से मुक्त हो चुके लग रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कांग्रेस मुक्त भारत का नारा इन दो राज्यों में उल्टा पड़ गया। रुझानों से राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनना निश्चित हो गया है। मध्यप्रदेश में जीत बॉर्डर पर दिख रही है, कभी कांग्रेस आगे हो जाती है, कभी भाजपा। लगता है मप्र में कांग्रेस जीत भी तो गुजरात की तरह जीतेगी। इस जीत-हार को प्रश्न-उत्तर में समझिए।

    प्रश्न : ये क्यों हुआ?
    उत्तर : सरकार से नाराजगी।

    प्रश्न : कैसे?
    उत्तर : इसे ऐसे देख सकते हैं कि तीनों राज्यों में अन्य दलों को 4 से 7 के बीच ही सीटें मिलती रही हैं। इस बार यह आंकड़ा 15 के करीब जा रहा है।

    प्रश्न : इसका क्या मतलब?
    उत्तर : जैसे छत्तीसगढ़ में जोगी और बसपा का गठबंधन कांग्रेस के ही परंपरागत वोट काटता, यह तय था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार के प्रति नाराजगी इतनी ज्यादा थी कि लोगों ने भाजपा को वोट नहीं दिया, जहां जो विकल्प दिखा, वहां वोट दिया। जोगी-बसपा ने भी भाजपा से नाराज वोट हासिल किए।

    प्रश्न : मतलब कांग्रेस को वोट देना मजबूरी थी?
    उत्तर : बिल्कुल। लोग सरकार से नाराज थे। जहां कांग्रेस मजबूत दिखी, उसे वोट दे दिया। छत्तीसगढ़ में जोगी-बसपा, मध्यप्रदेश में बसपा और राजस्थान में अन्य को भी वोट दे दिया, पर भाजपा को नहीं। फिर भी केवल मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां भाजपा कांटे की टक्कर दे रही है और सरकार बनाने की स्थिति में भी दिखाई दे रही है।

    राजस्थान में सियासत का खो-खो : रुझानों पर लक्ष्मी प्रसाद पंत का एनालिसिस

    • खो-खो के खेल में खिलाड़ी बारी-बारी से जगह बदलते हैं। राजस्थान में भी हर पांच साल में सत्ता बदलती है। एक बार भाजपा आती है, एक बार कांग्रेस। सियासत का राजस्थान में यही खेल है। रुझानों में कांग्रेस 100 सीटों के करीब पहुंच गई है। 2013 में उसे महज 21 सीटें मिली थीं। ये रुझान और ये संकेत साफ बता रहे हैं और कांग्रेस सरकार बनाने की तैयारी में है।
    • कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी जीत यही है कि इन नतीजों ने प्राणविहीन पार्टी में प्राण फूंक दिए हैं और उसकी भाग्य रेखा खुल गई है। अब नजर इस पर है मुख्यमंत्री कौन बनेगा? सचिन पायलट साढ़े चार साल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। उन्होंने पिछले उपचुनावों में कांग्रेस को जीत दिलाई है। वे सीएम बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। लेकिन कांग्रेस में आलाकमान में ही सारी चीजें तय करता है।

    सत्ता विरोधी लहर का आकलन नहीं कर पाई भाजपा : मध्यप्रदेश के रुझानों पर शिव कुमार विवेक का एनालिसिस

    • मध्यप्रदेश में पल पल बदलते रुझानों में अभी यह कहना कठिन है कि कौन बाजी मारेगा। कई सीटों पर उलटफेर हो रहा है। कुछ सीटों पर मामूली अंतर से बढ़त दिख रही है जो कभी भी पलट भी सकती है। भाजपा के कई मंत्री या तो पीछे चल रहे हैं या आगे आने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। रामपाल सिंह, नरोत्तम मिश्रा, दीपक जोशी, रुस्तम सिंह, लालसिंह आर्य व बालकृष्ण पाटीदार पीछे चल रहे हैं तो जयंत मलैया, व भूपेंद्र सिंह पीछे होने के बाद बमुश्किल मामूली अंतर से आगे आ गए हैं।
    • इधर बड़े नेताओं के रिश्तेदार भी पीछे चल रहे है जिसका अर्थ है कि मतदाता ने नए चेहरों को तरजीह दी है। इसी तरह कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश चार राउंड के बाद अब आगे आ गए हैं जबकि गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित पीछे हैं। विदिशा जैसे पुराने किले को कांग्रेस ने भेद दिया है वहीं जयभान सिंह पवैया जैसा नेता पिछड़ रहा है तो साफ है कि भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर का अपने उम्मीदवारों के संदर्भ में ठीक से आकलन नहीं किया था।
    • कांग्रेस सभी इलाकों में भाजपा से कमतर प्रदर्शन नहीं कर रही है। चंबल-ग्वालियर, विंध्य व महाकौशल में उसके बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद पहले ही थी, लेकिन वह मालवा व बुंदेलखंड में भी भाजपा को पीछे धकेल रही है। किसान आंदोलन के गढ़ मंदसौर-नीमच की सीटों पर भाजपा की पकड़ कायम है। मंदसौर, नीमच व मनासा में भाजपा आगे है।
    • ग्वालियर-चंबल ने भाजपा को करारा झटका दिया है। दलित-सवर्ण आंदोलन का सबसे ज्यादा असर यहीं पड़ा था। शिवपुरी जिले में जहां 5 में से 4 सीटें कांग्रेस को जा रही हैं तो भिंड की पांच में एक सीट भी भाजपा को हासिल नहीं हो रही है। वहीं, दतिया की तीनों सीटें कांग्रेस का जा रही हैं।



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    Election Result 2018 Analysis LIVE: Vidhan Sabha Chunav Result Analysis LIVE, BJP vs Congress

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    कांग्रेस को झटका : यहां प्रदेश के CM ही नहीं बचा पाए अपनी सीट, दो जगहों से चुनाव लड़े और दोनों पर हार


    नेशनल डेस्क. पांच राज्यों में विधानसभा मतगणना के बीच मिजोरम की तस्वीर साफ होती दिख रही है। यहां रुझानों के मुताबिक यहां सत्ता परिवर्तन हो रहा है। MNF जबरदस्त बहुमत के साथ सरकार बनाती दिख रही है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री पी.लल थनहवला सेरछिप्प और चम्फाई सीट दोनों सीटों से चुनाव हार गए हैं। मिजोरम में 10 साल बाद फिर से MNF सत्ता पर काबिज होने जा रही है।

    मिजोरम: मुकाबला कांग्रेस और एमएनएफ के बीच

    मिजोरम 1987 में देश का 23वां राज्य बना। तब से यहां मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) या कांग्रेस की सरकार है। इस बार भी यहां मुकाबला कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी एमएनएफ है। लेकिन भाजपा ने भी यहां ताल ठोंकी। इसकी प्रमुख वजह ये है कि मिजोरम विधानसभा अध्यक्ष समेत कई कांग्रेसी विधायक चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो चुके हैं। हाल ही में सीट बदलने को लेकर नाराज विधानसभा अध्यक्ष हिपेई भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं, सितंबर से कांग्रेस के पांच विधायक पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं।

    कांग्रेस की कमान सीएम लल थनहवला के पास
    कांग्रेस ने तीन बार के मुख्यमंत्री लल थनहवला के हाथों कमान सौंपी। थनहवला 1989-1998 और 2008 से अब तक मुख्यमंत्री हैं। वे इस बार सेरछिप्प और चम्फाई सीट से चुनाव लड़े थे। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां 34 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, एमएनएफ को 5 और मिजो पीपुल्स पार्टी को 1 सीट से संतोष करना पड़ा था।



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    Mizoram Election Results 2018 Regional MNF Leaves Congress Behind Chief Minister Loses Both seats

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    फोन में डाउनलोड कर लें ये ऐप, बिजली गिरने से 40 मिनट पहले आपको कर देगा अलर्ट


    न्यूज डेस्क। केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने ऐसा एप डेवलप किया है, जो बिजली गिरने की चेतावनी 30 से 40 मिनट पहले दे देगा। इसका नाम दामिनी रखा गया है। यह एप बिजली गिरने की समयपूर्व चेतावनी देने के साथ इसके बचाव की भी जानकारी देता है। इसे गूगल प्ले स्टोर से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। वीडियो में देखिए इस ऐप की खासियत।



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    App will alert you 40 minutes before the lightning falls

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    स्कूल में एग्जाम देने के बाद पुलिस थाने जाने की जिद करने लगी बच्ची, मां के समझाने पर नहीं मानी, खाना-पीना तक छोड़ा


    वेल्लूर. तमिलनाडु के वेल्लूर में सात साल की एक बच्ची ने अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उसने अपने पिता पर वादा पूरा न करने का आरोप लगाया है। पिता ने उससे वादा किया था कि अगर मैं क्लास में फर्स्ट आउंगी तो वो घर में टॉयलेट बनवा देंगे लेकिन हर साल फर्स्ट आने के बाद भी उन्होंने अपना वादा अब तक नहीं निभाया है।

    पिता के खिलाफ थाने पहुंची बेटी
    - मामला वेल्लूर जिले के अंबुर इलाके का है। यहां सेकंड क्लास में पढ़ने वाली ई हनीफा जरा ने कहा कि मुझे घर बाहर टॉयलेट जाने में शर्म आती है लेकिन मेरे पापा ने टॉयलेट नहीं बनवा रहे।
    - बच्ची ने कहा कि जब मैं एलकेजी में थी तब मैंने पापा से घर में टॉयलेट बनवाने को कहा था। तब पापा ने कहा था कि अगर मैं क्लास में फर्स्ट आउंगी तो वो टॉयलेट बनवा देंगे।
    - हनीफा ने कहा कि मैंने खून मेहनत से पढ़ाई की और हर क्लास में फर्स्ट आ रही हूं लेकिन इसके बाद भी दो साल से पापा अपना वादा पूरा नहीं कर रहे हैं। इसी वजह से मैं शिकायत करने आई हूं।
    - हनीफा ने थाने में लिखित शिकायत देते हुए कहा कि उसके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज किया जाए और उन्हें अरेस्ट किया जाए।
    - अंबुर थाने की सब इंस्पेक्टर ए वालरमती ने कहा कि बच्ची बहुत होनहार है। उसे एजुकेशनल एक्टिविटीज में बीस से ज्यादा मेडल और सर्टिफिकेट मिल चुके हैं।
    - वालरमती ने कहा कि बच्ची की शिकायत के बाद मैंने तत्काल सैनिटरी अफसर को फोन कर बच्ची के घर पर टायलेट बनवाने में मदद करने के लिए कहा है।

    समझाने पर भी नहीं मानी बेटी
    - हनीफा की मां मेहरीन के मुताबिक, उसकी बेटी का हाफ ईयरली एग्जाम चल रहा है। एग्जाम देने के बाद वो थाने जाने की जिद करने लगी। उसे पिता की आर्थिक स्थिति के बारे में काफी समझाया गया लेकिन वो नहीं मानी। रविवार की रात से उसने खाना भी नहीं खाया है और सिर्फ एक ही जिद लगा रखी थी।


    पिता को लगा झटका
    - हनीफा जारा के पिता इसानुल्ला को जब पुलिस थाने से फोन गया तो एक बार के लिए तो वो घबरा गए थे और तुरंत थाने पहुंचे, जहां उन्हें अपनी बेटी और पत्नी बैठी मिलीं।
    - उन्होंने बताया कि उन्हें थाने आने के लिए कहा गया था लेकिन जब वहां पत्नी और बेटी को देखा तो मुझे कुछ समझ नहीं आया। बाद में पुलिसवालों ने पूरा मामला बताया और किसी तरह बेटी को घर जाने के लिए राजी कराया।



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    second Class student files police complaint against father

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    बच्चों को स्कूल छोड़कर लौट रही थी महिला, तभी पड़ोसी के गेट पर छिपे बैठे थे बदमाश, दिनदहाड़े महिला पर भी चलाई गोलियां


    नई दिल्ली. साउथ वेस्ट दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में एक महिला पर कुछ बदमाशों ने सुबह गोली चला दी। गोली महिला के कंधे में लगी, जिससे वो घायल हो गई। महिला पर हमला उसके घर के पास ही किया गया और उस पर तीन गोली चलाई गई। महिला पति से मनमुटाव के चलते अपने पिता के घर पर रह रही थी। उसने फायरिंग का शक भी अपने पति पर जताया है।

    पति पर हमले का शक
    - मामला वसंत कुंज थाना इलाके में आने वाले महिपालपुर का है। पीड़ित कविता के पिता अतर सिंह ने बताया कि महिला अपने बच्चों को स्कूल छोड़कर आ रही थी, तभी पड़ोसी के गेट के पीछे छिपकर बैठे बदमाशों ने उस पर फायरिंग कर दी।
    - बदमाशों ने कविता को धमकाते हुए तीन गोलियां चलाई लेकिन दो मिस हो गईं। हालांकि, तीसरी गोली महिला के कंधे और सीने के बीच पर जाकर लगी।
    - ये गोली देसी पिस्टल से चलाई गई थी। हमले को अंजाम देने के बाद हमलावर बाइक पर सवार होकर मौके से फरार हो गए। वहीं कविता को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया।
    - पड़ोसियों का कहना है कि गोली की आवाज सुनकर आस-पास के कई लोग बाहर आए लेकिन उनके हाथों में पिस्तौल और चाकू था और वो सबको धमकाने लगे, जिससे लोग डर गए।
    - कविता के पिता का कहना है कि जबसे उनकी बेटी पति रितेश से मनमुटाव के चलते मायके में रह रहती थी, तब से रितेश उसे गोली मारने की धमकी दे रहा था।
    - उन्होंने बताया कि इस बात की शिकायत उन्होंने दो हफ्ते पहले जाट पंचायत में भी की थी, जिसने पुलिस में मामला दर्ज करने की सलाह दी थी और रितेश के परिवार को भी वॉर्निंग दी थी।
    - अतर सिंह के मुताबिक, इसके बाद भी रितेश में कोई सुधार नहीं आया था और उसका धमकाने का सिलसिला और बढ़ गया था। वो कविता को पिस्टल और गन के फोटो फेसबुक पर भेजकर धमकी देता था।

    नशे की लत के चलते बिगड़े रिश्ते
    - पेशे से प्रॉपर्टी डीलर रितेश गुड़गांव के इस्लामपुर का रहने वाला है। 2010 में कविता की उसके साथ शादी हुई थी और इनके दो बच्चे हैं। पिछले दो साल से वो ड्रग्स की चपेट में है और इनकी शादी खतरे में पड़ गई है। कविता ने रितेश पर रोज रात को नशे की हालत में आने और उसे टॉर्चर करने का आरोप लगाया था। पति की आदतों से परेशान होकर वो पिछले साल अपने दोनों बच्चों के साथ महिपालपुर में अपने पिता के घर आ गई थी और यहीं पर अपने बच्चों का स्कूल में नाम लिखवा दिया था।



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    Firing on woman at mahipalpur Delhi
    Firing on woman at mahipalpur Delhi

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    सेंसेक्स में 500 अंक की गिरावट, डॉलर के मुकाबले रुपया 72.44 तक फिसला


    मुंबई. शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट आई। सेंसेक्स 500 अंक गिरकर 34,452 पर पहुंच गया। निफ्टी में 145 प्वाइंट की गिरावट दर्ज की गई। उधर, डॉलर के मुकाबले रुपया 112 पैसे गिरकर 72.44 के स्तर पर पहुंच गया। विश्लेषकों के मुताबिककमजोर विदेशी संकेतों, 5 राज्यों के चुनावी नतीजों और आरबीआई गवर्नर के इस्तीफे का असर शेयर और करंसी बाजार पर पड़ा है।

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज के हेड (पीसीजी और कैपिटल मार्केट्स स्ट्रैटजी) वी के शर्मा के मुताबिक बाजार में पहले से ही गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है। तीन प्रमुख राज्यों में कांग्रेस को बढ़त मिलने से गिरावट तेज हो गई। अगर तीन में से एक राज्य में भी भाजपा के पक्ष में आंकड़े आएतो बाजार निचले स्तरों से उबर सकता है।



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    Stock market update: Sensex drop 500 points in early trade

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    पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य सुरजीत भल्ला ने इस्तीफा दिया


    नई दिल्ली. अर्थशास्त्री और कॉलमनिस्ट सुरजीत भल्ला ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) से इस्तीफा दे दिया है। वो इस परिषद में अल्पकालिक सदस्य थे। भल्ला ने मंगलावर को ट्विटर के जरिए इस्तीफे की सूचना दी। इसके मुताबिक भल्ला ने 1 दिसंबर को ही इस्तीफा दे दिया था।हालांकि, उन्होंने इस्तीफे की वजह नहीं बताई है।

    नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय ईएसी-पीएम के अध्यक्ष हैं। इसमें अर्थशास्त्री रथिन रॉय, आशिमा गोयल और शमिका रवि अल्पकालिक सदस्य के तौर पर शामिल हैं।



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    Eminent economist Surjit Bhalla resigns from EAC-PM

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    5 राज्यों की 679 विधानसभा सीटों पर मतगणना शुरू, इनमें से अभी 382 सीटें भाजपा के पास


    नेशनल डेस्क, नई दिल्ली. मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना अौर मिजोरम के विधानसभा चुनाव की मतगणना शुरू हो गई है। मध्यप्रदेश के आठ एग्जिट पोल्स में से पांच सर्वे में कांग्रेस को आगे दिखाया गया था। वहीं, राजस्थान के सात एग्जिट पोल्स में कांग्रेस को आगे दिखाया गया था। छत्तीसगढ़ में पांच एग्जिट पोल्स में कांग्रेस और तीन में भाजपा के आगे रहने का अनुमान जताया गया था। पांचों राज्यों में कुल 679 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 56% यानी 382 सीटें भाजपा के पास हैं।

    तीन प्रमुख राज्यों में पिछली बार कौन जीता?

    दल (मप्र) (छत्तीसगढ़) (राजस्थान)

    भाजपा (165) (49) (163)

    कांग्रेस (58) (39) (21)

    बसपा (4) (1) (13)

    अन्य (3) (1) (13)

    कुल सीटें (230) (90) (200)

    5 चुनावी राज्यों में अभी किसकी सरकार

    मध्यप्रदेश- भाजपा, छत्तीसगढ़- भाजपा, राजस्थान- भाजपा, तेलंगाना- टीआरएस, मिजोरम- कांग्रेस

    पांचों राज्यों के नतीजों के क्या होंगे मायने?

    मध्यप्रदेश : भाजपा जीती तो लगातार चौथा चुनाव जीतेगी। 13 साल से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व पर एक बार फिर मुहर लगेगी। भाजपा हारी तो कांग्रेस 15 साल बाद वापसी करेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया में से कोई से एक सीएम बनेगा।

    राजस्थान : भाजपा जीती तो पिछले पांच चुनाव से हर बार सरकार बदल जाने का 25 साल का सिलसिला टूटेगा। भैरोसिंह शेखावत (1990 और 1993) के बाद ऐसा दूसरी बार होगा जब भाजपा सत्ता बचाए रखेगी। कांग्रेस जीती तो हर बार सत्ता बदल जाने का ट्रेंड कायम रहेगा। अशोक गहलोत और सचिन पायलट सीएम बनने के दावेदार रहेंगे।

    छत्तीसगढ़ : कांग्रेस जीती तो राज्य में पहला चुनाव जीतेगी। बसपा की मदद से जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जीती तो अजीत जोगी दूसरी बार सीएम बन सकते हैं। वहीं भाजपा जीती तो लगातार चौथा चुनाव जीतेगी। 15 साल से सीएम डॉ. रमन सिंह फिर शपथ लेंगे।

    तेलंगाना : टीआरएस जीती तो लगातार दूसरी बार के. चंद्रशेखर राव सीएम बनेंगे। उनकी पार्टी को सीटें कम मिलने पर राज्य में पहली बार गठबंधन सरकार बनेगी। भाजपा जीती तो राज्य में उसकी पहली सरकार होगी। वहीं, कांग्रेस-टीडीपी को जीत मिली तो इस गठबंधन की भी राज्य में पहली सरकार होगी।

    मिजोरम : कांग्रेस जीती तो पूर्वोत्तर में अपनी सत्ता वाला इकलौता राज्य बचा लेगी। भाजपा जीती तो पूर्वोत्तर का आखिरी गढ़ भी वह कांग्रेस से छीन लेगी।

    मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा का कैसा प्रदर्शन रहा?

    #2014 में मोदी के पीएम बनने के बाद 22 राज्यों में चुनाव हुए। भाजपा ने 13 राज्यों में सरकार बनाई। वह अभी 18 राज्यों में सत्ता में है।

    #मई 2014 में जब मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तब भाजपा या एनडीए की सिर्फ आठ राज्यों में और कांग्रेस की 14 राज्यों में सरकार थी।

    #मोदी के प्रधानमंत्री बनने के वक्त मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गोवा और गुजरात में पहले से भाजपा सरकार थी। आंध्र में उसकी तेदेपा के साथ, पंजाब में अकाली दल और नगालैंड में एनपीएफ के साथ गठबंधन सरकार थी।

    #यहां भाजपा ने चुनाव जीतकर सरकार बनाई : महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, असम, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, हिमाचल, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय। गोवा, गुजरात में सत्ता बनाए रखी।

    #यहां सत्ता हासिल की : अरुणाचल प्रदेश में समीकरण बदले तो भाजपा ने सरकार बनाई। वहीं, बिहार में भाजपा 2015 मंे हार गई थी। लेकिन डेढ़ साल बाद उसका जदयू से गठबंधन हुआ और सत्ता में आई।

    #जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भंग : राज्य में भाजपा-पीडीपी की गठबंधन सरकार थी। पीडीपी ने भाजपा से समर्थन वापस लिया। हाल ही में यहा राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग कर दी।

    #कांग्रेस अभी चार राज्यों- पंजाब, मिजोरम, पुड्डूचेरी और कर्नाटक में सत्ता में है। इनमें से कर्नाटक में उसका जेडीएस के साथ गठजोड़ है। दिल्ली समेत बाकी नौ राज्यों में दूसरे दलों की सरकार है।

    #जीडीपी और आबादी के लिहाज से अभी 68% आबादी और 59% इकोनॉमी वाले राज्यों में भाजपा की सरकार।

    किस दल की कहां सरकार?

    भाजपा : महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, असम, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा, गुजरात, हिमाचल, त्रिपुरा, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़

    कांग्रेस : पंजाब, पुड्डूचेरी, मिजोरम, कर्नाटक

    अन्य राज्य : दिल्ली- आप, केरल- सीपीएम, ओडिशा- बीजद, तमिलनाडु- अन्नाद्रमुक, आंध्रप्रदेश- तेदपा, जम्मू-कश्मीर- राष्ट्रपति शासन, तेलंगाना- टीआरएस, बंगाल- तृणमूल, सिक्किम - एसडीएफ।

    2019 में लोकसभा चुनाव के अलावा 6 राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव

    राज्य कब तक कार्यकाल

    सिक्किम 27 मई 2019

    अरुणाचल प्रदेश 01 जून 2019

    ओडिशा 11 जून 2019

    आंध्रप्रदेश 18 जून 2019

    हरियाणा 02 नवंबर 2019

    महाराष्ट्र 09 नवंबर 2019



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    Election Result 2018 : MP, Chhattisgarh, Rajasthan, Telangana & Mizoram

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    चीन से आने वाले पोस्टल गिफ्ट की सीमा तय कर सकती है सरकार


    नई दिल्ली. केंद्र सरकार चीन से आने वाले पोस्टल गिफ्ट की संख्या तय कर सकती है। घरेलू कंपनियों ने चीन की ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर से भारत आने वाले ऐसे कन्साइनमेंट की संख्या बढ़ने पर चिंता जताई है। एक अधिकारी ने सोमवार को बताया, 'वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों की हाल में हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। हमने प्रति व्यक्ति द्वारा एक साल में अधिकतम चार ऐसे पोस्टल गिफ्ट स्वीकार करने की अनुमति देने का सुझाव दिया है। हमने जरूरी दवाओं को इस सीमा के दायरे से बाहर रखा है। इस पर अंतिम फैसला कस्टम विभाग को करना है।'

    चीन की ई-कॉमर्स कंपनियों पर भारतीय कानून के उल्लंघन का आरोप

    हाल में यह मामला स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने उठाया था। इसका दावा है कि चीन की ई-कॉमर्स कंपनियों को भारतीय यूजर्स से रोजाना 2 लाख से ज्यादा ऑर्डर मिल रहे हैं। वो कूरियर-पोस्टल गिफ्ट्स के जरिए अपने प्रोडक्ट्स की भारत में डिलीवरी कर रही हैं। ऐसा कर वह पेमेंट गेटवे, कस्टम ड्यूटी और जीएसटी से जुड़े भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर टैक्स की चोरी भी कर रही हैं। इससे घरेलू माइक्रो, छोटे और मध्यम आकार के उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र पर बुरा असर पड़ रहा है।

    एसजेएम के राष्ट्रीय संयोजक अश्विनी महाजन के मुताबिक शीइन, अलीएक्सप्रेस और क्लब फैक्ट्री जैसी चीन की ई-कॉमर्स कंपनियां भारत के फॉरेन ट्रेड (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट का गलत फायदा उठा रही हैं। इस कानून के तहत विदेश से भारत में लोगों को 5,000 रुपए कीमत तक के तोहफे भेजने पर कस्टम और अन्य शुल्क नहीं लगते हैं। जीएसटी भी नहीं देना पड़ता है। एसजेएम का कहना है कि चीन का पोस्टल विभाग अपने यहां के छोटे उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भारत में भेजे जा रहे प्रोडक्ट्स पर भारी छूट दे रहा है। ताकि उनकी डिलीवरी लागत कम से कम आए।


    भारत में रजिस्टर्ड नहीं हैं वेबसाइट्स
    चीन की ये ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में व्यापार इकाइयों की श्रेणी में रजिस्टर्ड नहीं हैं। इसलिए शिकायत दर्ज कराने और सामान को रिटर्न करने की प्रक्रिया काफी जटिल है। एसजेएम ने आशंका जताई है कि चीन की ये ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में खतरनाक, प्रतिबंधित, असुरक्षित और घटिया क्वालिटी का माल पहुंचा रही हैं।

    कस्टम ड्यूटी लगाने की मांग

    • चीन से भारत आने वाले ऐसे सभी प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी लगाई जाए।
    • ऐसा नहीं होने तक इन पोस्टल गिफ्ट के शिपमेंट को प्रतिबंधित कर दिया जाए।
    • भारत में अनरजिस्टर्ड चीनी कंपनियों के एप डाउनलोड पर रोक लगे।
    • इनके पेमेंट गेटवे को बंद कर दिया जाए। ताकि ऐसे लेनदेन पर रोक लग सके।


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    Govt mulls to cap number of postal gifts coming from China

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    प्रेग्नेंसी में दिक्कत आने पर छुट्टी मांगी तो नौकरी से निकाल दिया


    नोएडा.सेक्टर-11 स्थित कार की डीलरशिप एजेंसी में कार्यरत एक युवती के मैटरनिटी लीव मांगने पर उसे नौकरी से निकाले जाने का आरोप है। युवती को एजेंसी में दूसरी बार नौकरी के लिए 11 जून 2018 को ही रखा गया था। युवती का कहना है कि वह 2015 से 2016 तक इसी एजेंसी में नौकरी करती थी लेकिन शादी के दौरान छोड़ दी थी। इस साल एजेंसी से ऑफर मिला तो फिर से नौकरी करने लगी थी।

    मोनिका रावत ने बताया कि पिछले महीने से ही उन्हें प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ रही थी। इसे लेकर वह ईएसआई में जांच करा रहीं थीं। ईएसआई ने उन्हें एम्स रेफर कर दिया था,जिसकी जानकारीऑफिस में भी दी थी। इसके बाद 5 दिसंबर को उन्होंने कंपनी के एचआर मैनेजर को बतायाकि वह 11 जनवरी से मैटरनिटी लीव पर चली जाएंगी। उनका काम प्रभावित न हो, इसलिए एक महिला कर्मचारी को अपने काम के बारे में भी बता दिया था। इसके बाद एजेंसी मैनेजर ने 7 दिसंबर को सैलरी का चेक लेने के लिए बुलाया और फिर नौकरी से निकाल दिया। एजेंसी की तरफ से कोई नोटिस भी नहीं दिया गया।

    मोनिका 6 महीनेकेप्रोबेशन पीरियड पर थीं। इसी बीच उन्होंने 35 से ज्यादा छुट्‌टी ली थी। ज्यादातर छुट्‌टी अचानक ली थीं। प्रोबेशन पीरियड में कभी भी किसी को हटाने का कॉन्ट्रैक्ट होता है। बुधवार को बात करने के लिए मोनिका को बुलाया गया है। - एचआर टीम, डीलरशिप एजेंसी, सेक्टर-11

    ट्वीट के जरिए मिली शिकायत के आधार पर जांच हो रही है। कंपनी के मैनेजर से पूछताछ की गई है। श्रम विभाग से मिलकर कंपनी के नियम और शर्तों का अध्ययन किया जा रहा है। नियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।-पंकज पंत, प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली सेक्टर-24



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    woman out of job Due to Maternity Leave

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    1996 में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी, क्षेत्रीय दलों के दबदबे की शुरुआत भी यहीं से


    भास्कर न्यूज नेटवर्क.1991 में प्रधानमंत्री बने नरसिंह राव गैर नेहरू-गांधी परिवार के पहले व्यक्ति रहे, जिसने सत्ता में पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। हालांकि, सत्ता में आने के बाद से ही राजनीति के अपराधीकरण पर वोहरा रिपोर्ट, जैन हवाला कांड और तंदूर हत्याकांड जैसे मामलों से सरकार विवादों में आ गई थी। प्रधानमंत्री तक पर आरोप लगे। सात मंत्रियों के इस्तीफे हुए। 1996 के लोकसभा चुनाव आते-आते राव और कांग्रेस अपना तेज खोते गए।

    चुनाव से पूर्व कई नेताओं ने कांग्रेस से अलग होकर पार्टियां बनाईं। इनमें- एनडी तिवारी की ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी), माधवराव सिंधिया की मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस, जीके मूपनार की तमिल मनीला कांग्रेस शामिल थीं। भ्रष्टाचार मुद्दा बना और कांग्रेस हार गई। 161 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। पहली बार लोकसभा में उसे कांग्रेस से ज्यादा सीटें भी मिलीं। अटल बिहारी वाजपेयी 13 दिन तक प्रधानमंत्री रहे, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

    दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को 140 सीटें मिलीं, लेकिन उसने सरकार न बनाने का निर्णय लिया। हरकिशन सिंह सुरजीत व वीपी सिंह के प्रयासों से 13 से अधिक दलों के संयुक्त मोर्चा को कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया। चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर के बाद इस बार देवेगौड़ा तीसरे प्रधानमंत्री बने, जिनकी सरकार को कांग्रेस ने समर्थन दिया। हालांकि समर्थन ज्यादा टिक नहीं पाया। कांग्रेस ने बिना किसी ठोस कारण देवेगौड़ा से समर्थन वापस लिया और संयुक्त मोर्चे के ही इंद्रकुमार गुजराल को समर्थन दे दिया।

    राजीव गांधी हत्याकांड पर आई जैन आयोग की रिपोर्ट लीक होने के बाद कांग्रेस ने गुजराल से भी समर्थन ले लिया। इस तरह 1998 में देश में एक बार फिर मध्यावधि चुनाव हुए। 1996 के लोकसभा चुनावों में 8 राष्ट्रीय दल, 30 राज्य स्तरीय दल सहित 171 रजिस्टर्ड पार्टियां चुनाव लड़ीं। यानी पहली बार 200 से ज्यादा पार्टियां चुनावी मैदान में थीं। कुल 13,952 प्रत्याशी मैदान में थे। पहली बार उम्मीदवारों की संख्या 10 हजार के पार पहुंची थी। लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों के दबदबे की शुरुआत भी 1996 से हुई। इस बार क्षेत्रीय पार्टियों को 543 में से 129 सीटें मिलीं।

    आडवाणी की सीट से वाजपेयी लड़े, जीते

    • कांग्रेस से अलग होकर कांग्रेस (तिवारी) पार्टी बनाने वाले दिग्गज नेता तिवारी और अर्जुन सिंह दोनों चुनाव हार गए। तिवारी झांसी से लड़े और पांचवें स्थान पर रहे। वहीं अर्जुन सिंह सतना से हार गए। अर्जुन सिंह को बसपा के सुखलाल कुश्वाह ने हराया। अर्जुन सिंह तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव में तिवारी कांग्रेस के सिर्फ दो सांसद सतपाल महाराज और शीशराम ओला ही जीते।
    • राजीव गांधी हत्याकांड की जांच के लिए स्थापित जैन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस ने इंद्रकुमार गुजराल के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चे की सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की। जैन आयोग की अंतरिम रिपोर्ट लीक होने से इस बात का पता चला था कि डीएमके और इसके नेतृत्व की श्रीलंका के लिट्टे नेता वी. प्रभाकरन को प्रोत्साहन देने में भूमिका थी। हालांकि रिपोर्ट में राजीव गांधी की हत्या के संबंध में डीएमके के किसी भी नेता या किसी भी पार्टी का सीधे नाम नहीं था।
    • लालकृष्ण आडवाणी का नाम हवाला कांड में आने के बाद उन्होंने घोषणा की कि जब तक मैं निर्दोश साबित नहीं होता, तब तक चुनाव नहीं लडूंगा। इसके बाद उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र गांधीनगर से चुनाव नहीं लड़ा। वहां से अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव लड़े। वाजपेयी लखनऊ से भी जीते। बाद में उन्होंने गांधीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया।

    • 1996 में कुल लोकसभा सीटें 543
    • कुल मतदाता59.25 करोड़
    • मतदान प्रतिशत 57.94
    • कांग्रेस ने जीतीं 140 सीटें
    • भारतीय जनता पार्टी को मिलीं 161 सीटें


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    1991 में पार्टी की बैठक में लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी और मुरली मनोहर जोशी (लेफ्ट टू राइट)।

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    सरकार ने 3 बार किया था आरबीआई के सेक्शन-7 का इस्तेमाल, 5 मुद्दों पर था मतभेद


    नई दिल्ली. आरबीआई और सरकार के बीच प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन समेत कई 5 मुद्दों पर विवाद था। सरकार ने अपनी मांगों के लिए आरबीआई एक्ट की धारा-7 का भी इस्तेमाल किया था। सरकार और आरबीआई के बीच विवाद पहली बार नहीं है। बल्कि पहले भी ऐसा होता रहा है। यूपीए सरकार के दौरान पी चिदंबरम और तत्कालीन आरबीआई गर्वनर डी सुब्बाराव के बीच भी मतभेद सामने आए थे। दोनों के बीच ब्याज दरों और कर्ज को लेकर विवाद था।


    उर्जित पटेल के कार्यकाल के दौरान सरकार-आरबीआई के बीच विवाद के मुद्दे

    • आरबीआई ने प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) की रूपरेखा के तहत कुछ नियम तय किए थे। यही सरकार और आरबीआई गवर्नर के बीच विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा था। रिजर्व बैंक ने 12 बैंकों को त्वरित कारवाई की श्रेणी में डाला। ये नया कर्ज नहीं दे सकते, नई ब्रांच नहीं खोल सकते और ना ही डिविडेंड दे सकते हैं।
    • सरकार पीसीए नियमों में ढील चाहती है ताकि कर्ज देना बढ़ सके। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि बैंकों की बैलेंस शीट और ना बिगड़े, इसलिए रोक जरूरी है।
    • अंतर-मंत्रालय समिति ने अलग पेमेंट-सेटलमेंट रेगुलेटर की सिफारिश की। रिजर्व बैंक इसके खिलाफ था। उसका अभी भी यही कहना है कि यह आरबीआई के अधीन हो। इसका प्रमुख आरबीआई गवर्नर ही हो।
    • एनपीए और विल्फुल डिफॉल्टरों पर अंकुश लगाने के लिए आरबीआई ने 12 फरवरी को नियम बदले। कर्ज लौटाने में एक दिन की भी देरी हुई तो डिफॉल्ट मानकर रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरू करनी पड़गी। सरकार ने इसमें ढील देने का आग्रह किया, लेकिन आरबीआई नहीं माना।
    • नीरव मोदी का पीएनबी फ्रॉड सामने आने के बाद सरकार ने रिजर्व बैंक की निगरानी की आलोचना की तो आरबीआई गवर्नर ने ज्यादा अधिकार मांगे ताकि सरकारी बैंकों के खिलाफ कारवाई की जा सके।
    • सरकार रिजर्व बैंक से ज्यादा डिविडेंड चाहती है ताकि अपना घाटा कम कर सके। आरबीआई का कहना है कि सरकार इसकी स्वायत्तता को कम कर रही है। अभी इसकी बैलेंस शीट मजबूत बनाने की जरूरत है।

    आरबीआई-सरकार का विवाद: कब क्या हुआ ?
    8 अगस्त: सरकार ने संघ की विचारधारा वाले एस गरुमूर्ति और स्वदेशी समर्थक सतीश मराठे को आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया।
    सितंबर: सरकार ने आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में शामिल सदस्य नचिकेत मोर का कार्यकाल घटाया।
    10 अक्टूबर: सरकार ने आरबीआई एक्ट की धारा-7 के तहत आरबीआई को 3 पत्र लिखकर अपनी मांगें रखीं।
    23 अक्टूबर: करीब 8 घंटे तक आरबीआई की बोर्ड बैठक हुई, ज्यादातर मुद्दों पर कोई नतीजा नहीं निकला।
    26 अक्टूबर: आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने स्वायत्तता का मुद्दा उठाते हुए सरकार को चेतावनी दी।
    31 अक्टूबर: सरकार ने कहा कि आरबीआई की स्वायत्तता जरूरी है। लेकिन, बेहतर प्रशासन की जरूरत है।


    आरबीआई से पहले भी होता रहा है सरकार का विवाद

    • 2014 से 2016 के बीच मोदी सरकार और रघुराम राजन के बीच ब्याज दरों और राजन के बयानों को लेकर अनबन रही थी।
    • 2008 से 2012 के दौरान यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम और तत्कालीन आरबीआई गर्वनर डी सुब्बाराव के बीच भी मतभेद सामने आए थे। दोनों के बीच ब्याज दरों और कर्ज को लेकर विवाद था।
    • 2004 से 2008 के दौरान पी चिदंबरम और तत्कालीन आरबीआई गवर्नर वाई वी रेड्डी के बीच विदेशी निवेशकों पर टैक्स, ब्याज दरों और निजी बैंकों में एफडीआई के मुद्दे को लेकर विवाद हुआ था।


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    Dispute between government and the RBI is not the first time it has been happening before

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    अलविदा... यादें संजो देश-दुनिया की हस्तियां लेकसिटी से विदा


    उदयपुर.ईशा अंबानी और आनंद पीरामल की प्री वेडिंग समारोह में शामिल होने आए देश दुनिया के उद्योगपति, बॉलीवुड सितारों सहित अंबानी और पीरामल परिवार ने सोमवार को लेकसिटी को अलविदा कहा। डबाेक एयरपोर्ट पर सुबह 5 बजे से चार्टर से मेहमानों के जाने दौर शुरू हुआ, जो मंगलवार अल सुबह तक चलता रहा। डबोक एयरपोर्ट पर सोमवार को 80 चार्टर विमान का आगमन और प्रस्थान हुआ। इसके साथ नियमित 44 फ्लाइट ने भी उड़ान भरी। टाटा समूह की एयरलाइन कंपनी विस्तारा की चार दिन के लिए उदयपुर में स्पेशल फ्लाइट सर्विस सोमवार को अंतिम थी। पिछले 4 दिन में 200 से अधिक चार्टर विमान उदयपुर में उतरे।

    12 दिसंबर को अंबानी के मकान एंटीलियामें शादी

    मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी, पीरामल इंडस्ट्रीज के अजय पीरामल के बेटे आनंद पीरामल की 12 दिसंबर काे अंबानी के मकान एंटीलिया में शादी होगी। सोमवार को मुकेश अंबानी, नीता अंबानी, ईशा अंबानी, कोकिला बेन, अनिल अंबानी, टीना अंबानी, आकाश अंबानी, अनंत अंबानी चार्टर विमान से मुंबई के लिए निकले। पीरामल परिवार के अजय पीरामल, स्वाति पीरामल, आनंद पीरामल भी चार्टर विमान से मुंबई गए। हॉलीवुड सिंगर बियोंसे, आमिर खान और किरण, शाहरुख खान, गौरी, सचिन तेंदुलकर, अंजलि तेंदुलकर भी चार्टर से गए। जहान्वी कपूर, बोनी कपूर, अनिल कपूर, दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, आदित्य राय कपूर, सिद्वार्थ मल्होत्रा ने भी सोमवार को लेकसिटी से विदा ली।

    आर्ट गैलरी में जूही चावला ने निहारी राधा-कृष्ण की तस्वीरें

    सोमवार को 12 बजे के करीब फिल्म अभिनेत्री जूही चावला सहेली मार्ग स्थित बीजी शर्मा आर्ट गैलरी में पहुुंंचीं। यहां मधुसूदन शर्मा, हितेश शर्मा और हर्षवर्धन ने उनका स्वागत किया। गैलरी में लगी बीजी शर्मा की टाॅप पेंटिंग देखी। यहां पर चावला को सबसे अच्छी पेंटिंग राधा-कृष्णा की लगी। वे फतहसागर मार्ग होते हुए होटल पहुंचीं, जहां झील की तारीफ भी की। जूही पहले भी इस आर्ट गैलरी में आ चुकी हैं।

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    मेहमानों को 5 चीजें 1 रुपये में दी
    ईशा अंबानी और आनंद पीरामल के प्री वेडिंग समारोह के मेले में मेहमानों को पांच चीजें 1 रुपये में दी गई। इनमें पर्स, हैंडीक्राफ्ट का सामान, स्टॉल, डेकोरेटिव सामान, वुडन सामान दिया गया। मेले में सूत कातने के लिए एक चरखा भी रखा गया था। एक महिला ने यह चलाकर मेहमानों को लाइव सूत कातने का तरीका बताया।

    हिलेरी काे पंसद आई राजस्थानी पेंटिंग
    हिलेरी को प्री वेडिंग समारोह में राजस्थानी पेंटिग काफी पंसद आई। इसके अलावा कच्छ और बाड़मेर की प्रसिद्घ अजहर प्रिंट भी अच्छी लगी। हिलेरी क्लिंटन सोमवार को दोपहर तीन बजे विशेष सुरक्षा पहरे में उदयपुर एयरपोर्ट पहुंचीं। जानकारी के अनुसार हिलेरी चार्टर विमान से जयपुर के लिए निकली। वहां से उनका रणथम्भौर सवारी जाने का प्लान है।

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    सेलिब्रेटी ने सोशल मीडिया पर जारी की प्री वेडिंग समारोह की तस्वीरें
    हॉलीवुड सिंगर बियोंसे ने प्री वेडिंग समारोह की फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की हैं। इसके साथ ही बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, विद्या बालन, दिशा पाटनी ने भी इंस्टाग्राम पर प्री वेडिंग समारोह के फोटो शेयर किए हैं।

    किसी ने सेल्फी तो किसी ने पार्टी की तस्वीरें शेयर की

    ईशा अंबानी और आनंद पीरामल की दो दिन की प्री वेडिंग सेरेमनी के बाद फिल्म स्टार और वीवीआईपी मेहमान सोमवार को उदयपुर से रवाना हुए। कई लोग दिन में शहर में शॉपिंग करते और आर्ट गैलरियों में भी घूमते दिखे। मुकेश अंबानी की बेटी की प्री वेडिंग सेरेमनी के गवाह बने स्टार्स ने उदयपुर से वापस जाने के बाद यहां की यादें और सुनहरी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा किया।

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    मां कोकिला बेन के साथ अनिल अंबानी।
    हिलेरी क्लिंटन और स्मृति ईरानी।
    आमिर खान, किरण राव(
    अनिल कपूर और शाहरुख खान।
    मनीष मल्होत्रा और सिद्वार्थ।
    सचिन तेंदुलकर।
    शेयर की लेकसिटी की यादें... दीपिका पादुकोण और जाह्नवी कपूर।
    करिश्मा कपूर ने नाइट पार्टी की तस्वीर साझा की।
    जहीर खान और हरभजन सिंह।
    गौरी खां।

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    जदयू के एनडीए में आने से असहज थे उपेंद्र कुशवाहा


    पटना.जुलाई, 2017 में एनडीए में जदयू के आने के बाद से ही उपेंद्र कुशवाहा असहज महसूस करने लगे थे। प्रदेश की राजनीति में वे खुद को नीतीश कुमार के सामने दिखने की कोशिश में जुटे हैं। वर्ष 2000 में कुशवाहा पहली बार विधानसभा का चुनाव जीते। वे तब नीतीश कुमार की पहली पसंद रहे।

    2005 तक उपेंद्र विधायक व विधानसभा में उपनेता भी रहे। इस समय सुशील मोदी विपक्ष के नेता थे। मोदी के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद जब 2004 में अवसर आया तो तमाम विरोध के बावजूद नीतीश कुमार ने उन्हें विपक्ष का नेता बनवाया। हालांकि, वर्ष 2005 में वे विधानसभा का चुनाव हार गए।

    1985 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर

    उनका राजनीतिक सफर वर्ष 1985 में शुरू हुआ था। वे युवा लोकदल के महासचिव बने और 1988 तक इस पद पर रहे। फिर 1988 में राष्ट्रीय महासचिव बने और 1993 तक इस पद पर रहे। इस दौरान वे नीतीश कुमार के सबसे करीबी रहे। नीतीश कुमार के लव-कुश के बड़े किरदार रहे। उन्हीं की पहल पर 1994 में समता पार्टी के महासचिव, फिर प्रधान महासचिव बने। इसके पहले 2000 में पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए। नीतीश कुमार की पहल पर 2004 में विधानसभा में विपक्ष के नेता बने। वर्ष 2007 में जदयू छोड़ा और 2008 में राष्ट्रवादी कांग्रेस में शामिल हुए, प्रदेश अध्यक्ष बने। 2009 में महात्मा फूले समता परिषद के बैनर तले फिर अलग राह पकड़ ली। 2010 में जदयू में गए और राज्यसभा सांसद बने। 2013 में जदयू छोड़कर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी बनाई और 2014 में काराकाट से लोकसभा सदस्य बने। फिलहाल इसी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

    अरुण, सुधांशु व ललन ने पकड़ ली अलग राह

    उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा का विवादों से हमेशा साथ बना रहा। पार्टी बनी तो सांसद अरुण कुमार से उनकी तल्खी बढ़ी। अंत में अरुण कुमार ने अलग रास्ता अपना लिया। पार्टी के दोनों विधायक सुधांशु कुमार और ललन पासवान ने भी उपेंद्र कुशवाहा से अलग राह पकड़ ली। एकमात्र बचे सांसद राम कुमार शर्मा भी पार्टी में सहज नहीं थे। एनडीए छोड़ने के विचार से वे सहमत नहीं थे। उन्होंने खुलेआम नाराजगी प्रकट की। पर, उन्होंने कुशवाहा का साथ नहीं छोड़ा। हालांकि पार्टी के कई नेता उन्हें छोड़ गए।

    अनदेखी का था डर

    उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए में अपनी अनदेखी का डर भी था। नीतीश कुमार के एनडीए में आने के बाद कुशवाहा को यह डर लगातार सताता रहा। भाजपा के लिए नीतीश कुमार का महत्व अधिक था। उनका सम्मान और स्थान भी किसी अन्य नेता की अपेक्षा अधिक था। ऐसे में कुशवाहा एनडीए में अपना घटता मूल्य स्पष्ट महसूस कर रहे थे। भाजपा के शीर्ष नेता भी नीतीश कुमार को बिहार में अपना नेता मानकर ही रणनीति बना रहे थे।



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    Kushwaha was uncomfortable when JDU's came in NDA

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    डिप्रेशन में थी रिटायर्ड आईजी की बेटी स्निग्धा, चल रहा था इलाज; गाड़ी में मिलीं दवाएं


    पटना.रिटायर्ड आईजी उमाशंकर सुधांशु की डॉक्टर बेटी स्निग्धा की खुदकुशी के मामले में कोतवाली थाने में यूडी (अप्राकृतिक मौत) केस दर्ज किया गया है। उनके ड्राइवर कृष्णा यादव का भी लिखित बयान लिया गया है। पुलिस ने स्निग्धा के मोबाइल, मैसेंजर और वाट्सएप मैसेज को भी खंगाला।

    सोमवार को पुलिस ने दोबारा उदयगिरी अपार्टमेंट जाकर मामले की पड़ताल की और फ्लैट के सीसीटीवी फुटेज को देखा। अपार्टमेंट का केयर टेकर सुनील छत पर ही रहता है। उसने पुलिस से बताया कि वह जैसे ही कमरे से बाहर निकला स्निग्धा को छत की रेलिंग पर बैठा देखा। पूछने पर स्निग्धा ने बताया कि वह आईएएस मैडम की गेस्ट हैं। सुनील ने उसे रेलिंग से उतरकर कुर्सी पर बैठने को कहा और 12वीं मंजिल पर महिला आईएएस के फ्लैट जानकारी पुख्ता करने चला गया। केयर टेकर ने थोड़ी देर बाद महिला आईएएस के घर से एक युवती को बुलाकर लाया, जिसने कहा कि रेलिंग पर बैठी लड़की उसकी गेस्ट नहीं है। इसके बाद वह दूसरे आईएएस के फ्लैट में जानकारी लेने गया। सुनील लौटा तो देखा कि स्निग्धा नहीं है।अपार्टमेंट के नीचे काफी शोरगुल हो रहा था। स्निग्धा छत से कूद चुकी थी। उसका चश्मा, चप्पल और फोन वहीं छत पर पड़ा था।

    डीएसपी विधि व्यवस्था राकेश कुमार ने कहा कि उसकी गाड़ी में दवाइयां मिली हैं। वह डिप्रेशन में चल रही थी। उसका इलाज चल रहा था। कोलकाता के साइकैट्रिस्ट के अलावा पटना के एक फिजियोथेरेपिस्ट से भी उसका इलाज चल रहा था। जांच में पुलिस ने पाया कि वह काफी शांत और चुपचुप रहती थी। दवाई खाकर भूल जाती थी। मामला आत्महत्या का ही है। स्निग्धा के मोबाइल से पुलिस को कुछ स्वरचित कविताएं भी मिली हैं। उसके वाट्सएप चैट में भी कई बातें ऐसी हैं जिनसे पता चलता है कि वह डिप्रेशन में थी। उसने अपने डॉक्टर से भी इस संबंध में चैटिंग की है।

    ड्राइवर ने कहा-चार अपार्टमेंट की कर चुकी थी रेकी

    स्निग्धा का ड्राइवर कृष्णा यादव समस्तीपुर जिला पुलिस बल का चालक हवलदार है। उसने कहा कि वह नौ साल से उनके साथ है। रविवार की सुबह वह साथी महेश यादव के साथ मॉर्निंग वाॅक के लिए निकला था, तभी स्निग्धा मैडम का फोन आया कि चलना है। इसके बाद वह घर लौट आया। उसने कहा कि मैडम कार में बैठते ही बोलीं कि दीदी के घर की तरफ चलो। एजी काॅलोनी की ओर जाकर वह मरीना अपार्टमेंट चली गईं। वहां वह गार्ड के साथ ऊपर गईं फिर वापस आ गईं। इसके बाद स्निग्धा ने उसे वहां से उदयगिरी चलने को कहा। कृष्णा ने कहा कि दो दिन पहले स्निग्धा मौर्या होटल के पास की एक बड़ी बिल्डिंग, बोरिंग रोड चौराहे के पास की बड़ी बिल्डिंग जा चुकी थीं।

    बांटा था शादी का कार्ड, दो दिन पहले बोरिंग रोड से खरीदी थी दवा
    स्निग्धा कुछ दिन पहले भी शादी का कार्ड लेकर उदयगिरी अपार्टमेंट किसी को देने आई थी। पुलिस को ड्राइवर ने बताया कि दो दिन पहले मैडम बोरिंग रोड आई थी और यहीं के एक दवा दुकान से दवाई खरीदी थी। उसने पुलिस से कहा कि कुछ दिनों से मैडम अपने परिचितों में शादी का कार्ड भी बांट रही थी।

    खरीदारी भी की थी

    ड्राइवर ने कोतवाली पुलिस को बताया कि पटना में मैडम कहीं भी जाती थीं तो वही गाड़ी ड्राइव करता था। उसने कहा कि पिछले कुछ दिनों से वह शादी का कार्ड भी बांट रही थीं। कभी-कभी खरीदारी भी करती थीं। उसने कहा कि शनिवार को ही मौर्या होटल के पास के एक कॉस्मेटिक दुकान में खरीदारी की।

    एक लिफ्ट नहीं चला तो टूल लेकर दूसरे से गई

    रविवार की सुबह स्निग्धा 7:35 बजे लिफ्ट के पास दिख रही है। उसके हाथ में एक प्लास्टिक का टूल है। वह पहले जिस लिफ्ट में सवार हुई वह चली नहीं। थोड़ी देर बाद वह निकल गई और दूसरे लिफ्ट में चली गई। लिफ्ट के अंदर लगे कैमरे में स्निग्धा दिख रही है। थोड़ी देर के लिए वह कैमरे में देखती है। इसके बाद कैमरा ऑफ हो जाता है।



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    खुदकुशी से पहले अपार्टमेंट की लिफ्ट के अंदर स्निग्धा।

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    महागठबंधन की तीसरी मजबूत पार्टनर बनेगी उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा


    पटना.रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन के तीसरे मजबूत पार्टनर बनेंगे। एनडीए छोड़ने के बाद उनकी महागठबंधन में शामिल होने की अब औपचारिकता ही बच गई है। बिहार महागठबंधन की अगुवाई करने वाली राजद के नेता तेजस्वी यादव कई बार सार्वजनिक रूप से उन्हें महागठबंधन में आने का निमंत्रण दे चुके हैं।

    ऐसे में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद उनकी पार्टी या यों कहे कि वे खुद महागठबंधन की मजबूती के लिए काम करेंगे। एक साल से वे महागठबंधन के नेताओं के संपर्क में थे। पूरी उम्मीद है कि वे पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के साथ कांग्रेस नेतृत्व से अब लोकसभा चुनाव में अपनी हिस्से की सीट पर चर्चा करेंगे। ऐसे में बिहार महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के बाद उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा तीसरी मजबूत राजनीतिक शक्ति हो जाएगी।

    कांग्रेस कर सकती 18-20 सीटों का दावा

    महागठबंधन के नेताओं की मानें तो कांग्रेस का राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व उपेंद्र कुशवाहा व शरद यादव के साथ बिहार में 18 से 20 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा ठोक सकता है। उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन में शामिल होने के लिए राजद से ज्यादा कांग्रेस नेताओं के संपर्क में लगातार रहे हैं। उनकी तरफ से कांग्रेस नेतृत्व द्वारा अब राजद के नेता लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव से सीट के बाबत बात को आगे बढ़ाने की संभावना है। वैसे रालोसपा की तरफ से बिहार में 6 सीट की डिमांड की जाती रही है। पर, बिहार में अभी 4 सीट ही उन्हें देने का आश्वासन मिलता रहा है। काराकाट, सीतामढ़ी, नवादा के साथ एक और सीट देने की बात कही गई है। उनकी डिमांड की दो अन्य सीटों पर कोई बात नहीं हुई है।

    पांच सीट पर बन सकती है बात

    राजद सूत्रों के मुताबिक रालोसपा के महागठबंधन में आने के औपचारिक एलान के बाद एक और सीट यानी बिहार में अधिकतम 5 सीट दी जा सकती है। महागठबंधन पूरा करने के लिए कांग्रेस और राजद का प्रदेश नेतृत्व एनडीए विरोधी अन्य सभी दलों को जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें रालोसपा के साथ-साथ माले, लोजद, हम सेक्युलर, सीपीआई, सपा और बसपा के साथ भी सीट एडजस्टमेंट की बात होनी है। इसके पीछे तर्क यह है कि जदयू और भाजपा विरोधी मतों का बंटवारा नहीं हो, जिससे लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीट महागठबंधन की झोली में आ सके।

    पार्टी में बगावत, उपेंद्र के खिलाफ भगवान ने खोला मोर्चा

    पटना|केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए से नाता तोड़ने के साथ ही रालोसपा में बगावत हो गई है। रालोसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व मुख्य प्रवक्ता भगवान सिंह कुशवाहा ने उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्री बनाकर कुशवाहा समाज का सम्मान बढ़ाया था। पीएम ने जिस तरह उपेंद्र पर भरोसा किया, इस भरोसे को तोड़कर उन्हें बीच में एनडीए छोड़कर नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए ‘कुछ दूसरे हाथों’ की कठपुतली बन चुके थे। उन्होंने एनडीए छोड़ने का मन बना लिया था। जो कार्यकर्ता नहीं चाहते थे कि कुशवाहा एनडीए से अलग हों, उनलोगों से बातचीत के बाद निर्णय लिया जाएगा कि किस पार्टी के साथ जाएंगे। हम रालासपा में नहीं रहेंगे, यह तय है।


    एनडीए होगा और मजबूत

    ललन गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष व विधायक ललन पासवान ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा के अलग होने से एनडीए पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एनडीए और मजबूत होगा। साढ़े चार साल तक मंत्री बनकर मलाई खाने बाले कुशवाहा को आज ज्ञान हुआ की भाजपा आरएसएस के एजेंडा लागू कर रही है। कुशवाहा के किसी बयान को जनता नोटिस नहीं लेने वाली है।

    राजनीति के साइबेरियन क्रेन है उपेंद्र कुशवाहा : संजय सिंह

    प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से उपेंद्र कुशवाहा के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनकी तुलना साइबेरियन क्रेन से की है, जो मौसम बदलने के साथ स्थान बदल देता है। उन्होंने कहा कि साढ़े चार साल से ज्यादा वक्त तक केंद्र सरकार में मंत्री पद का सुख भोगते रहे, तब उनको सबकुछ ठीक लग रहा था। और आज जब पद छोड़ना पड़ा तो आपको केंद्र की राजग सरकार में खामियां दिख रही हैं। प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश की जनता सब समझती है और आने वाले चुनाव में कुशवाहा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

    सम्राट बोले- टाइटल बदल लेने से कोई समाज का हितैषी नहीं हो जाता

    उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए छोड़ने पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि एनडीए ने उन्हें पूरा सम्मान दिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद उन्हें मिलने के लिए बुलाया था। लेकिन, कुशवाहा के पास समय ही नहीं था। वे अपने कार्यक्रम में व्यस्त थे। उनके पास राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने का समय नहीं था। इससे स्पष्ट है कि वे जो आज कर रहे हैं, वह उनके अंदर पहले से तय था। बाद में जब राष्ट्रीय अध्यक्ष तीन राज्यों के चुनाव में व्यस्त हो गए तो वे उनसे समय मांगने लगे। उन्होंने कहा कि रालोसपा में टूट के बाद भी उपेंद्र कुशवाहा को केंद्र में मंत्री बनाए रखा गया। इससे बड़ा सम्मान क्या होगा? यूपी चुनाव में पीएम को जेपी-लोहिया का नाम लेकर कई तरह की नसीहत देने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने उस समय भी गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया। फिर भी उन्हें पूरा सम्मान दिया गया। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत केंद्रीय मंत्रिमंडल के वरीय सदस्यों को देखने के बाद भी यदि उन्हें सामाजिक न्याय को लेकर आरोप लगाना है तो यह उनका पूर्वाग्रह ही होगा। उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा को चुनौती दी कि वे कोई एक काम बताएं, जो बिहार या समाज के हित के लिए किया हो?

    रालोसपा के एनडीए छोड़ने से मजबूत होगा विपक्ष : कांग्रेस

    कांग्रेस ने रालोसपा के एनडीए छोड़ने के फैसले को सही समय पर सही फैसला करार दिया। प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि एनडीए के सहयोगी लगातार उसका साथ छोड़ रहे हैं। 2019 के चुनाव में भाजपा को पराजित करने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतें एक मंच पर आ रही हैं।कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार का सफाया निश्चित देख एनडीए का कुनबा बिखरने लगा है। मोदी सरकार की तानाशाही से जनता उब चुकी है। उपेंद्र कुशवाहा ने भी कहा है कि सरकार आरएसएस के एजेंडा पर काम कर रही है।

    दरकने लगा एनडीए का किला : हम

    हम सेक्युलर ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देते ही झूठे वादों और जुमलों के सहारे सत्ता में आई केंद्र सरकार की उलटी गिनती शुरू हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा कि मोदी सरकार का किला दरकने लगा है। राजग में भगदड़ की स्थिति है। कुशवाहा के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार का जाना तय है।



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    RLSP will become third strong partner of Major alliance

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    माल्या, नीरव मोदी समेत आर्थिक अपराध के 18 मामलों में 23 भगोड़ों का प्रत्यर्पण चाहता है भारत


    नई दिल्ली. सीबीआई को भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या मामले में सोमवार को बड़ी कामयाबी मिली। यूके की अदालत ने माल्या को ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित करने का फैसला सुनाया है। भारत माल्या, नीरव मोदी, ललित मोदीसमेत आर्थिक अपराध के 18 मामलों में 23 भगोड़ों का प्रत्यर्पण चाहता है।


    भारत की 48 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। साल 2014 से अब तक आर्थिक अपराध के मामलों में सिर्फ 5 अपराधियों का प्रत्यर्पणहो पाया है। 23 भगोड़ों को अभी तक नहीं लाया जा सका है। इनके लिए संबंधित देशों से प्रत्यर्पण की अपील की जा चुकी है।


    ब्रिटेन से 17 भगोड़ों के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जारी
    ब्रिटेन से 17 लोगों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चल रही थी। इनमें विजय माल्या, ललित मोदी, गुलशन कुमार हत्याकांड में आरोपी और संगीतकार नदीम सैफी, गुजरात में 1993 में हुए धमाकों का आरोपी टाइगर हनीफ भी शामिल हैं। इनके अलावा सरकार को 24 देशों से करीब 121 भगोड़ों को प्रत्यर्पण कर भारत लाने का इंतज़ार है। इनमें से 31 भगोड़े करीब 40 हजार करोड़ रुपए लेकर भागे हैं।


    ब्रिटेन से 23 सालों में सिर्फ एक भगोड़े कोला पाया भारत
    पिछले 16 वर्षों में प्रत्यर्पण के मामलों को देखें तो पता चलता है कि सरकार इस दौरान सिर्फ 66 भगोड़ों को भारत ला पाई है। जबकि सौ से ज्यादा के प्रत्यर्पण के लिए अर्जी दी है। इनमें से 13 आर्थिक मामलों में अपराधी थे। भारत और ब्रिटेन के बीच 1993 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी। तब से लेकर अब तक पहले आरोपी को भारत लाने में 23 साल लग गए। इसमें मर्डर के मामले में सिर्फ एक व्यक्ति समीरभाई वीनूभाई पटेल का 19 अक्टूबर 2016 को प्रत्यर्पण किया जा सका है।


    सरकार अपराध कर भागने वाले तीन ब्रिटिश नागरिकों को भी भारत लाई है, लेकिन इन्हें अमेरिका और तंजानिया से लाया गया। हालही में अगस्ता वेस्टलैंड डील मामले में आरोपी बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को यूएई से लाया गया।

    इनका होना हैप्रत्यर्पण

    नाम मामला जिस देश से प्रत्यर्पण होना है
    विजय माल्या बैंक लोन ब्रिटेन
    राजेश कुमार सिंह, रिफत अली फ्रॉड और फर्जी नोट इस्तेमाल यूएई
    रितिका अवस्थी, वीरकरण अवस्थी धान खरीद के भुगतान में धोखाधड़ी ब्रिटेन
    कार्लो वेलेन्टिनो ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाला इटली
    गुइडो राल्फ हश्के ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाला इटली
    आशीष जोबनपुत्र धान खरीद के भुगतान में धोखाधड़ी यूएई
    शेख दाउद सहुल अहमद चंदन की लकड़ी की तस्करी यूएई
    एस बालाकृष्णन लेक्सस कार इंपोर्ट फर्जीवाड़ा ब्रिटेन
    संजय, वर्षा, आरती कालरा सरकारी खजाने को नुकसान यूएई
    दीपक पाहवा कीमती सामान की धोखाधड़ी यूएई
    मोइदीन अब्बा उमर तस्करी और नकली नोट यूएई
    मेलाकट्टू वर्गीस उथुप्पू नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी यूएई
    विवेक सिन्हा बैंक फ्रॉड अमेरिका
    अमित वाधवा कीमती सामान की धोखाधड़ी अमेरिका
    अरुप नाग कीमती सामान की धोखाधड़ी यूएई
    जतिंदर कुमार, आशा रानी फर्जी लोन की साजिश ब्रिटेन


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    India wants extradition of 23 fugitives including Mallya, Nirav Modi

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    आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कार्यकाल पूरा होने से 9 महीने पहले इस्तीफा दिया


    मुंबई. रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसकी वजह निजी बताई है। पिछले कुछ महीनों से सरकार और आरबीआई के बीच कई मुद्दों पर विवाद चल रहा था। सरकार ने आरबीआई एक्ट की धारा 7 का भी इस्तेमाल किया था। लेकिन, बाद में विवाद सुलझने की खबर आई। 19 नवंबर को आरबीआई की बोर्ड बैठक में विवाद के कुछ मुद्दों पर सहमति भी बन गई थी। इसके बाद यह आशंका खत्म हो गई कि उर्जित पटेल इस्तीफा देंगे। लेकिन, सोमवार को अचानक उन्होंने इस्तीफे का ऐलान कर दिया।

    उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के इस्तीफे की भी खबरेंआईं। हालांकि, आरबीआई ने इन अफवाहों को खारिज कर दिया और कहा कि डिप्टी गवर्नर ने इस्तीफा नहीं दिया।

    उर्जित के साथ अनुभव अच्छा रहा: मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उर्जित पटेल के कार्यकाल की तारीफ करते हुए कहा है कि उनके नेतृत्व में आरबीआई ने अच्छा काम किया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उर्जित पटेल को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि उनके साथ काम का अनुभव अच्छा रहा।

    पटेल का फैसला चौंकाने वाला: एस गुरुमूर्ति

    आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के सदस्य एस गुरुमूर्ति ने उर्जित पटेल के इस्तीफे को चौंकाने वाला बताया है। उनका कहना है कि पिछली बैठक काफी अच्छे माहौल में हुई थी। ऐसे में पटेल का इस्तीफा झटके की तरह है।

    आरबीआई की घटनाएं चिंता की बात: रघुराम राजन
    पटेल के इस्तीफे पर पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि आरबीआई में जो चल रहा है उस पर सभी भारतीयों को चिंता करनी चाहिए। राजन ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर में कमी का श्रेय आरबीआई को मिलना चाहिए। सरकार को केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए।

    सरकार केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता पर हमला कर रही: राहुल गांधी
    उर्जित पटेल के इस्तीफे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता पर हमला कर रही है। पटेल का इस्तीफा उसीका नतीजा है। देश को भरोसेमंद सरकार की जरूरत है जो झूठा प्रचार ना करे बल्कि संवैधानिक मूल्यों का पालन करे।

    पटेल ने दबाव में इस्तीफा दिया: प्रकाश बियाणी
    कॉरपोरेट इतिहासकार प्रकाश बियाणी का कहना है कि उर्जित पटेल भी रघुराम राजन की तरह अधूरी पारी छोडकर पलायन कर गए। उन्होंने रिजर्व
    बैंक का गर्वनर पद छोड़ते हुए कहा है कि यह सम्मानजनक ओहदा था। मैं व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे रहा हूं। यह कथन औपचारिकता है। हम सब जानते हैं कि इतने महत्वपूर्ण पद से किसी व्यक्ति को हटाना होता तो कहा जाता है कि वे खुद त्यागपत्र दे दें। उर्जित पटेल के साथ भी यही हुआ है।

    उर्जित पटेल नेसितंबर 2016 में पद संभाला था

    4 सितंबर 2016 को उर्जित पटेल आरबीआई गवर्नर का पद संभाला था। उनका कार्यकाल सितंबर 2019 तक था। लेकिन, उन्होंने 9 महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया।पटेल ने कहा- मैं निजी कारणों की वजह से आरबीआई गवर्नर पद से इस्तीफा दे रहा हूं। यह तुरंत प्रभाव से लागू माना जाए। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं रिजर्व बैंक में अपने सभी साथियों और बोर्ड डायरेक्टर्स का शुक्रिया अदा करता हूं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

    विवाद पहले से था, धारा 7 के चलते हुआ टकराव
    सरकार ने सितंबर महीने में पहली बार आरबीआई एक्ट की धारा 7 का इस्तेमाल किया था। धारा 7 के तहत सरकार आरबीआई से सलाह-मशविरा कर सकती है और उसे निर्देश भी दे सकती है। सलाह-मशविरे के तौर पर सरकार ने तीन पत्र रिजर्व बैंक को भेजे थे। धारा 7 के तहत आरबीआई को निर्देश देने के अधिकार का आजाद भारत में आज तक कभी इस्तेमाल नहीं किया गया। लेकिन माना जा रहा था कि धारा 7 का एक हिस्सा प्रभावी करने की वजह से उर्जित पटेल कभी भी इस्तीफा दे सकते हैं।

    उर्जित पटेल के कार्यकाल के दौरान सरकार-आरबीआई के बीच विवाद के मुद्दे

    • आरबीआई ने प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) की रूपरेखा के तहत कुछ नियम तय किए थे। यही सरकार और आरबीआई गवर्नर के बीच विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा था। रिजर्व बैंक ने 12 बैंकों को त्वरित कारवाई की श्रेणी में डाला। ये नया कर्ज नहीं दे सकते, नई ब्रांच नहीं खोल सकते और ना ही डिविडेंड दे सकते हैं।
    • सरकार पीसीए नियमों में ढील चाहती है ताकि कर्ज देना बढ़ सके। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि बैंकों की बैलेंस शीट और ना बिगड़े, इसलिए रोक जरूरी है।
    • अंतर-मंत्रालय समिति ने अलग पेमेंट-सेटलमेंट रेगुलेटर की सिफारिश की। रिजर्व बैंक इसके खिलाफ था। उसका अभी भी यही कहना है कि यह आरबीआई के अधीन हो। इसका प्रमुख आरबीआई गवर्नर ही हो।
    • एनपीए और विल्फुल डिफॉल्टरों पर अंकुश लगाने के लिए आरबीआई ने 12 फरवरी को नियम बदले। कर्ज लौटाने में एक दिन की भी देरी हुई तो डिफॉल्ट मानकर रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरू करनी पड़गी। सरकार ने इसमें ढील देने का आग्रह किया, लेकिन आरबीआई नहीं माना।
    • नीरव मोदी का पीएनबी फ्रॉड सामने आने के बाद सरकार ने रिजर्व बैंक की निगरानी की आलोचना की तो आरबीआई गवर्नर ने ज्यादा अधिकार मांगे ताकि सरकारी बैंकों के खिलाफ कारवाई की जा सके।
    • सरकार रिजर्व बैंक से ज्यादा डिविडेंड चाहती है ताकि अपना घाटा कम कर सके। आरबीआई का कहना है कि सरकार इसकी स्वायत्तता को कम कर रही है। अभी इसकी बैलेंस शीट मजबूत बनाने की जरूरत है।

    डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के भाषण के बाद विवाद सामने आया था
    अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान आरबीआई की स्वायत्तता का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि जो सरकार केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करती, उसे आर्थिक मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ता है। आचार्य के बयान के बाद आरबीआई और सरकार के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कुछ दिन बाद कहा कि सरकार भी आरबीआई की स्वायत्तता का सम्मान करती है लेकिन, उसे जनहित का ध्यान रखना चाहिए।

    आगे क्या होगा ?
    आरबीआई एक्ट के मुताबिक केंद्रीय बैंक के गवर्नर या डिप्टी गवर्नर इस्तीफे या छुट्टी पर होने की स्थिति में सरकार आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर दूसरे व्यक्ति को नियुक्त कर सकती है। आरबीआई में फिलहाल चार डिप्टी गवर्नर हैं। इनमें एन एस विश्वनाथन, विरल आचार्य, बीपी कानूनगो और एम के जैन शामिल हैं। साथ ही 12 एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी आरबीआई के बोर्ड में शामिल हैं।

    राजन ने भी सरकार से विवाद के बाद छोड़ा था पद

    दो साल में यह ऐसा दूसरा मौका है जब आरबीआई गवर्नर ने सरकार से विवाद के बाद पद छोड़ा है। इससे पहले रघुराम राजन ने जून 2016 में गवर्नर पद छोड़ने की घोषणा की थी। हालांकि, उन्होंने सितंबर 2016 में कार्यकाल पूरा होने पर पद छोड़ा था। मोदी सरकार और रघुराम राजन के बीच ब्याज दरों और राजन के बयानों को लेकर अनबन रही थी।

    आरबीआई और सरकारों के बीच पुराने विवाद
    साल 2008 से 2012 के दौरान यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम और तत्कालीन आरबीआई गर्वनर डी सुब्बाराव के बीच भी विवाद सामने आया थे। दोनों के बीच ब्याज दरों और कर्ज को लेकर मतभेद थे। साल 2004 से 2008 के दौरान पी चिदंबरम और तत्कालीन आरबीआई गवर्नर वाई वी रेड्डी के बीच विदेशी निवेशकों पर टैक्स, ब्याज दरों और निजी बैंकों में एफडीआई के मुद्दे को लेकर विवाद हुआ था।



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    RBI Governor Resign: Reserve Bank of India Governor Resign as RBI Governor

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    विजय माल्या भारत लाया जाएगा, कोर्ट ने मंजूरी दी; मामला ब्रिटिश सरकार को रेफर किया


    लंदन.वेस्टमिंस्टर अदालत ने सोमवार को फैसला दिया कि भगोड़े शराब कारोबारीविजय माल्या (62) को ब्रिटेन से भारतप्रत्यर्पित किया जाए। जज एम्मा आर्बटनॉट ने कहा कि पहली नजर में माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश रचने और मनी लॉन्डरिंग का केस बनता है। अदालत ने यह मामला अब ब्रिटिश सरकार को भेज दिया है। फैसले से पहले कोर्ट पहुंचे माल्या ने कहा था कि मैंने रुपए लौटाने का प्रस्ताव दिया है, यह झूठा नहीं था। मेरे इसऑफर का प्रत्यर्पण से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने पैसे चुराए नहीं। मैंने किंगफिशर एयरलाइंस को बचाने के लिए अपने 4 हजार करोड़ रुपए इसमें लगाए थे।

    माल्या पर भारतीयों बैंकों के 9,000 करोड़ रुपए बकाया हैं। वह मार्च 2016 में लंदन भाग गया था। भारत ने पिछले साल फरवरी में यूके से उसके प्रत्यर्पण की अपील की थी। भारत में फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर अप्रैल 2017 में स्कॉटलैंड यार्ड में माल्या की गिरफ्तारी हुई लेकिन, जमानत पर छूट गया। उसके प्रत्यर्पण का मामला 4 दिसंबर 2017 से लंदन की अदालत में चल रहा है।

    आगे क्या

    • यूके की लीगल एक्सपर्ट पावनी रेड्डी के मुताबिक, यूके सरकार अदालत के फैसले से संतुष्ट होती है तो वह माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश जारी करेगी। इस फैसले के खिलाफ माल्या के पास 14 दिन में हाईकोर्ट में अपील का अधिकार होगा।
    • माल्या ने अगर प्रत्यर्पण के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की तो यूके की सरकार के आदेश जारी करने के 28 दिन में उसका प्रत्यर्पण किया जाएगा।
      • माल्या का कहना है कि उसके खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित है। उसने एक रुपया भी उधार नहीं लिया। किंगफिशर एयरलाइंस ने लोन लिया था। कारोबार में घाटा होने की वजह से लोन की रकम खर्च हो गई। वह सिर्फ गारंटर था और यह फ्रॉड नहीं है।
      • वह कर्ज का 100% मूलधन चुकाने को तैयार है। उसने साल 2016 में कर्नाटक हाईकोर्ट में भी यह ऑफर दिया था। उसका कहना है कि रकम चुराकर भागने की बात गलत है। उसे बैंक डिफॉल्ट का पोस्टर बॉय बना दिया गया है।
      • माल्या ने यह भी कहा था कि साल 2016 में उसने प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को चिट्ठी लिखकर जांच कमेटी गठित करने की मांग की थी लेकिन, कोई जवाब नहीं मिला।
      • माल्या ने यह भी कहा था कि भारतीय जेलों की हालत अच्छी नहीं है। इसके बाद यूके की अदालत ने भारत से जेल का वीडियो मांगा था। भारत ने मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 का वीडियो भेजा था, जहां माल्या को रखा जाएगा। वीडियो देखने के बाद यूके की कोर्ट ने संतुष्टि जताई थी।
      • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रत्यर्पण पर फैसले से पहले माल्या ने यह भी कहा है कि राजनीति की वजह से उसे भारत में न्याय मिलने के आसार कम हैं। उसके खिलाफ नए आरोप लग सकते हैं।
    1. भारतीय जांच एजेंसियों की दलील

      • सीबीआई ने यूके की अदालत के फैसले का स्वागत किया। कहा- हमें उम्मीद है कि माल्या को जल्द भारत लाया जाएगा और हम उसके खिलाफ मामलों में नतीजे पर पहुंचेंगे।
      • हमने तथ्यों और कानून के आधार पर मजबूती से अपना पक्ष रखा था और हम पूरी तरह आश्वस्त थे कि माल्या को प्रत्यर्पित किया जाएगा।
      • माल्या ने जानबूझकर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया। वह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत भगोड़ा घोषित है। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। वह ब्रिटेन के कानून के मुताबिक भी आरोपी है।
    2. मार्च 2012 में माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस ने यूरोप और एशिया के लिए फ्लाइट्स बंद कर दीं। घरेलू बाजार में जहां किंगफिशर हर दिन 340 फ्लाइट्स ऑपरेट करती थीं, उन्हें घटाकर 125 कर दिया गया। लेकिन यह फॉर्मूला 8 महीने भी नहीं चला। अक्टूबर 2012 में किंगफिशर की सारी फ्लाइट्स बंद हो गईं।

    3. साल 2013-14 तक एयरलाइंस का घाटा बढ़कर 4,301 करोड़ रुपए हो चुका था। इसी साल माल्या दुनिया के टॉप-100 अमीरों की लिस्ट से बाहर हो गया। लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर ब्याज बढ़ता गया। मार्च 2016 तक माल्या 9,000 करोड़ रुपए का कर्जदार हो गया और विदेश भाग गया।

    4. आर्थिक अपराध के 18 मामलों में 23 भगोड़ों का प्रत्यर्पण बाकी

      भारत की 48 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। साल 2014 से अब तक आर्थिक अपराध के मामलों में सिर्फ 5 अपराधियों का प्रत्यपर्ण हो पाया है। 23 भगोड़ों को अभी तक नहीं लाया जा सका है। इनके लिए संबंधित देशों से प्रत्यर्पण की अपील की जा चुकी है।

      आर्थिक अपराधों से जुड़े प्रत्यर्पण के 3बड़े मामले

      आरोपी मामला जिस देश से प्रत्यर्पण होना है
      विजय माल्या बैंक लोन ब्रिटेन
      नीरव मोदी पीएनबी घोटाला ब्रिटेन
      मेहुल चौकसी पीएनबी घोटाला एंटीगुआ
    5. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फैसले पर कहा- यह भारत के लिए महान दिन है। माल्या को यूपीए सरकार के दौरान फायदे मिले। यूपीए सरकार के दौरान उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया।

    6. माल्या के प्रत्यर्पण के फैसले पर कॉरपोरेट इतिहासकार प्रकाश बियाणी का कहना है कि उम्मीद करें कि माल्या अब पहले जितने एरोगेंट नहीं रहे होंगे। उन्हें सुब्रत रॉय से सबक सीखना चाहिए जिन्होंने अदालत और सेबी का मजाक उड़ाया था। उन्होंने संपदा भी खोई और महीनों जेल में भी रहे।

    7. भारत और यूके के बीच साल 1992 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी। तब से अब तक यूके से सिर्फ एक आरोपी का प्रत्यर्पण हो पाया है। अक्टूबर 2016 में यूके से समीरभाई वीनूभाई पटेल को भारत प्रत्यर्पित किया गया। वह साल 2002 के गुजरात दंगों में आरोपी था।

    8. यूके में रह रहे भारतीय भगोड़े

      • विजय माल्या: बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया
      • नीरव मोदी: पीएनबी घोटाले का आरोपी
      • ललित मोदी: वित्तीय अनियमितताओं का मामला
      • टाइगर हनीफ: साल 1993 के गुजरात धमाकों का आरोपी
      • नदीम सैफी: गुलशन कुमार हत्याकांड का आरोपी
      • रवि शंकरन: नेवी वॉर रूम लीक मामले में आरोपी
      • रेमंड वार्ले: गोवा में बच्चों के यौन शोषण का आरोपी
    9. यूरोपियन कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स पर यूके ने दस्तखत किए हैं। इसके तहत अगर यूके की अदालतों को लगता है कि किसी व्यक्ति को प्रत्यर्पित किया गया तो उसे प्रताड़ित किया जा सकता है या राजनीतिक कारणों से प्रत्यर्पण किया जा रहा है तो वह प्रत्यर्पण की अपील को खारिज कर सकती है।

      • एम्मा आर्बटनॉट ने कहा- ऐसे कोई संकेत नहीं हैं, जिनसे यह लगे कि माल्या के खिलाफ झूठा केस बनाया गया है।
      • सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद हम कह सकते हैं कि मामला है, जिसका उन्हें (माल्या) को जवाब देना है।
      • मुंबई की ऑर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 का वीडियो वास्तविक तस्वीर पेश करता है और इसे हाल में ही री-डेकोरेट किया गया है।
      • माल्या वहां की जेलमें अपनी डायबिटीज और दूसरी समस्याओं के लिए निजी स्वास्थ्य सेवाएं ले सकता है।


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        Vijay Mallya Said fear of unfair trial haven't stolen public money

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    एनपीएस में सरकार ने अपना योगदान 10% से बढ़ाकर 14% किया, 36 लाख कर्मचारियों को फायदा


    नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में अपना योगदान 10% से बढ़ाकर 14% करने का फैसला लिया है। यह अगले वित्त वर्ष (2019-20) से लागू होगा। कर्मचारियों के लिए न्यूनतम योगदान 10% ही रहेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस फैसले से 36 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को फायदा होगा।

    रिटायरमेंट के समय कर्मचारी एनपीएस की 60% रकम निकालेंगे तो उन्हें टैक्स भी नहीं चुकाना होगा। यानी पूरी रकम की निकासी टैक्स फ्री होगी। क्योंकि, 40% राशि एन्युटि में जाती है। रकम निकासी पर टैक्स छूट सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए लागू होगी।

    वित्त मंत्री ने बताया कि एनपीएस में सरकार का योगदान बढ़ने से वित्त वर्ष 2019-20 में 2,840 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। एनपीएस को ईईई (एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट) श्रेणी में लाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी।

    क्या है एनपीएस ?
    यह सरकारी पेंशन स्कीम है। जनवरी 2004 में यह सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू की गई थी। लेकिन, 2009 में सभी के लिए खोल दी गई। कर्मचारी अपने सेवाकाल के दौरान एनपीएस खाते में योगदान देता है। रिटायरमेंट पर वह 60% रकम निकाल सकता है। बाकी 40% रकम एन्युटि स्कीम में लगा सकता है। जिससे रिटायरमेंट के बाद नियमित आय होती रहती है।



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    Govt contribution to NPS raised to 14 percent withdrawal made tax free

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    Db app Market plus Tambola special offer

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    दो साथियों के साथ मछली पकड़ने गया था मछुआरा, नाव के किनारे पर खड़ा था, अगले ही पल ऐसा कुछ हुआ कि चली गई जान


    चेन्नै. तमिलनाडु के एक मछुआरे अपने ही फेंके जाल में फंस गया। उसने जाल से निकलने की बहुत कोशिश की लेकिन जब तक वो उससे निकल पाता, तब तक उसकी मौत हो गई। मछुआरे का नाम सूर्या बताया जा रहा है और वो शनिवार रात अपने साथियों के साथ मछलियां पकड़ने के लिए गया था लेकिन घर लौटकर नहीं आ पाया।

    बैलेंस बिगड़ा और समुद्र में गिरा
    - मामला चेन्नै के पझाया नदुकुप्पम का है, जहां 23 साल का सूर्या दो मछुआरों के साथ मछली पकड़ने के लिए गया था। पुलिस के मुताबिक, वो तीनों सिंगल बोट पर सवार होकर निकले थे।
    - पुलिस ने बताया कि आमतौर पर तीनों सुबह के वक्त फिशिंग के लिए जाते थे और देर शाम तक घर लौट आते थे। कई बार ये अच्छे शिकार की तलाश में समुद्र के तट पर ही पूरी रात रुक भी जाते थे।
    - शनिवार की रात भी यही हुआ कि वो जाल बिछाकर अच्छे शिकार की तलाश में थे और इस दौरान सूर्या बोट के किनारे पर खड़ा था। वो अचानक अपना बैलेंस खो बैठा और समुद्र में जा गिरा।
    - पुलिस ने बताया कि सूर्या अच्छा तैराक था और समुद्र से अच्छी तरह से वाकिफ था लेकिन फिर भी जाल में बुरी तरह फंस गया। उसने पानी से बाहर आने की काफी कोशिश भी की लेकिन नाकाम रहा।

    निकलने की कोशिश में फंसता गया
    - सूर्या के दोनों साथियों ने भी उसे निकालने की काफी कोशिश की लेकिन इस कोशिश में वो नेट में फंसता ही जा रहा था। दोनों साखियों ने उसे ऊपर तो खींच लिया लेकिन वो जाल में उलझा हुआ था।
    - पुलिस ने बताया कि उनके पास कोई चाकू नहीं था और जाल को हाथ से काटना संभव नहीं था। लिहाजा, उन्होंने 30 मिनट की दूरी पर स्थित समुद्र तट उसे तक ले जाने का फैसला किया।

    काटा गया जाल
    - तट पर पहुंचते ही उन्होंने तेजी में जाल को काटा और उसे लेकर हॉस्पिटल के लिए भागे लेकिन मेडिकल टीम ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उसकी डेडबॉडी को कांचीपुरम गवर्मेंट हॉस्पिटल में पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने कहा कि वो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि मौत की असल वजह पता चल सके।



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    Fisherman gets entangled in his own net and dies

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    गांव में दो लोगों की मौत से मचा हड़कंप, फैली ऐसी अफवाह कि पड़ोसी गांव के लोगों ने तोड़ लिया नाता, घर से बाहर नहीं निकल पा रहे लोग


    कृष्णा. आंध्रप्रदेश के एक गांव में दो लोगों की मौत के बाद स्वाइन फ्लू की फैलने की अफवाह से हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि, लोकल डॉक्टर्स का साफ कहना है कि दोनों की मौत स्वाइन फ्लू से नहीं हुई है, लेकिन लोग मानने को राजी नहीं हैं। इस गांव का सभी ने सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। यहां के लोगों को बसों में बैठने नहीं दिया जा रहा है और न ही बच्चों को लेने के लिए स्कूल बसें आ रही हैं। दूध और पानी की सप्लाई भी नहीं हो रही है। गांव में कलेक्टर की ओर से पानी की टैंकर भेजा गया है।

    दूध-पानी की सप्लाई तक बंद
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    मामला कृष्णा जिले के चिंताकोल्लू गांव का है, जहां एक हफ्ते पहले 45 साल के नामचार्या और 32 साल की मरियम्मा की मौत हो गई थी। इसके बाद अफवाह फैली की इनकी मौत स्वाइन फ्लू फैलने की वजह से हो गई।
    - इसके बाद से हाल ये है कि पड़ोसी गांव के लोगों ने इनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया है। यहां के लोगों को न पड़ोसी गांव में घुसने दिया जा रहा है और न वहीं दूसरे गांव के लोग यहां आ रहे हैं।
    - गांव के लोगों का आरोप है कि उन्हें बस से जबरदस्ती उतार दिया गया था। इतना ही नहीं बच्चों को लेने के लिए स्कूल की बसें भी नहीं आ रही है।
    - गांव में दूधवाले दूध की सप्लाई नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही पानी की सप्लाई भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में जिले के कलेक्टर की ओर से पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं।
    - गांव में रहने वाले एक बच्चे ने बताया कि वो और उसके साथी स्कूल नहीं जा रहे हैं क्योंकि उन्हें लेने के लिए स्कूल बस आ ही नहीं रही हैं। प्रिसिंपल ने उनकी छुट्टी कर दी है।

    दूर करेंगे गांववालों का शक
    - हालांकि, लोकल डॉक्टर्स का कहना है कि जांच में ऐसा कुछ नहीं निकला है और उनकी मौत स्वाइन फ्लू से नहीं हुई है लेकिन पड़ोसी गांव के लोग डॉक्टर्स की बात मानने को राजी नहीं हैं।
    - डॉक्टर का कहना है कि मरीज की मौत हार्च अटैक की वजह से हुई है। इनके शरीर से हमें स्वाइन फ्लू के कोई लक्षण नहीं मिले हैं। हम गांव के लोगों का डर खत्म करने के लिए इसका सार्वजनिक ऐलान करेंगे।
    - जिला कलेक्टर ने स्थिति का जायजा लिया और एक मेडिकल टीम को वहां जांच करने के लिए भेजा है ताकि पड़ोसी गांववालों के शक को दूर किया जा सके।
    - जिला मुख्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि अगर अब भी गांव वाले बायकॉट करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



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    Andhra Pradesh Village Face Social Boycott After swine flu Rumour
    Andhra Pradesh Village Face Social Boycott After swine flu Rumour
    Andhra Pradesh Village Face Social Boycott After swine flu Rumour
    Andhra Pradesh Village Face Social Boycott After swine flu Rumour

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    20 साल के बेटे ने मां के सामने रखी एक डिमांड, मना करने पर गुस्से से भर गया और करने लगा झगड़ा


    बेंगलुरू. कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां 20 साल के लड़के अपनी मां को इसलिए आग लगा दी क्योंकि उसने बेटे को पैसे देने से मना कर दिया था। बेटा घटना को अंजाम देने के बाद से मौके से फरार है। बता दें, इससे दो दिन पहले ही बेंगलुरु में ही 17 साल के एक लड़के का मां को झाड़ू से पीटने का वीडियो वायरल हुआ था।

    मां से की पैसों की डिमांड
    - घटना सदाशिवनगर इलाके की है। आरोपी का नाम उत्तम कुमार और उसकी मां का नाम भारती बताया जा रहा है। बीते 6 दिसंबर को पैसों को लेकर मां-बेटे के बीच काफी बहस हुई थी।
    - आरोपी उत्तम ने अपनी मां के सामने पैसों की डिमांड रखी थी लेकिन महिला ने ये सोचकर पैसे देने से इनकार कर दिया कि कहीं वो इन पैसों की भी शराब न पी जाए।
    - पैसे न मिलने से नाराज बेटा पहले पेट्रोल लाने मार्केट गया और फिर अपनी मां के ऊपर छिड़कर आग लगा दी। वहीं बगल के रूम में बैठा आरोपी उत्तम का पिता सब सुनता रहा।
    - आग लगते ही भारती ने मदद की गुहार लगाई, जिसकी आवाज सुनकर उसका पति उसे बचाने पहुंचा और झुलसी हालत में पत्नी को लेकर विक्टोरिया अस्पताल पहुंचा।

    बुरी तरह झुलस गया शरीर
    - महिला का इलाज कर रहे डॉक्टर्स ने बताया है कि इस घटना में उसका चेस्ट, चेहरा और हाथ बुरी तरह झुलस गया है। हालांकि, बाद में बताया कि वो खतरे से बाहर है।
    - इसके बाद उत्तम के पिता ने उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद से उसकी तलाश की जा रही है। पिता ने ये भी बताया कि घटना के वक्त उत्तम नशे में था।



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    Mother denies money for alcohol and son sets her on fire
    Mother denies money for alcohol and son sets her on fire

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    आज से 5 गुना महंगा हुआ ताजमहल के अंदर जाना, 50 रुपए के टिकट की कीमत हुई 250 रुपए; फिर भी आप 50 रुपए में ऐसे घूम सकते हैं ताजमहल


    न्यूज डेस्क। आज से ताजमहल घूमने का टिकट 5 गुना महंगा हो गया है। यानी आप इसे घूमने जा रहे हैं तब बजट ज्यादा बनाकर चलना होगा। मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर के आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 8 अगस्त को ताजमहल परिसर में एंट्री के लिए लगने वाली फीस को बढ़ाया था। उस समय घरेलू पर्यटकों के टिकट में 10 रुपए और विदेश पर्यटकों के टिकट में 100 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी।

    इतने रुपए हुई नई एंट्री फीस

    > पहले ताजमहल घूमने की फीस 50 रुपए थी, जिसे बढ़ाकर अब 250 रुपए कर दिया है।
    > विदेशी पर्यटकों की फीस 1100 रुपए से बढ़ाकर 1300 रुपए कर दी गई है।

    इस बार में हमने पर्यटन कार्यालय आगरा में बात की जब उन्होंने बताया कि ताजमहल का टिकट अभी भी 50 रुपए है, लेकिन यदि उसके अंदर के दो मकबरे को देखना है तब उसके लिए 200 रुपए एक्सट्रा खर्च करने होंगे। इस तरह से टिकट की फीस 250 रुपए हो जाती है। हालांकि, पर्यटक 50 रुपए का टिकट लेकर भी ताजमहल घूम सकता है, उसे मकबरे देखने के लिए एंट्री नहीं मिलेगी। बता दें कि ताजमहल के मुख्य गुम्बद के अंदर शाहजहां और मुमताज की कब्रें हैं।

    ऑनलाइन टिकट लेने पर बेनीफिट

    > ताजमहल का टिकट asi.payumoney.com वेबसाइट से ऑनलाइन बुक कर सकते हैं।
    > इंडियन टूरिस्ट को ऑनलाइन टिकट में 5 रुपए का डिस्काउंट दिया जाता है।
    > विदेशी टूरिस्ट को ऑनलाइन टिकट में 50 रुपए का डिस्काउंट दिया जाता है।
    > भारतीय और विदेशी टूरिस्ट के 15 साल के कम उम्र के बच्चों का टिकट नहीं लगेगा।
    > ये टिकट 3 घंटे के लिए वैलिड होता है।



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    Entry To Taj Mahal Main Mausoleum To Cost An Extra Rs. 200

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    विपक्ष की बैठक में 17 दल के नेता पहुंचे, सपा-बसपा शामिल नहीं


    नई दिल्ली. विपक्षी दलों ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की कोशिशें तेज कर दी हैं। आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को विपक्षी दलों की बैठक बुलाई। इसमें 17 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। इस बैठक में बसपा और सपा से कोई नेता नहीं पहुंचा। हालांकि, मुलायम सिंह ने रविवार को कहा था कि वे इसमें शामिल होंगे।

    बैठक के बाद ममता ने कहा, ''भाजपा तानाशाह की तरह काम कर रही है, उसके खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे को लेकर कहा कि संवैधानिक संस्थाएं बर्बाद हो चुकी हैं। यह चकित करने वाली खबर है।''

    5 राज्यों में चुनाव के चलते टली थी बैठक

    नायडू 2019 लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ सभी क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में उन्होेंने कहा था कि जो पार्टियां देश को बचाना चाहती हैं, उन्हें साथ काम करना होगा। पहले यहबैठक22 नवंबर को रखी गई थी, लेकिन 5 राज्यों में चुनाव के चलते इसे टाल दिया गया था।

    इसबैठक का मुख्य एजेंडा गैर-भाजपा फ्रंट रहा। विपक्षी दलों की इस बैठक में शीतकालीन सत्र को लेकर भी चर्चा हुई। सभी दलों नेआगामी सत्र में किसान, बेरोजगारी, राफेल और महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार को घेरने कीरणनीति बनाई। इसके अलावा बैठक मेंजीएसटी के प्रभावऔर संविधान पर खतरे को लेकर भी चर्चा हुई।

    सोनिया-मनमोहन भी शामिल हुए

    शीतकालीन सत्र के एक दिन पहले बुलाई गई इस बैठक में सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए। इसके अलावाबैठक में कांग्रेस नेता अहमद पटेल, एके एंटोनी, गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत भी मौजूद रहे।

    17 दल के नेता रहे मौजूद

    बैठक मेंसोनिया, राहुल के अलावाजेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, प.बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी और भाकपा के महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

    द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) अध्यक्ष एम के स्टालिन, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव,असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बदरुद्दीन अजमल, झारखंड विकास मोर्चा के बाबुलाल मरांडी और लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) के नेता शरद यादव भी इस बैठक में शामिल हुए।

    खुद को बचाने के लिए साथ आ रहीं विपक्षीपार्टियां- भाजपा

    भाजपा ने कहा कि विपक्ष की यह बैठक केवल फोटो खिचाने के लिए है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि भ्रष्ट विपक्षी दल खुद को बचाने के लिए साथ आ रहे हैं। वहीं, भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि महागठबंधन को पहले प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय करना चाहिए, इसके बाद उन्हें मोदी को हटाने के बारे में सोचना चाहिए।



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    बैठक में मौजूद नेता।
    कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में कई पार्टियों के नेता शामिल हुए थे।

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    उपेंद्र कुशवाहा का मोदी कैबिनेट से इस्तीफा, एनडीए भी छोड़ी; कहा- महागठबंधन का विकल्प खुला


    पटना.राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) प्रमुखउपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। कुशवाहा केंद्र में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री थे। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया। कुशवाहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मोदीजी प्रधानमंत्री बने तो बिहार को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन, मोदीजी दलितों-ओबीसी की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।कुशवाहा ने कहा कि हम एनडीए से अलग हुए हैं। हमारे लिए कई विकल्प खुले हुए हैं। महागठबंधन और थर्ड फ्रंट पर भी विचार कर सकते हैं।

    1. कुशवाहा ने कहा- हमने उम्मीद की थी कि मोदीजी प्रधानमंत्री बनेंगे तो जिम्मेदारी वाली सरकार बनेगी और सामाजिक न्याय के प्रति अपनी बातों को याद रखेगी। बिहार के लोगों की भी इस सरकार से विशेष उम्मीदें थीं। स्पेशल पैकेज के लिए मोदीजी ने खुद घोषणा की थी। सबको लगा था कि अच्छे दिन आएंगे।

    2. उन्होंने कहा- एनडीए का हिस्सा होने के कारण मैं भी मंत्री परिषद का सदस्य बना। जो उम्मीद थी मेरी और बिहार के लोगों की, उन उम्मीदों की कसौटी पर मोदीजी प्रधानमंत्री के तौर पर खरे नहीं उतरे। स्पेशल पैकेज अभी तक नहीं मिला। बिहार आज भी वहीं खड़ा है,जहां पहले था। शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चौपट है।

    3. उन्होंने कहा- जातीय जनगणना प्रकाशित होगी, यह हमारी मांग थी। जब एनडीए की सरकार आई तो कहा गया कि जातीय जनगणना का काम पूरी तरह से नहीं हुआ है, इसमें गड़बड़ियां हुई हैं। हमने कहा कि इसे सुधार कर रिपोर्ट प्रकाशित की जाए। हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी ओबीसी वर्ग के हाथ निराशा ही लगी है। जनगणना होती तो विकास के लिए योजनाएं तय की जातीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    4. 2019 चुनाव के मद्देनजर जदयू के एनडीए में शामिल होने के बाद सीट शेयरिंग पर कुशवाहा सहमत नहीं थे। कुशवाहा के मुताबिक, गठबंधन में उन्हें कम सीटें मिल रही थीं। ऐसे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करने की कोशिश भी की थी, हालांकि उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया।

    5. कुशवाहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा- भाजपा के साथ उनकी सीटों को लेकर बात नहीं बनी। बिहार सरकार फेल हो गई। नीतीशजी का एजेंडा मुझे और मेरी पार्टी को बर्बाद करने का है। यह सब भाजपा ने शुरू किया। बिहार के चुनाव में सभी सहयोगी पार्टियों की सीटें बढ़ीं, लेकिन रालोसपा के साथ अन्याय किया गया।

    6. लोकसभा चुनाव को लेकर सीटों के बंटवारे पर कुशवाहा झुकने को तैयार नहीं हैं। कुशवाहा का कहना था कि रालोसपा ने 2014 में 4 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें 3 सीटों पर जीत हुई थी। इस बार हम 3 सीटों से कम पर चुनाव नहीं लड़ेंगे।एक इंटरव्यू में तो कुशवाहा में यहां तक कह दिया था कि नीतीश को मुख्यमंत्री का पद छोड़ देना चाहिए।

    7. उपेंद्र कुशवाहा रोहसात जिले के काराकाट लोकसभा सीट से सांसद हैं। रोहसात के साथ समस्तीपुर, वैशाली, औरंगाबाद, भभुआ, अरवल और कैमूर में कुशवाहा वोटर्स का असर है।

      • भाजपा - 22
      • लोजपा - 06
      • रालोसपा - 03
      • जदयू - 02
      • कांग्रेस - 02
      • राजद - 04
      • एनसीपी - 01
      • जदयू - 71
      • राजद - 80
      • कांग्रेस - 27
      • भाजपा - 53
      • लोजपा - 02
      • रालोसपा - 02
      • हम - 01


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        उपेंद्र कुशवाहा

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    मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने किया दावा, कहा- 'हम 140 सीटें जीतेंगे'


    नेशनल डेस्क. मध्य प्रदेश समेत पांच राज्यों में कल विधानसभा के नतीजे आएंगे। नतीजों से पहले तमाम राजनीतिक पार्टियां अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही हैं। इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से सवाल पूछा गया कि अगर कांग्रेस सरकार में आती है तो कौन मुख्यमंत्री बनेगा? जवाब में कमलनाथ ने कहा 'हम 140 सीटें जीतेंगे, कल तक इंतजार करिए, सब कुछ कल तक साफ हो जाएगा'।

    "भाजपा मतगणना में करेगी गड़बड़ी" : कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में इस बार कांग्रेस की सरकार बन रही है। जिस प्रकार की सावधानी और सतर्कता पिछले 12 दिनों से स्ट्रांग रूम के सामने कांग्रेस कार्यकर्ता बरत रखे हैं, मतगणना के दौरान और चौकस रहने की जरूरत है। चुनाव हार रही भाजपा मतगणना के दिन तमाम हथकंडे अपनाएगी। बाधाएं उत्पन्न करेगी। कांग्रेस जनों का मनोबल तोड़ने का प्रयास करेगी। गड़बड़ी करने का प्रयास करेगी लेकिन मुस्तैद रहकर इनका डटकर मुकाबला करें।

    सिंधिया ने क्या जवाब दिया था :इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सीएम बनने के सवाल पर कहा था कि मेरा मोह किसी पद के साथ नहीं है। पहले हम राज्य में जीत दर्ज कर लेंगे, तब फिर राहुल गांधी तय करेंगे कि राज्य में कांग्रेस का सीएम कौन होगा।

    "भाजपा नेता सच्चाई जानते हैं" : कमलनाथ ने कहा कि भाजपा के नेतागण ख़ुद सच्चाई जानते हैं कि प्रदेश की जनता ने उनकी विदाई तय कर दी है। इसलिये बौखलाहट में वे अनर्गल बयानबाजियाँ कर रहे है।



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    What Reply When asked to Kamal Nath will be the CM if Congress wins in MP

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    सेंसेक्स 714 अंक गिरकर 34960 पर बंद, 5 राज्यों के चुनाव नतीजों से पहले बिकवाली


    मुंबई. सोमवार को शेयर बाजार में तेज गिरावट आई। सेंसेक्स 713.53 अंक लुढ़क कर 34,959.72 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसने 34,915.77 का निचला स्तर छुआ। निफ्टी की क्लोजिंग 205.25 प्वाइंट नीचे 10,488.45 के स्तर पर हुई। इंट्रा-डे में यह 10,474.95 तक फिसला। घरेलू राजनीतिक वजहों और विदेशों से कमजोर संकेतों की वजह से बाजार में बिकवाली बढ़ गई।

    1. सेंसेक्स के 30 में 28 शेयर नुकसान में रहे। निफ्टी के 50 में से 44 शेयर नुकसान गिरावट के साथ बंद हुए। कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर 6% से ज्यादा लुढ़क गया।

    2. बीएसई और एनएसई पर सभी सेक्टर इंडेक्स नुकसान में रहे। रियल्टी, बैंकिंग, मेटल, फार्मा और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में ज्यादा बिकवाली हुई।

    3. निफ्टी के टॉप-5 लूजर

      शेयर गिरावट
      कोटक बैंक 6.11%
      इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस 4.79%
      रिलायंस 4.30%
      अल्ट्राटेक सीमेंट 4.01%
      भारती एयरटेल 3.93%
      • निफ्टी के टॉप-5 गेनर

        शेयर बढ़त
        आईओसी 3.51%
        बीपीसीएल 1.72%
        कोल इंडिया 0.32%
        हिंदुस्तान पेट्रोलियम 0.29%
        मारुति 0.15%
      • बाजार में गिरावट की 4 वजह

        • चीन की कंपनी हुवावे की सीएफओ की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे दुनियाभर के बाजारों में गिरावट आई। ग्लोबल इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका से भी निवेशकों ने बिकवाली की।
        • तेल उत्पादक देशों के उत्पादन घटाने के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.68% तेजी के साथ 62.09 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। शुक्रवार को भी इसमें 4% तेजी आई थी।
        • डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को 59 पैसे गिरकर 71.40 पर आ गया। शुक्रवार को 70.82 पर बंद हुआ था। मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने की वजह से रुपए में कमजोरी आई।
        • पांच राज्यों के चुनाव नतीजों से पहले निवेशकों के मन में आशंका बनी हुई है। शुक्रवार को एग्जिट पोल के नतीजों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को लेकर मिले-जुले आंकड़े सामने आए थे।


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          Sensex cracks over 650 points Nifty drops below 10500 level

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      उपेंद्र कुशवाहा का मोदी कैबिनेट से इस्तीफा, एनडीए भी छोड़ी; कहा- महागठबंधन का विकल्प खुला


      नेशनल डेस्क/पटना: रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा ने आज मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। कुशवाहा केंद्र में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया। कुशवाहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मोदीजी प्रधानमंत्री बने तो बिहार को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन, मोदीजी दलितों-ओबीसी की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। कुशवाहा ने कहा कि हम एनडीए से अलग हुए हैं। हमारे लिए कई विकल्प खुले हुए हैं। महागठबंधन और थर्ड फ्रंट पर भी विचार कर सकते हैं।

      बिहार आज भी वहीं है, जहां पहले था- कुशवाहा
      कुशवाहा ने कहा- हमने उम्मीद की थी कि मोदीजी प्रधानमंत्री बनेंगे तो जिम्मेदारी वाली सरकार बनेगी और सामाजिक न्याय के प्रति अपनी बातों को याद रखेगी। बिहार के लोगों की भी इस सरकार से विशेष उम्मीदें थीं। स्पेशल पैकेज के लिए मोदीजी ने खुद घोषणा की थी। सबको लगा था कि अच्छे दिन आएंगे।

      - उन्होंने कहा- एनडीए का हिस्सा होने के कारण मैं भी मंत्री परिषद का सदस्य बना। जो उम्मीद थी मेरी और बिहार के लोगों की, उन उम्मीदों की कसौटी पर मोदीजी प्रधानमंत्री के तौर पर खरे नहीं उतरे। स्पेशल पैकेज अभी तक नहीं मिला। बिहार आज भी वहीं खड़ा है,जहां पहले था।

      शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चौपट है।

      - उन्होंने कहा- जातीय जनगणना प्रकाशित होगी, यह हमारी मांग थी। जब एनडीए की सरकार आई तो कहा गया कि जातीय जनगणना का काम पूरी तरह से नहीं हुआ है, इसमें गड़बड़ियां हुई हैं। हमने कहा कि इसे सुधार कर रिपोर्ट प्रकाशित की जाए। हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी ओबीसी वर्ग के हाथ निराशा ही लगी है। जनगणना होती तो विकास के लिए योजनाएं तय की जातीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

      नीतीश का एजेंडा मुझे बर्बाद करने का- कुशवाहा
      2019 चुनाव के मद्देनजर जदयू के एनडीए में शामिल होने के बाद सीट शेयरिंग पर कुशवाहा सहमत नहीं थे। कुशवाहा के मुताबिक, गठबंधन में उन्हें कम सीटें मिल रही थीं। ऐसे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करने की कोशिश भी की थी, हालांकि उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया।

      - कुशवाहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा- भाजपा के साथ उनकी सीटों को लेकर बात नहीं बनी। बिहार सरकार फेल हो गई। नीतीशजी का एजेंडा मुझे और मेरी पार्टी को बर्बाद करने का है। यह सब भाजपा ने शुरू किया। बिहार के चुनाव में सभी सहयोगी पार्टियों की सीटें बढ़ीं, लेकिन रालोसपा के साथ अन्याय किया गया।

      - लोकसभा चुनाव को लेकर सीटों के बंटवारे पर कुशवाहा झुकने को तैयार नहीं हैं। कुशवाहा का कहना था कि रालोसपा ने 2014 में 4 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें 3 सीटों पर जीत हुई थी। इस बार हम 3 सीटों से कम पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। एक इंटरव्यू में तो कुशवाहा में यहां तक कह दिया था कि नीतीश को मुख्यमंत्री का पद छोड़ देना चाहिए।

      इन जिलों में कुशवाहा वोट का असर
      उपेंद्र कुशवाहा रोहसात जिले के काराकाट लोकसभा सीट से सांसद हैं। रोहसात के साथ समस्तीपुर, वैशाली, औरंगाबाद, भभुआ, अरवल और कैमूर में कुशवाहा वोटर्स का असर है।

      2014 लोकसभा चुनाव परिणाम
      2014 में बिहार में भाजपा ने 22, लोजपा ने 06, रालोसपा ने 03, जदयू ने 02, कांग्रेस 02, राजद- 04 और एनसीपी ने 01 सीट जीती थी। वहीं 2015 में बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में जदयू ने 71 और राजद ने 80 सीटें जीती थीं, वहीं कांग्रेस ने 27 और भाजपा ने 53 सीट पर जीत हासिल की थी। विधानसभा चुनाव में लोजपा ने 02 और रालोसपा ने 02 सीट जीती थीं, वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी हम ने एक सीट जीती थी।



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      RLSP Chief Upendra Kushwaha resignation from Union Minister

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      दुबई से लाए गए सोने की स्मगलिंग करते धरा गया आरोपी, कस्टम अफसरों ने एयरपोर्ट से पकड़ा, पहले भी ऐसे कई बार ला चुका है सोना


      दिल्ली. दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 से कस्टम अफसरों ने एक गोल्ड स्मगलर को पकड़ा है। उसके पास से 1 करोड़ 74 लाख रुपए का गोल्ड बरामद किया गया है। वो गाड़ियों की शाफ्ट के बीच में सोना छिपाकर ला रहा था। शाफ्ट गाड़ियों का एक ऐसा पार्ट होता है जो इंजन में लगा होता है। ये इंजन में लगे वाल्वों को खोलने और बंद करने का काम करता है। आरोपी को एक सूचना के आधार पर पकड़ा गया।

      शाफ्ट के अंदर छिपाकर रखा था सोना
      - कस्टम अफसरों ने बताया कि ये सोना दुबई से मुंबई लाया गया था। मुंबई एयरपोर्ट पर आरोपी ने कस्टम अफसरों को धोखा दे दिया था और गो एयर की फ्लाइट से इसे दिल्ली ले आए।
      - आरोपी टर्मिनल-2 से जब बाहर निकल रहा था तो इसे पकड़ लिया गया। हालांकि, आरोपी ने अपने पास सोना होने की बात से इनकार कर दिया।
      - इसके बाद जब पुलिस ने लगेज की जांच की तो उसमें एक पुरानी जंग लगी गाड़ियों की शाफ्ट निकली। शाफ्ट देखने के बाद अफसरों को भी लगा कि कहीं उन्हें कोई गलत सूचना तो नहीं मिली।
      - अफसरों ने आरोपी से एक बार फिर पूछताछ की पर इस बार भी उसने कुछ नहीं बताया। फिर अफसरों ने शाफ्ट को कटवाने का फैसला किया और जैसे ही इसे कटवाया गया, सच्चाई सामने आ गई।
      - आरोपी ने शाफ्ट के अंदर के खोखले हिस्से में सोना छिपाकर रखा था। उसने ये सोना पिघलाकर शाफ्ट के इस हिस्से में भरवा दिया था। इसके ऊपर और नीचे के हिस्से को भी कवर कर दिया था, जिससे पता न चल सके।
      - कस्टम अफसरों ने जब शाफ्ट में भरा सोना निकलवाया तो इसका वजन 5 किलो 620 ग्राम निकला। मार्केट में इसकी कीमत 1 करोड़ 74 लाख रुपए से अधिक बताई जा रही है।

      दुबई से आया था ये सोना
      - जांच में पता चला है कि आरोपी बुलंदशहर का रहने वाला है। वो चांदनी चौक के कुछ सोनारों के लिए सोने की स्मगलिंग करता है। ये सोना पहले दुबई से मुंबई लाया गया था और फिर इसे दिल्ली लाया जा रहा था।
      - पूछताछ में ये भी सामने आया है कि आरोपी इस तरह पहले भी पांच-छह बार गोल्ड ला चुका है। मुंबई और दिल्ली एयरपोर्ट से ही ये सोना बाहर निकाला चुका है लेकिन तब कोई इसे पकड़ नहीं पाया।
      - आरोपी से पूछताछ में चांदनी चौक के कुछ ज्वैलर्स के बारे में भी जानकारी मिली है, जो सोने की स्मगलिंग करवाते हैं या फिर स्मगलिंग से आया सोना खरीदते हैं।



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      man caught at Delhi IGI airport trying to smuggle gold in camshafts
      man caught at Delhi IGI airport trying to smuggle gold in camshafts
      man caught at Delhi IGI airport trying to smuggle gold in camshafts

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      टीचर के साथ एक प्रोग्राम के लिए जाने वाली थीं दोनों बहनें, तभी किसी बात को लेकर आपस में हो गया झगड़ा


      केंद्रापारा. उड़ीसा के केंद्रापारा जिले में एक लड़की ने मामूली सी बात सी बात पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है कि लड़की का अपनी बहन से कपड़ों को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया। लड़की कासीनाथ महाविद्यालय में पढ़ रही थी और क्लासिकल म्यूजिक भी सीख रही थी।

      छोटी बहन से हुआ था झगड़ा
      - घटना केंद्रापारा जिले के बारो गांव की है, जहां रहने वाली मोनालिशा और उसकी छोटी बहन दोनों एक साथ भाबाग्रही कला निकेनत से क्लासिकल म्यूजिक सीख रही थीं।
      - दोनों एक साथ किसी प्रोग्राम के सिलसिले में अपनी टीचर के साथ रविवार को कटक जाने वाली थीं। पर इससे पहले ही दोनों के बीच कपड़ों को लेकर झगड़ा शुरू हो गया।
      - बात इतनी ज्यादा बढ़ गई कि मोनालिसा में खुदकुशी का कदम उठा लिया और उसने घर पर ही फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
      - घरवालों को जैसे ही पता चला तो वो उसे लेकर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल भागे, जहां से उसे एससीबी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया गया। यहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया।
      - बता दें, 8 दिसंबर को जिले में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के दौरा हुआ था, तब भी मोनालिशा ने अपनी परफॉर्मेंस दी थी।



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      Girl ends life after fight with sister over clothes in Odisha

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      अप्रैल-नवंबर में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 6.75 करोड़ रु रहा, पिछले साल से 16% ज्यादा


      नई दिल्ली. ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स (प्रत्यक्ष कर) कलेक्शन अप्रैल-नवंबर में 6.75 लाख करोड़ रुपए रहा। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 15.7% ज्यादा है। इस साल अप्रैल से नवंबर तक 1.23 लाख करोड़ रुपए के रिफंड जारी किए गए। यह पिछले साल अप्रैल-नवंबर के मुकाबले 20.8% ज्यादा है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी।

      कॉरपोरेट इनकम टैक्स कलेक्शन में 17.7% और पर्सनल इनकम टैक्स कलेक्शन में 18.3% बढ़ोतरी हुई है। रिफंड के बाद कॉरपोरेट इनकम टैक्स कलेक्शन की नेट ग्रोथ 18.4% रही। रिफंड एडजस्ट करने के बाद पर्सनल इनकम टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ 16% रही।

      वित्त मंत्रालय के मुताबिक पिछले साल अप्रैल-नवंबर के दौरान जो टैक्स कलेक्शन हुआ उसमें इनकम डिक्लेरेशन स्कीम की 10,833 करोड़ रुपए की रकम भी शामिल थी। लेकिन, इस साल ऐसा नहीं है।



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      Direct tax collections surge 16 percent in Apr Nov

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      लड़की को सेक्शुअली अब्यूज करने के मामले में पुलिस इंस्पेक्टर का बेटा अरेस्ट, अपने घर पर ही घटना को दिया अंजाम


      चेन्नई. तमिलनाडु के चेन्नई में एक युवक को 12 साल की लड़की को सेक्शुअली अब्यूज करने के मामले में अरेस्ट किया गया है। युवक सब इंस्पेक्टर का बेटा बताया जा रहा है और उसने घटना को पुलिस हाउसिंग क्वार्टर में मौजूद अपने घर पर ही अंजाम दिया। लड़की उसके नीचे वाले घर में रहती थी। लड़की ने जब अपने घर वालों को इसकी जानकारी दी, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

      छत पर बुलाकर दिखाने लगा अश्लील फोटो
      - मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 साल का प्रवीण और लड़की का परिवरा एक ही बिल्डिंग में ऊपर-नीचे के फ्लैट में रहता है। दोनों परिवार एक दूसरे को अच्छे से जानते भी हैं।
      - प्रवीण ने इसी का फायदा उठाते हुए लड़की को एक दिन छत पर बुलाया और उसे अपने फोन में अश्लील फोटोज दिखाने लगा। लड़की कुछ समझ नहीं पाई।
      - लड़की को लगा था कि वो उसे अपनी फैमिली की फोटोज दिखाने जा रहा है लेकिन लड़के की ये हरकत देख वो घबरा गई और अपने घर की ओर भागी।
      - उसने नीचे पहुंचकर अपने पेरेंट्स को बताया, जिसके बाद उसके घरवाले प्रवीण के परिवार के पास शिकायत लेकर पहुंचे। इसके बाद घरवालों ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी।
      - पुलिस ने प्रवीण को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेन्स एक्ट के तहत अरेस्ट कर लिया है। कोर्ट ने उसे ज्यूडीशियल कस्टडी में भेज दिया है।



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      Chennai cop son arrested for molesting and abusing minor girl

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      दिल्ली : बीमार भाई के लिए खाना लाने गया था युवक, लेकिन वापस नहीं लौटा, खबर मिली- किसी ने भाई को गोली मार दी है


      नेशनल डेस्क, दिल्ली. दिल्ली के मयूर विहार में पार्किंग को लेकर हुए विवाद में एक युवक को गोली मार दी गई। मौके पर ही युवक ने दम तोड़ दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विवाद कार और बाइक की पार्किंग के दौरान हुआ। आरोप है कि बाइकर ने गुस्से में कार का शीशा तोड़ दिया था, जिसके बाद कार के मालिक ने उसे गोली मार दी। घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

      खाना लाने गया था मृतक योगेश : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतक का नाम योगेश था। उसका भाई हॉस्पिटल में भर्ती है, वो बीमार भाई के लिए दुकान से खाना लाने के लिए गया था।

      कैसे शुरू हुआ विवाद :पुलिस के मुताबिक पार्किंग के वक्त योगेश की बाइक कार से टच कर गई, जिसके बाद कार के मालिक और योगेश के बीच विवाद हुआ। लेकिन कुछ देर बाद मामला शांत हो गया और योगेश शॉप के अंदर चला गया। थोड़ी देर बाद जब वो बाहर निकला तो फिर सो दोनों ने उससे बहस शुरू कर दी। इस दौरान कार मालिक ने उसपर फायरिंग कर दीं।

      सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विवाद के वक्त कार में दो शख्स थे। गोली मारने के बाद दोनों मौके से फरार हो गए। अब पुलिस आस-पास की दुकानों में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। दोनों आरोपियों की पहचान कर ली गई है, लेकिन अभी तक उनकी लोकेशन का पता नहीं चल सका है।



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      Man shot dead near Mayur Vihar in road rage incident in Delhi

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      अटॉर्नी जनरल ने कहा- सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच का दो अलग बातें करना खतरनाक


      नई दिल्ली. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा संवैधानिक नैतिकता की संकल्पना अपनाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर शीर्ष अदालत की एक बेंच दो तरह की बातें करे, एक में अनुमति दी जाए, जबकि दूसरी में नहींतो यह खतरनाक है। वे सबरीमाला मुद्दे पर 28 सितंबर को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोल रहे थे।

      1. वेणुगोपाल शनिवार को यहां जे दादाचनजी स्मारक संवाद में लोगों काे संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सबरीमाला मामले में जस्टिस इंदू मल्होत्रा के फैसले को सूझबूझ वाला बताया।

      2. उन्होंने कहा, ‘‘सबरीमला मामले में जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने संवैधानिक नैतिकता को माना और कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म के पालन का अधिकार है और कोई इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता, अदालतें धर्म के मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं।’'

      3. तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली पांच जजों की बेंच ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर मामले में 4:1 से फैसला दिया था। इसमें सभी उम्र की महिलाओं को इस मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।

      4. अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘‘मैं यह सब इस डर के कारण कह रहा हूं कि संवैधानिक नैतिकता की इस नई संकल्पना का अब कानूनों को जांचने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा सकता है।’’



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          केके वेणुगोपाल, अटॉर्नी जनरल

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      पूर्व आईजी की डॉक्टर बेटी ने की खुदकुशी, होने वाली थी डीएम से शादी


      पटना. रिटायर आईजी उमा शंकर सुधांशु की छोटी बेटी डॉक्टर स्निग्धा ने रविवार की सुबह पटना म्यूजियम के सामने स्थित उदयगिरी अपार्टमेंट के चौदहवें तल्ले से छलांग लगाकर जान दे दी। यह घटना रविवार की सुबह करीब आठ बजे घटी। अपार्टमेंट के गार्ड ने तत्काल पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस के पहुंचने के बाद युवती की पहचान हुई। कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।

      शादी से खुश नहीं थीस्निग्धा

      पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि सोमवार को डॉक्टर स्निग्धा की किशनगंज के डीएम महेंद्र कुमार से शादी होने वाली थी। उसी दिन बहुभोज भी था। 8 दिसंबर को ही भागवतनगर में तिलक समारोह हुआ था। रविवार को मड़वा का रस्म होना था। बताया गया कि स्निग्धा इस शादी से खुश नहीं थी।

      डीएम का परिवार भूतनाथ रोड के आदर्श कालोनी में रहता है। स्निग्धा का परिवार पटेल नगर के स्नेही पथ में रहता है। स्निग्धा सिलीगुड़ी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पास की थी। अभी विवेकानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से एमएस (गाइनी) कर रही थी। स्निग्धा की बड़ी बहन स्वधा इंजीनियर हैं। उनके पति भी आईएएस हैं। स्निग्धा के कोई भाई नहीं है।


      मौत से उठ रहे 5 सवाल

      1. आखिर स्निग्धा ने उदयगिरी अपार्टमेंट को ही क्यों चुना
      2. क्या उन्हें पता था कि छत पर कुर्सी है, सिर्फ टूल की जरूरत है
      3. तिलक के बाद व शादी से पहले स्निग्धा ने क्यों उठाया ऐसा कदम
      4. शादी से क्यों नाखुश थी, डीएम से क्यों शादी नहीं करना चाहती थी
      5. आखिरी बार उसने क्या बात की पिता से
      1. एसएसपी मनु महाराज ने कहा कि यह सुसाइड का मामला है। मृतिका का मोबाइल खंगाला जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज में वह अकेले अपार्टमेंट में जाती दिख रही है। हाथ में स्टूल है। स्निग्धा मॉर्निंग वाक के ड्रेस में थी और ऊपर से ब्लैक जैकेट थी।

      2. शव अपार्टमेंट के मुख्य गेट की बाईं ओर बने पंप रूम की छत से मिला। शव पेट के बल गिरा था और कई हिस्से मुड़ गए थे। चारों ओर खून पसरा था।

      3. शव और दीवार की दूरी कम होने से एफएसएल टीम को धक्का देने की आशंका हुई। फिर छत पर जहां कुर्सी रखी हुई थी वहीं से एक पुतला गिराकर देखा। लेकिन पुतला शव की जगह पर नहीं गिरा। एफएसएल की रिपोर्ट आनी बाकी है।

      4. स्निग्धा 7.45 बजे सुबह उदयगिरी अपार्टमेंट पहुंची थी। गार्ड मिथिलेश ने उनकी कार को रोक दिया। स्निग्धा बाहर निकलीं और कहा कि बारहवीं मंजिल पर रहने वाली एक महिला आईएएस के यहां जाना है। तब स्निग्धा स्टूल लेकर अकेले जाने लगी। गार्ड के पूछने पर स्निग्धा ने कहा कि स्टूल मैडम को ही देना है। इसके बाद गार्ड ने विजिटर रजिस्टर में बिना साइन कराए ही उन्हें जाने दे दिया।

      5. स्निग्धा 12वें पर न जाकर सीधे 14वें तल्ले पर पहुंची और वहां रखी कुर्सी पर स्टूल रखकर वहां से छलांग लगा दी। गार्ड ने कहा कि जब जोर की आवाज आई तब बाहर आकर देखा तो पंप रूम की छत पर एक लड़की का शव पड़ा था।

      6. इसके बाद वहां स्थानीय लोगों की भीड़ लग गई। अपार्टमेंट की छत से पुलिस ने एक कुर्सी, टूल, चश्मा और स्निग्धा का फोन बरामद किया है। सूत्रों की मानें तो आखिरी बार स्निग्धा ने अपने पिता से बात की थी। जानकारी मिलते ही आला अफसर व पूर्व आईजी तथा उनके परिजन भी भागे-भागे घटनास्थल पहुंच गए।

      7. ड्राइवर ने बताया कि वह मैडम के साथ कई दिनों से शहर के विभिन्न इलाकों में घूम रहा था। मैडम आईजीआईएमएस, एयरपोर्ट और बिस्कोमान के पास भी पिछले दो दिनों में गई थीं। दो दिन पहले ही उन्होंने टूल खरीदा था। परिवार के एक सदस्य के पूछने पर कहा था कि टूल किसी को देना है। वह उदयगिरी अपार्टमेंट दो बार पहले भी आ चुकी थी।



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          यह डॉक्टर स्निग्धा के हाथों की तस्वीर है। इसमें मेंहदी लगी हुई है। शनिवार को तिलक समारोह हुआ था और रविवार को मड़वा की रस्म होनी थी।
          इंगेजमेंट सेरेमनी में स्निग्धा व डीएम महेंद्र कुमार।
          घटनास्थल पर जांच करते एसएसपी मनु महाराज।
          स्निग्धा की शादी का कार्ड।
          स्निग्धा ने इसी कुर्सी पर चढ़कर की आत्महत्या।

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      बियोंसे ने 60 डांसर्स के साथ परफॉर्म किया, मेहमानों ने फूलों की होली खेली


      उदयपुर. देश के सबसे बड़े कारोबारी मुकेश अंबानी की बेटी ईशा की प्री वेडिंग सेरेमनी में रविवार रात हॉलीवुड सिंगर बियोंसे नॉल्स ने सिटी पैलेस के भव्य सेट पर परफॉर्मेँस दी। उन्होंने डेंजर्सली इन लव विद यू जैसे अपने पॉपुलर गानों पर प्रस्तुति दी। इनके साथ करीब 60 डांसर्स थे। यहां मेहमानों के खास गाला डिनर रखा गया था। इससे पहले दिन में कार्निवल के दौरान होटल ट्राइडेंट में मेहमानों ने देशभर से मंगाए विभिन्न फूलों से जमकर होली खेली।

      होटल ट्राइडेंट मेंरविवार सुबह करीब 11 बजे मेहमानों के लिए कार्निवल शुरू हुआ, जो शाम पांच बजे तक चला। कार्निवल में स्पेशल थीम के अनुसार राजस्थानी-गुजराती सहित पूरे भारत की संस्कृति की सौंधी महक बिखरी रही। देश-विदेश से आए वीवीआईपी मेहमानों ने यहां खरीदारी की और फूलों की होली खेली। इस कार्निवल में राजस्थानी खान-पान, पहनावे के अलावा 108 स्टॉल्स लगाए गए, जिन पर ज्वैलरी, बैंगल्स, फुटवीयर, पॉटरी सहित जयपुर के जेवर, जयपुर-उदयपुर और माउंट आबू से मंगाए हैंडीक्राफ्ट आइटम, मारवाड़ की चूड़ियां, प्रदेश की परंपरागत मोजड़ी-जूतियां और हैंडीक्राफ्ट उत्पाद थे। मेहमानों ने इन चीजों की खरीदारी की।

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      मुकेश ने कहा- आनंद मेरी तरह हैं
      इससे पहले दिन संगीत समारोह के दौरान करण जौहर ने उद्योगपति मुकेश अंबानी से आनंद पीरामल का सीक्रेट पूछा तो मुकेश ने कहा कि ईशा को लगता है कि आनंद पीरामल मेरी तरह हैं और मुझे भी ऐसा ही लगता है। संगीत सेरेमनी में नीता अंबानी ने देर रात सोलो डांस किया। वे दोनों बेटों आकाश अनंत के साथ भी नाचीं।झुंझुनूं का रहने वाला है पीरामल परिवार : ईशा के मंगेतर आनंद पीरामल झुंझुनूं के बागड़ के सेठ पीरामल के पड़पोते हैं। यहां आज भी सेठ पीरामल की हवेली और घर हैं। सेठ पीरामल बगड़ से बरसों पहले व्यापार के लिए मुंबई चले गए थे। पीरामल की अगली पीढ़ी के लोग बगड़ आते रहते हैं।

      सितारे शादी में शरीक होकर लौट

      अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा,पति निक जोनास के साथ, सलमान खान, कैटरीना कैफ भी रवाना हो गए। इसके अलावा,कांग्रेस नेता प्रफुल्ल पटेल, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव, जॉन अब्राहम और उनकी पत्नी प्रिया, महाराष्ट्र केमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस रवाना हो गए।

      अब 12 को शादी, 14 को रिसेप्शन पार्टी
      उदयपुर में दो दिन की भव्य प्री वेडिंग सेरेमनी के बाद 12 दिसंबर को मुंबई में अंबानी के निवास एंटीलिया में ईशा और आनंद हिंदू रीति-रिवाजों से शादी के बंधन में बंधेंगे। जानकारी के अनुसार शादी एंटीलिया के ग्राउंड फ्लोर में होगी जहां लॉन में शादी का मंडप तैयार होगा। वहीं, दोनों सात फेरे लेंगे और शादी की अन्य रस्में पूरी होंगी। शादी समारोह में सिर्फ अंबानी- पीरामल परिवार के सदस्य और उनके बेहद करीबी लोग ही शामिल होंगे। इसके बाद 14 को मुंबई में ही जीयो गार्डन बीकेसी (बांद्रा- कुर्ला कॉम्पलेक्स) में रिसेप्शन पार्टी होगी। शाम 7.30 से शुरू होने वाली पार्टी में मेहमानों के लिए फॉर्मल ड्रेस कोड रखा गया है। रिसेप्शन पार्टी में एआर रहमान परफॉर्म
      करेंगे।

      संगीत समारोह में जमकर थिरके अंबानी-पीरामल परिवार

      संगीत समारोह में अंबानी और पीरामल परिवार के साथ शाहरुख, आमिर और अभिषेक-ऐश्वर्या बच्चनसमेत बॉलीवुड की हस्तियों ने परफॉर्मेंस दी।



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      पॉप स्टार बियोंसे नोल्से ने रविवार को सिटी पैलेस में परफॉर्मेंस दीं।
      ईशा अंबानी की फेवरेट सिंगर हैं बेयोंसे। उन्होंने करीब 5 से 7 गानों पर परफॉर्मेंस दी।
      संगीत समारोह शनिवार को हुआ। शाहरुख के साथ अंबानी और पीरामल परिवार ने डांस किया।
      अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय ने भी बॉलीवुड सांग पर डांस किया।
      रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण।
      उद्योगपति रतन टाटा।
      हरभजन सिंह पत्नी गीता बसरा के साथ।
      रेखा और रणवीर कपूर।
      जूही चावला और दिशा पाटनी।
      होटल ट्राइडेंट में लगे कॉर्निवल में मुकेश अंबानी ने व्यंजनों का लुफ्त उठाया।
      अनिल अंबानी मां कोकिला बेन और जया बच्चन के साथ।
      आमिर खान।
      ईशा, हिलेरी और नीता।
      आयुष्मान खुराना और ज्योतिरादित्य सिंधिया।

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      बियोंसे की खास खूबसूरती की वजह से ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में जुड़ा ‘बूटिलिशस’ शब्द


      उदयपुर. ईशा अम्बानी-आनंद पीरामल की प्री-वेडिंग सेरेमनी के दूसरे दिन रविवार को सबसेज्यादा चर्चा का विषय अमेरिकन सिंगर बियोंसे रहीं। बियोंसे अपने संगीत और गायकी के लिए दुनियाभर में जानी जाती हैं। लोगउनकी खूबसूरती और स्टाइल केभीकायल हैं। उन्होंने यहां के सिटी पैलेस में 60 डांसर्स के साथ परफॉर्मेंस दी।

      बियोंसे की खूबसूरती का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि साल 2008 में बियोंसे के कारण ही ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में नया शब्द बूटिलिशस जोड़ा गया। यह एक स्लैंग शब्द है, जोखूबसूरत दिखने वाली महिलाओं के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। बूटी और डिलिशियस शब्दों को मिलाकर इसेईजाद किया गया है। पीपल और टाइम मैग्जीन ने बियोंसे को दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला और श्रेष्ठतम गायक के रूप में चुना। बियोंसे केतीनबच्चे हैं।

      सादगी से शादी की थी बेयोंसे ने
      बियोंसे की शादी बेहदसादगी से हुई थी। बियोंसे ने 2008 में अमेरिकन रैपर और संगीतकार जे जेड से घर के कुछ चुनिंदा सदस्यों की मौजूदगी में शादी की। बियोंसे ने हिलेरी क्लिंटन को अमेरिका का राष्ट्रपति बनाए जाने के समर्थन में आंदोलन भी चलाया था।

      1.80 करोड़ रुपए की ईयरिंग्स फैन्स में फेंक दी थी

      • 2017 के ग्रैमी अवॉर्ड के लिए बेयोंसे का नाम चुना गया है। बियोंसे ग्रैमी अवार्ड के लिए सबसे ज्यादा बार नामांकित की जाने वाली महिला हैं।
      • 2011 में जब बेयोंसे पहली बार मां बनने वाली थीं तब एमटीवी अवॉर्ड के दौरान अपने चाहने वालों को उन्होंने खुद के गर्भवती होने के बारे में बताया था।
      • बियोंसे अब तक 22 ग्रैमी अवॉर्ड्स जीत चुकी हैं। महिला कलाकारों में अब उनसे ज्यादा ग्रैमी सिर्फ एलिसन क्रॉस के पास है।
      • माना जाता है कि बियोंस को सिंथेसिया नामक सेंस डिसऑर्डर है, जिससे वे आवाज को सूंघने, चखने और देखने का दावा करती हैं।
      • 2003 में वीएचवन दीवा में परफॉर्म करते वक्त उन्होंने 1.80 करोड़ रुपए की कीमत वाली ईयरिंग्स फैन्स की भीड़ में फेंक दी थी। वे परफॉर्मेंस में इतनीमग्न थीं कि उन्हें यह तक नहीं पता था कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। बाद में उनके चचेरे भाई यह ईयरिंग ढूंढ लाए थे।
      • बियोंसे सोशल मीडिया पर अपने पर्सनल मोमेंट्स ज्यादा शेयर नहीं करतीं। उन्होंने कई लोगों को अपनी लाइफ शूट करने के लिए भी हायर किया हुआ है। बियोंस ट्विटर पर सिर्फ दस लोगों को फॉलो करती हैं।
      • बियोंस को खतरनाक स्टंट्स करने का शौक है। 2013 में में उन्होंने ऑकलैंड, न्यूजीलैंड मे 1000 फीटऊंचे स्काई टावर से बंजी जंपिंग की थी।


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      पॉप सिंगर बियोंसे नोल्स रविवार दोपहर उदयपुर पहुंचीं।
      फेंस की भीड़ के चलते सिक्युरिटी ने एयरपोर्ट पर बियोंसे की कार को घेरे रखा।
      बियोंसे ने करीब 40 मिनट परफॉर्मेंस दी।

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      बिजली गिरने से 40 मिनट पहले आपको बता देगा एप, स्थानीय भाषाओं में भी मिलेंगे अलर्ट


      औरंगाबाद . केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने ऐसा एप विकसित किया है, जो बिजली गिरने की चेतावनी 30 से 40 मिनट पहले दे देगा। इसका नाम ‘दामिनी’ रखा गया है। यह एप बिजली गिरने की समयपूर्व चेतावनी देने के साथ इसके बचाव की भी जानकारी देता है।इसे गूगल प्ले स्टोर से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है।

      इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) द्वारा विकसित इस एप पर 6 महीने से काम चल रहा था। इसे बनाने वाली टीम केसीनियर साइंटिस्ट डॉ. सुनील पवार ने बताया कि यह एप बिजली गिरने की चेतावनी के अलावा इससे सुरक्षा कैसे करनी चाहिए, प्राथमिक मेडिकल उपचार कैसे करें यह जानकारी भी देता है। खेत में काम करते वक्त, यात्रा के दौरान, घर के आसपास काम करते वक्त, बिजली गिरने की चेतावनी मिले तो कैसे बचाव करें, यह चित्र के साथ बताया गया है।


      अलर्ट अंग्रेजी और हिंदी भाषा में दिखेगा :एप खोलने के बाद आप जिस लोकेशन पर हैं, वहां का मैप दिखाने वाला सर्किल आएगा। यह सर्किल 20 किमी की डायमीटर में अगले 40 मिनट में होने वाली बिजली चेतावनी के बारे में अलर्ट करेगा। बिजली गिरने वाली है या नहीं इसका संदेश सर्किल के नीचे अंग्रेजी और हिंदी भाषा मे दिखेगा। अभी अलर्ट अंग्रेजी और हिंदी भाषा मे दिखता है, आगे इसे रीजनल भाषा में भी लाने की उम्मीद है।


      वैज्ञानिकों का कहना है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में बहुत सारे लोग खेती किसानी के कामों के लिए अपने अपने घरों से बाहर निकलते हैं। बिजली गिरने पर उनके चपेट में आने की आशंका ज्यादा बनी रहती है। यह एप खेती किसानी कामगारों के अलावा सभी लोगों के लिए उपयोग में आ सकता है। अरब महासागर में भारत का आधा हिस्सा प्रायद्वीप की तरह है, इसलिए ये मानसूनी हवाएं भारत के बहुत बड़े हिस्से को प्रभावित करती हैं। इस एप से हम अपना बेहतर बचाव कर सकते हैं।

      विकसित देशों में बचाव का सिस्टम हमसे बेहतर
      डॉ. सुनील पवार का कहना है कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी बिजली गिरती है, लेकिन मौत भारत में ही सबसे ज्यादा होती हैं। 2017 में ही बिजली गिरने से देशभर में 3 हजार से भी ज्यादा लोग मारे गए थे। इसकी वजह सिर्फ यह थी कि अन्य विकसित देशों में चेतावनी देने की बेहतर व्यवस्था है। अब इस एप के विकसित होने के बाद हम भी बेहतर बचाव कर सकते हैं। भारत में खूब बरसात होती है। उत्तर पूर्वी राज्यों में मानसूनी हवाएं तेज रफ्तार में पहुंचती हैं, ऐसी जगहों पर बिजली गिरने की आशंका बनी रहती है।



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      Aap will alert you 40 minutes before the lightning falls

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      माल्या के प्रत्यर्पण पर आज आ सकता है फैसला, ईडी-सीबीआई की टीमें यूके रवाना


      नई दिल्ली. भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण पर यूके की अदालत सोमवार को फैसला सुना सकती है। इस मामले में 12 सितंबर को आखिरी सुनवाई हुई थी। माल्या पर भारतीय बैंकों के 9,000 करोड़ रुपए बकाया हैं। इस मामले में जांच कर रही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमें भी यूके के लिए रवाना हो गई हैं।

      1. माल्या ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के बाद देश छोड़ दिया था। वह मार्च 2016 से लंदन में है। भारत सरकार लगातार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। 2017 में जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे से माल्या के प्रत्यर्पण की अपील की थी। पिछले साल 4 दिसंबर को इस मामले में यूके की कोर्ट में केस शुरू हुआ था।

      2. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या की वह मांग खारिज कर दी जिसमें उसने ईडी की कार्रवाई पर रोक लगाने की अपील की थी। ईडी ने मुंबई स्थित विशेष अदालत में अर्जी दाखिल कर मांग की थी कि माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जाए। माल्या ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में पिछले महीने बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की अर्जी खारिज कर दी थी। जिसके खिलाफ माल्या ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

      3. विजय माल्या ने गुरुवार को ट्वीट कर यह अपील दोहराई कि वह बैंकों का 100% बकाया चुकाने को तैयार है। लेकिनयह किस्सा खत्म होना चाहिए किउसने पैसा चुराया। माल्या ने बुधवार को सैटलमेंट का प्रस्ताव देते हुए कहा था कि वह साल 2016 में ही कर्ज चुकाने को तैयार था। इस बारे में सरकार को चिट्ठी भी लिखी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।



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          UK Court is expected to pronounce its judgment on Mallya extradition

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      शेरवानी सिलवाकर बैठे हुए हैं दोनों तरफ के दूल्हे: कुमार विश्वास की व्यंग्य शृंखला


      दोनों हाथों में एक-एक खिलौने वाला मोबाइल फोन चमकाते हुए हाजी दनदनाते हुए दरवाज़े से अंदर घुसे। कभी ये वाला फोन कान पर लगाते, कभी वो वाला फोन। मैं समझ तो गया कि इस समय हाजी परम मस्ती के मूड में है लेकिन, हाजी से जब तक पूछो नहीं, तब तक हाजी चुप।

      मैंने उत्सुकता से पूछा, ‘ये हाई-एन्ड फोन लिए कहां घूम रहे हो हाजी? इस सीज़न में विधायक वगैरह ख़रीदने के जुगाड़ में तो नहीं लगे?’ हाजी आंखें नचाते हुए बोले, ‘ये कंफ्यूज़नोत्सव का सेलिब्रेशन है महाकवि!’ मैं चौंका, ‘अमां हाजी, ये कौन-सी अंग्रेजी है और ये कौन-सा उत्सव है?’ हाजी ने कहा, ‘ऐसा है महाकवि! तुम्हें तो याद है एक समय अपने यहां धर्मपरिवर्तन का जोर चला था। उस समय बड़ा कंफ्यूज़न रहता था। अमरनाथ यात्रा बुक करवाने वाला अचानक हज की डिमांड करने लगता था और कभी-कभी उल्टा। उस ज़माने में मैंने ये दो फोन वाला फॉर्मूला अपनाया था।’

      मेरी बेचैनी बढ़ी, ‘अरे तो अब क्यों लिए घूम रहे हो ये फॉर्मूला?’ हाजी बोलने को तैयार बैठे थे, ‘अभी अपने यहां कुछ ऐसा ही माहौल नहीं है? एग्जि़़ट पोल ने और कन्फ्यूज़ कर दिया। कोई इनको जितवा रहा है, कोई उनको जितवा रहा है। हालत ये है कि दोनों तरफ के दूल्हे शेरवानी सिलवाकर बैठे हुए हैं कि कल को शपथ लेनी पड़ जाए और दर्ज़ी न मिले तो कहां जाएं।’ मैंने हाजी को अपने प्रिय मुद्‌दे पर आते देख जुमला मारा, ‘अब ये तो हाजी 11 को ही पता चलेगा कि किसके लिए 11 का अंक शुभ होगा और कौन 11 दिनों के शोक में जाएगा। लेकिन चैनलों ने अपने-अपने राम चुन लिए हैं।’

      हाजी आगे जुड़े, ‘कई एंकर तो ये कहते हुए नज़र आ रहे हैं कि फलां पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आख़िरी समय में बहुत मेहनत की, जैसे कि एंकर ने ख़ुद उनकी पदयात्रा के रास्ते बुहारे हों। यही हाल बेचारे अफसरों का है। अभी उनके सामने दो-दो आका हैं, पता नहीं कल कौन-सा सिर पर चढ़ बैठे। बजरी के थानेदार वज्रपात से बचने के लिए दोनों तरफ़ के तीन-तीन फेरे लगा रहे हैं। यहां तक कि टेंट वालों ने दोनों पार्टियों के मुताबिक़ रंगीन गुब्बारे मंगवा लिए हैं कि कल कौन-सा जजमान हो जाए, ये पता नहीं। कुल-मिलाकर सबका ध्यान चुनावी राज्यों पर है, एक तुम्हारे वाले सेनापति को छोड़कर। उसका भी कमाल ही है। स्कूल के आवारा लड़कों की तरह पटाखे के पलीते से अगरबत्ती जोड़कर मौक़ा-ए-वारदात से भाग जाता है। कार्यकर्ता वहां चुनाव लड़ाते रह जाते हैं, और सेनापतिजी ज़ुबान। बहरहाल अभी के माहौल में तो हर शायरी के ऊपर एक ही गाना याद आ रहा है - ‘इंतहा हो गई इंतज़ार की’



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      कुमार विश्वास।

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